@Uppolice की वेतन विसंगति आज तक न दूर हो पाई ?
2800 ग्रेड या 4200 इसमें आज तक समाधान न ढूँढ पाए ?
ये हवा बनाने का समय गया ?
घोषणा करनी है तो यूपी पुलिस के वेतन विसंगति को लेकर बोलिए ??
गोंडा के GRP में तैनात "आकाश सिंह" ने बहादुरी की मिसाल पेश की है. इस बहादुर सिपाही को "वीरता पुरस्कार" से सम्मानित किया जाना चाहिए.
"गोंडा" स्टेशन पर पैसे चुराने के मामले में दो युवक मारपीट कर रहे थे तभी सिपाही
"आकाश सिंह" वहां पहुंचे और दोनों को GRP थाने के बाहर लेकर गए.
वहां एक से पूछताछ कर छोड़ दिया और दूसरे को शक़ के आधार पर बैठा दिया. कुछ ही देर में आती हुई ट्रेन में चढ़ने के लिए चोर फरार हो गया.
पीछे पकड़ने गए "आकाश सिंह" ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की दूरी में गिर गए जिसके वजह से उनका दोनों पैर कट गया.
तत्काल एक लाख की मदत @dgpup ने की है !
लेकिन हमारी मांग है यूपी सरकार के असंवेदनशीलता को लेकर की तत्काल 1 करोड़ आर्थिक सहायता और लिपिक संवर्ग में इस आरक्षी को सम्मानपूर्वक नौकरी और परिवार में एक सदस्य को कार्यकारी बल में ��ौकरी प्रदान कई जाए तत्काल !
@samajwadiparty @yadavakhilesh
*पुलिस कर्मी अपनी नौकरी छोड़ रहे हैं — एक कड़वी सच्चाई*
“ *पुलिस कर्मचारी अब जा रहा है* ” — पुलिस की कार्यप्रणाली में बदलावो को देखते हुए मेरे अंतरात्मा का दुख इस प्रकार है —
आज देशभर के थानों में एक शांत लेकिन गहराई तक परेशान करने वाला बदलाव हो रहा है —
वह है कर्मचारियों के मन में बढ़ती थकान, बेबसी और मोहभंग।
पुलिस कर्मी अपनी नौकरियां छोड़ रहे हैं — *कुछ चुपचाप और कुछ भीतर ही भीतर टूटकर।*
वहीं, पुलिसकर्मी अपनी संतानों को अब पुलिस में भर्ती नहीं करना चाहते।
*ऐसा क्यों हो रहा है?*
🔹 1. *थानों के चारों ओर फैल�� नौकरशाही का जाल*
�� आम जनता की जान माल की सुरक्षा के बजाय पुलिस अब रिपोर्ट भरने, फॉर्म भरने और डाटा अपलोड करने में उलझे रहते हैं।
📍 “फोटो भेजो”, “प्रमाण दो”, “रिपोर्ट अपलोड करो” ई- साक्ष्य अपलोड, सीडी ऑनलाइन, cctns अपडेशन, ITSSO, eDAR अपलोड — यही उनका रोज़मर्रा का काम बन गया है।
📍 अब बीट में उनकी उपस्थिति घट रही है, जबकि स्क्रीन के सामने बिताया समय बढ़ रहा है।
🔹 2. *तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता*
📍 हर विषय में डिजिटल टूल, ऐप्स और ���्मार्ट बोर्ड थोपे जा रहे हैं।
📍 विषय, कार्य स्थल की परिस्थितियां, सामाजिक संस्कृति, क्षेत्रीय विषमताएं या संदर्भ को बिना समझे आदेश दिए जाते हैं — “तकनीक का उपयोग करो।”
📍 पुलिस कार्य प्रणाली से मानवीय स्पर्श, मूलभूत कार्य अब गायब हो गया है; पुलिस अब मशीन-केंद्रित बन गई है।
🔹 3. *पुलिस कर्मी बन गए हैं ‘इवेंट मैनेजर’*
📍 हर दिन कोई न कोई दिवस मनाना होता है — योग दिवस, मातृभाषा दिवस, पर्यावरण दिवस आदि।
📍 अब पुलिसिया गुणवत्ता नहीं, बल्कि कार्यक्रमों की संख्या और दिखावा सफलता का पैमाना बन गया है।
📍 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी दोनों इस प्रदर्शन संस्कृति के जाल में फंसे हुए हैं।
🔹 4. *ग्रामीण थानों की दयनीय स्थिति*
📍 कम नफरी होते हुए थाने के काम के साथ सारे इवेंट मैनेज करने के लिए मजबूर हैं।
📍 मूल जान माल की सुरक्षा के साथ-साथ उन्हे विद्यालयों में आत्म रक्षा प्रशिक्षण, साइबर जागृति अभियान, पॉक्सो जानकारी देना, ऑपरेशन गरिमा, सीएलजी मीटिंग्स, सुरक्षा सखी, ग्राम रक्षा दल, ट्रांसजेंडर लोगो के सम्मेलन करवाना, भिक्षा वृत्ति उन्मूलन, सड़क सुरक्षा, अभय कमांड कैमरों की निगरानी, सरकारी रिपोर्ट्स सब संभालनी पड़ती हैं।
📍 *अब वास्तविक पुलिस कार्य से अधिक महत्व “डाटा भेजने” को दिया जा रहा है।*
🔹 5. *मानसिक तनाव और आत्म-सम्मान की हानि*
📍 लगातार ऊपर से निगरानी ने पुलिस कर्मियों का आत्मविश्वास तोड़ दिया है।
📍 *हर काम का सबूत मांगा जाता है — विश्वास समाप्त हो गया है।*
📍 तनाव और व्यवहारिक समस्याओं से जूझते-जूझते पुलिस कर्मी भावनात्मक रूप से थक चुके हैं।
📍 माता-पिता, परिवार की परवरिश तो द��र मिलने के भी लाले रहते है, सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थिति तो नगण्य ही रहती है, और इसके बावजूद इन सभी की अवास्तविक अपेक्षाएं जिससे हर समय मानसिक दबाव झेलना पड़ता है।
🔹 6. *पुलिस का असली उद्देश्य खो गया है*
📍 थानों पर आंकड़े पूरा करने का भारी दबाव है।
📍 अनर्गल कार्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, चाहे उसकी जरूरत हो या नहीं, चाहे वे पुलिस से संबंधित है या नहीं।
📍 *अब पुलिस थाने “अपराध निय��त्रण की जगह राजनीत��क महत्वाकांक्षा पूरी करने एवं सत्ता के आंकड़े प्रदर्शित करने के अखाड़े बन गए हैं।*
📍 आज की पुलिस कार्य प्रणाली प्रदर्शन दिखाने की परियोजना बनकर रह गई है।
📍 पुलिस का मूल उद्देश्य अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों में भय पैदा करने का था जो अब डाटा ऑनलाइन और डेडलाइन के नीचे दब गया है।
📍 अब मूलभूत कार्यों से भटकाव से आम जनता पुलिस को लीपापोती कर समय पास करने और दिलासा देने के केन्द्र समझने लगी है, ��ुलिस का वास्तविक सम्मान भी खत्म सा हो गया है।
🔹 *अब विचार करने का समय है...*
पुलिस का असली केंद्र (थानों) को फिर से अपराध नियंत्रण के केन्द्र बनाने की आवश्यकता है, वहीं उच्चाधिकारियों को पुलिस कर्मियों से योग्यता से परे कई गुना अनर्गल कार्यों से बचा कर डिप्रेशन दूर करने पर विचार करना चाहिए,
ना कि सभी विभागों का कार्य पुलिस के जिम्मे थोप कर डाटा और रिपोर्ट मांग कर परेशानी बढ़ाने का कार्य करें।
यदि पुलिस को मूलभूत कार्यों से दूर कर समाज कल्याण पर ही केंद्रित करना हो तो पुलिस विभाग को समाज कल्याण विभाग के अधीन कर देना चाहिए ।
पुलिस की धुरी से इतर का��्य भार से पुलिस को स्वतंत्र नहीं किया गया तो आज के समय की माँग के अनुसार अपराध नियंत्रण नहीं होने से *आम जन में असुरक्षा की भावना पैदा होकर समाज में अराजकता का माहौल बनेगा* जिसके दूर गामी परिणाम बड़े
वीभत्स होंगे जिसके लिए इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
@NehaSinghratho Ek sarve k anusar log mante hai ki hamare desh m chutiya bahut bhare pade hai kitne %is bat se sahmat hai chori ki hoti to 240 ki jagah 400 par hote
@divyakumaari Yaha upadraviyo ko bahut buri tarah se khaded jayega jo tramp se nahi jhuka khud tramp bar bar bhok raha h mere priya mitra modi yaha dekh k khilaf jo jayega use pahel bahut sochna padega
क्या कभी सोचा देशवासियों ने या यूपी के नागरिकों ने की हम कितने पिछड़े हैं ?
आज एडवांस टेक्नोलॉजी और एडवांस AI का जमाना आ गया और इस देश और
यूपी की पुलिसिंग आज भी 1861 के अंग्रेजी कानून पर निर्भर है ?
मेरी संवेदना @Uppolice के कमर्चारियों और अधिकारियों के साथ है !
@UPGovt भी काश
मॉर्डन पुलिस एक्ट 2006 से संचालित होती ?
Ai टूल्स की सहायता इन्वेस्टिगेशन में ली जाती ?
चैट जीपीटी से एडवांस प्रोसीडिंग्स होती ?
@myogiadityanath जी को देश का सबसे एडवांस टेक्नोलॉजिकल मुख्यमंत्र��� कहा जाता ?
लेकिन कई नहीं चाहते कि लोकप्रियता टेक्नोलॉजी में भी इतिहास में टेक्नोलॉजी मैन के नाम से योगी आदित्यनाथ जी का नाम दर्ज हो ?
@Uppolice के जवानों की वेतन विसंगति का समाधान आवश्यक नहीं ?
लेकिन माननीयों की आर्थिक समस्याओ का निराकरण आवश्यक है ?
कहते हैं - वेतन विसंगति कोई विषय नहीं ?
उदाहरण- 19 वर्ष की सेवा पर एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि न्यायपालिका द्वारा आदेशित की जा रही लेकिन लाभ केवल ��से मिल रहा जो रीट दायर करेगा ?
अगर वेतन विसंगति या अनियमितता नहीं है तो फिर ये आदेश न्यायपालिका ने क्यो दिया और विभाग ने इसे क्यो माना ?
आर्थिक समानता किसी भी राष्ट्र के लोकतंत्र के शासक्तिकरण का सबसे ज्वलंत विषय होता है !
हम कोई घाना या सोमालिया में नहीं जो अमीर ही अमीर रहेगा ?
दिखावटी आत्ममुग्ध भाषणों से राज्य कर्मचारियों को आज़ादी नहीं मिलेगी ?
2800 ग्रेड की जगह 4200 होना चाहिए लेकिन सरकार के पास आर्थिक सलाहकारों की कमी है शायद ?
क्या इसे माना जाए आज़ादी का प्रतीक ?
विधानसभा लोकसभा या राज्यसभा में ये मुद्दे नहीं उठाये जाते क्यूँकि देश समोसे जैसे स्तंभों पर टीका है ?
सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तो को लेकर गंभीर है ? सर्विस मैटर में PIL हो नहीं सकती व्यवस्थाएं ऐसी हैं की बैसाखी 🩼 कभी छोड़नी न पड़े अधिकारियों ने ऐसी व्यवस्थाएं बना रखी हैं ?
बाकी सबको स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई 🇮🇳
#HappyIndependenceDay
#HappyIndependenceDay2025
राज्य कर्मचारियों के लिए अलग न्यायालय की व्यवस्था होनी चाहिए !
कई बार अन्य राज्यों में कई प्रकार के पारिवारिक ,सिविल मुकदमों के कारण वर्तमान तैनाती के स्थान से छुट्टी नहीं मिलती जिसके कारण Bw,NBW या एकपक्षीय आदेश हो जाते हैं ?
यदि बिना छुट्टी जाए तो वर्तमान तैनाती स्थल पर उसकी बाद इंट्री,रिपोर्ट या फाइल खोलकर उसका सर्विस रिकॉर्ड खराब कर दिया जाता है ?
ऐसे राज्य कर्मचारियों के लिए @MLJ_GoI को विशेष प्रावधान वाले सेंट्रल न्यायालय या ट्रिब्यूनल स्थापित करने चाहिए जहां मामला भले अन्य राज्य का हो लेकिन उपस्थिति क्रम वहीं से ऑनलाइन चाहे प्रावधानित दोष साबित होने तक वादी उसी न्यायलय में पैरवी करे केस फाइल करे !
अधिकतर राज्य कर्मचारियों के मुकदमों की सही पैरवी न होने के कारण उसके मुकदमे उनके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश के रूप में प्रवर्तित हो रहे हैं !
@UPGovt को इसकी शुरुआत करनी चाहिए द���श में सबसे पहले ?
वास्तविकता है कि जब तक 1861 का अंग्रेजी पुलिस एक्�� नहीं हटेगा जिसका निर्माण किया गया था आंदोलन और लोकतंत्र के दमन के लिए तब तक BNS या अन्य नए कानून���ं के उद्देश्य हासिल नहीं हो सकते !
@BJP4UP @RLDparty @RSSorg
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न्यायपालिका की उच्च व्यवस्था और हाईटेक लखनऊ के डिस्ट्रिक कोर्ट का दृश्य ?
सरकार बजट देती है और कागजों पर होता है उत्कृष्ट कार्य ?
#न्याय_विभाग शायद हाइकोर्ट के आगे देख और सोच नहीं पाता ?
ये तो क्षणिक परिदृश्य है आगे शौचालय और अन्य सुविधाओं की स्थिति भी देखिएगा ?
इंसान है अधिवक्ता,कोई कूड़े क�� ढेर नहीं और @Uppolice की पीएसी इकाई तो सी व्यू का मजा ले रही ?
विगत दिनों में एक सांप के काटने से सिपाही की मृत्यु हुई थी ईश्वर करे ऐसी घटना आगे न हो ?
वैसे भी सिग्नेचर बिल्डिंग में बैठने वाले माननीयों को ऐसी गंदगी से क्या सरोकार ?
अर्दली भी इससे बेहतर ड्यूटी करता है ?
न्याय की स्थिति बिल्कुल इसलिए इस दृश्य के समान है !
यूपी में यूंही नहीं न्याय व्यवस्था ध्वस्त होती जा रही कहावत है —
��ैसा वातावरण वैसा ही आचरण ?
जैसा अन्न वैसा मन ?
जिम्मेदार कौन ?
@UPGovt @uppwdofficial @RLDparty @BJP4UP @homeupgov @dgpup
उत्तर प्रदेश में पुलिस की इकाई PAC की महिला ट्रेनी कांस्टेबलस की आवाज पुलिस विभाग की लाचार और लचर दुर्व्यवस्था का सत्य है !
बजट के बाद भी ऐसी दुर्व्यवस्था और ऐसी लापरवाही वो भी चुनाव के ठीक पहले ?
किसको सुझाव दें आख़िर बंद कानो में कितना भोंपू 📣 बजाया जाए ?
एनडीए घटक के लिए भी शर्मिंदगी और चुनौती का समय है !
कमजोर नियंत्रण और पुलिस विभाग की शिथिलता का परिणाम सामने है !
यूपी की छवि की धज्जिया�� उड़ चुकी है अब बस सूचना विभाग ही प्रचार और छवि सुधार का मरहम लगाएगा !
पूरे देश की पुलिसिंग को लेकर विषय गंभीर है !
खाकी में हर रोज कभी दबाव से कभी प्रभाव से कभी अभाव से ईमानदार या दम तोड़ रहे या ईमानदारी ?
जरूरत है बदलाव की पॉलिसिंग के निर्माण की !!
पुलिसकर्मियों को टारगेट कर नेता बन रहे लोग ?
अधिकारियों का अहंकार संतुष्टि का माध्यम है निचले स्तर का पुलिसकर्मी ?
नेताओं के दरबार का अर्दली है पुलिसकर्मी आज ?
@Uppolice पर सबसे अधिक दबाव है पूरे ��ारत में !
इसलिए पहल यहीं से होनी चाहिए !
@RLDparty @BJP4UP @jayantrld
एक सिपाही के साथ खाकी की अस्मिता तार तार हुई !
उस सिपाही का मनोबल गिराया गया अपमानित किया गया ?
लखनऊ की धरती साक्षी बनी पुलिस के सबसे बड़े अपमान की ?अपराधी को बचाने की प्रेरणा किसी प्रेरक संरक्षण से मिली ?
कोई कंधा मिलकर खड़ा नहीं हुआ उस पीड़ित सिपाही के साथ ?
या सिर्फ घटना नहीं थी - आशाओं का ध्वस्तीकरण , मनोबल का शून्यीकरण, भेदभाव का समीकरण था और सिपाही कर्मचा��ी के असुरक्षा और असुरक्षित होने की प्रतीकात्मक चेतावनी थी ?
क्या गई खाकी और निष्पक्षता कर्तव्यपरायणता के प्रति ?
इतिहास है जब कोई जिम्मेदार अधिकारी ईमानदारी से कार्य करने लगता है तो यही सिंडिकेट भ्रष्टाचार की और अधिक परतें उजागर न हो इसलिए पहले ही सक्रिय हो जाती हैं ?
आज @DMKanpur के साथ वही करने का प्रयास किया जा रहा है !
आगे की जाँच और १/३ कर्मचारियों की गैरमौजूदगी क्यों न माना जाए की यूपी के लगभग हर जिले में स्वास्थ्य विभाग में स्थिति यही है ?
@myogiadityanath जी को दबाव में न आते हुए कठ���र निर्णय लेने चाहिए क्यूंकि भद्द और फ़ज़ीहत लगातार जारी है !
सिंडिकेट और नेताओ की चिट्ठियाँ कभी योगीजी के सद्कार्यों पर इस प्रकार नहीं आई सामने जितनी एक अधिकारी के सामने भर्ष्ट आचरण को बचाने के लिए आ रही ?
इस क��त्य से ये नेता भी अनैतिक मानसिकता को उजागर कर रहे हैं ! प्रशासनिक कार्य में राजनीतिक दबाव का ज्वलंत उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है जिसका पूरा लाभ विपक्ष को मिलेगा ?
बायोमेट्रिक अनिवार्यता हर विभाग में जब तक लागू नहीं होगी तब तक उत्तर प्रदेश @UPGovt केवल धक्के से सरकार का संचालन करती रहेगी ये संदेश जा रहा जनता में ! मुंबई जैसे स्थानों पर लोग हंस रहे हैं ?
@jayantrld @ChiefSecy_UP @BJP4UP @RLDparty @RSSorg
एक बात तय है इस घटना के बाद -
@Uppolice के जवान गुड बुक में रहनेवाले जिम्मेदारों पर भरोसा अपनी जिम्मेदारी पर करें !
अन्यथा जो इस सिपाही के साथ हुआ शायद उससे अधिक बदतर स्थिति के लिए तैयार रहें ?
सिग्नेचर बिल्डिंग में बैठनेवाले अगर राजा हैं तो हर सिपाही भी अपने परिवार का राजा और सम्��ाट 👑 है !
कई सिपाही हैं जिनके खेत इतने हैं जितनी इन अधिकारियों के साल भर का राशन होगा उससे अधिक उन सिपाहियों के खेत में बैलों गायों के लिए बरसीन की पैदावार की जाती है !
@IPS_Association है तो पुलिस कर्मचारियों का एसोसिएशन क्यो नहीं ???
इसी उत्पीड़न और अत्याचार के साथ इंसाफ की आवाज को दबाने के लिए ???