एक वह दौर था जब कांवड़ियों पर लाठीया चलती थी,उनको पूछने वाला कोई नहीं था
एक आज का दौर है जब मुख्यमंत्री खुद कावड़ियों पर फूल बरसा रहे हैं
जगह-जगह उनके स्वागत सम्मान की,सेवा की व्यवस्थाएं की गई है,
हर हर महादेव के नारे गूंज रहे हैं पूरा भक्तिमय माहौल है
जय हो योगी सरकार की
मैने सोचा नही था कि मैं नेहा बोरा के बारे में दुबारा लिखूंगी क्योकि पांच साल से पीएचडी करने में अटकी नेहा पढ़ाई के अलावा सभी कुछ में इंटरेस्टेड है...
पर हम उनको इस बात के लिए ताना नही दे सकते क्योंकि आदमी चाहे 50 का हो जाए या साठ का ,वो पढ़ने की इच्छा रखे तो छात्र कहला सकता है और नेहा की उम्र ही क्या है...कन्हैया कुमार तो अभी तक छात्र नेता ही कहलाता था और उमर खालिद भीअभी तक छात्र ही है...
पर ये जो लोग इंक फेंकने को जघन्य अपराध की श्रेणी में रख रहे हैं, क्या वो बताएंगे कि छात्र आंदोलन का कोड आफ कंडक्ट क्या होता है...पत्थर फेंकना,गाली गलौज करना या झंडे स्लोगन दिखाना,स्याही फेंकना,अपने नारो को बुलंद आवाज देना...आखिर मेरा कड़वा मीठा ,तुम्हारा कड़वा थू थू कैसे हो गया...
नेहा को बुरा लगता है कि कोई उन्हे देशद्रोही कैसे कह सकता है तो वो उसे फटाक से संघी, आरएसएस वाला कह देती है...पर इस तरह की लाजिक की समझ रखने वाला तो कह देगा की जैसे उमर का सपोर्ट करना उनका धर्म है,वैसे ही उन पर स्याही फेंकना उसका कर्म है...
नेहा का बोलना,उनका हावभाव और 11 -12 साल के बच्चों को आइसा के समर्थन में नारेबाजी के लिए बुलवाना उन्हे ना छात्र साबित करता है,ना ही वो नेता बन पाई हैं..
नेहा कहती हैं कि हमने लाठियां खाई ,हमने पैलेट गन खाए,पर नेहा तो दिल्ली पुलिस पर उनका पैर फ्रैक्चर कर देने का आरोप लगाने के बाद छैया छैया पर नाच रही थी.... पत्थरबाजी और हिंसा का लुफ्त उठा कर तो उन्होने ये सब कब खाया कि डकार तक नही आई...15 दिन तो लगे उनको झारखंड पहुंचने में..
बाकी झारखंड के छात्रों को जो समझ में आया उन्होंने किया,पर इस तरह हर उस छात्र को अगर संघी घोषित कर दोगी फिर इस पीएचडी स्तर की पढ़ाई का क्या फायदा ,जो लाल सलाम कह के आरोप लगाना जानता है,पर उसे ब्लू रंग की स्याही बर्दाश्त नही है...
पर एक छात्र की याद्दाश्त आखिर कैसे इतनी कमजोर होती है कि ना उनको 2019 में जेएनयू वीसी जगदीश कुमार को घेर कर स्याही फेंकने की कोशिश याद आती है ना दशहरा में अमित शाह मोदी का रावण बना कर पुतला जलाना याद आता है..
ये तो वही बात हो गई कि दिल्ली वाले करें तो छात्र आंदोलन, झारखंड वाले करें तो जघन्य अपराध…तुम्हारे हाथ का पत्थर प्रतिरोध है और झारखंडी के हाथ की स्याही अपराध...
तुम्हारी गालियां लोकतांत्रिक आक्रोश हैं और कोई तुम्हारे विचारों का विरोध करे तो आरएसएस वाला..
खैर आखिर में सवाल तो बस इतना है कि लोकतंत्र में नियम और नैतिकता भी अब आइसा,कांग्रेस और पीडी गठबंधन की विचारधारा देखकर लिखे जाएंगे क्या ?
बारिश बदली, दिल्ली बदली 🌧️ जलभराव खत्म, ट्रैफ़िक एकदम स्मूथ
भारी बारिश के बावजूद दिल्ली की सड़कों पर बेहतर ट्रैफ़िक और जल निकासी (drainage management) देखकर खुशी हुई। दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी के ठोस और अग्रिम कदमों का असर अब ज़मीन पर दिख रहा है।
दावे 'गड्ढा मुक्त पंजाब' के और ज़मीन पर सड़कों का यह हाल!
दावों और हकीकत का अंतर साफ दिख रहा है। जनता को खोखले वादे नहीं, सुरक्षित और बेहतर सड़कें चाहिए!
विपक्ष में विरोध, सत्ता में वॉटर कैनन! 🛑
युवा क्रांति और लोकतंत्र पर ज्ञान देना आसान है, लेकिन सवाल पूछते ही कांग्रेस और AAP का असली चेहरा सामने आता है।
केरल में कांग्रेस: भाषण में राहुल का प्यार, सड़कों पर पुलिस का वॉटर कैनन
पंजाब में AAP: हक मांगते अभ्यर्थियों पर पानी और लाठी
दिल्ली में मीडिया कैमरों के सामने राहुल गांधी दोनो हाथों में दो लड़कियां लिए भाषण देते फिर रहे है की पुलिस ने डंडा क्यो मारा ....
जरा ये वीडियो देखिए
ये केरल का है
पानी की धार कांग्रेस की है ओर सामने केरल के छात्र ह
मुद्दा पेपर लीक का ह ।
बताओ रे कांग्रेस वालो
क्या दिल्ली की वंपन्थनिया ही छात्र है के
ये केरल वाले छात्र ना हे के
या केरल कांग्रेस तुम्हारे झंडू के बस में ना है
कोई आंदोलनजीवी नहीं अपना एजेंडा चला पाया यहां पर
इतना मर्यादित, इतना संतुलित, इतना सैद्धांतिक आंदोलन कर रहे हैं झारखंड के ये छात्र कि देश नज़ीर दो सकता है इनकी-
आंदोलन हो तो ऐसा ❤️
मोहनजोदड़ो के जलकुंड में उतरने के लिए सीढियां हैं. और उसके पीछे कमरे बने थे.
वाराणसी के जलकुंड में भी उतरने के लिए सीढियां हैं और उनके पीछे कमरे बने हैं.
4500 साल पहले यानी 2500 BC में जैसे मोहनजोदड़ो के जलकुंड में स्नान कर लोग बौद्ध-स्तूप जाया करते थे.
वैसे ही वाराणसी के जलकुंड में भी स्नान कर लोग दुर्ग-मंदिर जाया करते हैं.
मोहनजोदड़ो का जलकुंड बौद्ध सभ्यता का प्रतीक है. वाराणसी का जलकुंड ब्राह्मण सभ्यता का प्रतीक है.
इसमें कोई शक नही है कि सिंधु घाटी सभ्यता हु महान बौद्ध सभ्यता थी.
Source : इतिहास का मुआयना
Author : डॉ राजेन्द्र प्रसाद सिंह
’लूट की दुकान’ की फिर खुली पोल!
बावल विधानसभा से कांग्रेसी दावेदार सुचित्रा देवी अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ राहुल गांधी के घर के बाहर खड़ी हैं और उनसे पूछ रही हैं — ‘जब टिकट नहीं देना था, तो 10 जनपथ के नाम पर रिश्वत क्यों ली?’
के.सी. वेणुगोपाल और करीबी सलाहकारों के खिलाफ FIR तो हो गई, पर क्या पीड़िता का पैसा वापस आएगा, या इसे राजनीतिक चंदा मान लिया जाएगा?