संपूर्ण ब्रह्मांड के सर्वकालिक, सार्वभौमिक सम्राट प्रभु श्री राम आपका स्वागत है।🙏🚩❤️
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।
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इस #WorldEnvironmentDay (विश्व पर्यावरण दिवस) पर, हम भारत की हरित प्रगति (Green Strides) को पाँच प्रमुख उपलब्धियों के माध्यम से रेखांकित कर रहे हैं। वैश्विक वन्यजीव कूटनीति का नेतृत्व करने ���र महत्त्वपूर्ण आर्द्रभूमि (Wetlands) की सुरक्षा से लेकर आक्रामक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने तक, भारत एक लचीले कल के लिए प्रकृति-आधारित समाधान प्रदान कर रहा है।
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मलिहा���ाद: आम उत्पादन की समृद्ध परंपरा का प्रतीक
उत्तर प्रदेश के जनपद लखनऊ में स्थित मलिहाबाद देश-दुनिया में “आम की राजधानी” के रूप में अपनी विशिष्ट पहचा�� रखता है। GI टैग प्राप्त दशहरी आम, सैकड़ों किस्मों की विविधता, उपजाऊ भूमि और बागवानी की समृद्ध परंपरा ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर विशेष प्रतिष्ठा दिलाई है।
पद्म श्री कलीमुल्लाह खान जैसे प्रख्यात बागवानों की अद्भुत कला और पीढ़ियों से सहेजे गए आम के बाग मलिहाबाद की गौरवशाली विरासत को और समृद्ध करते हैं। यहाँ का प्रत्येक बाग केवल फल उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि कृषि ज्ञान, स्थानीय परंपरा और प्राकृतिक समृद्धि का जीवंत प्रतीक है।
आज मलिहाबाद उत्तर प्रदेश की उस कृषि उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी खुशबू सीमाओं से परे विश्वभर में महसूस की जाती है।
इस आम के मौसम में मलिहाबाद के आमों का स्वाद अवश्य लें और उस विरासत से जुड़ें, जिसने उत्तर प्रदेश को विश्व मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
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आकार में छोटी, लेकिन प्रभाव बहुत बड़ा।
मधुमक्खियाँ उन पौधों को परागित करती हैं जो हमारा पेट भरते हैं, जैव विविधता का समर्थन करते हैं, पारिस्थितिक तंत्र को मज़बूत करते हैं और हमारे ग्रह को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। फिर भी, ये महत्त्वपूर्ण परागणक आवास के नुकसान, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और असंतोषजनक कृषि पद्धतियो��� के कारण बढ़ते खतरों का सामना कर रहे हैं।
इस विश्व पर्यावरण दिवस पर, आइए हमारे पर्यावरण के लिए अथक परिश्रम करने वाले इन नन्हे रक्षकों को पहचानें और उनकी रक्षा के लिए कदम उठाएं।
क्योंकि जब मधुमक्खियाँ समृद्ध होती हैं, तो प्रकृति समृद्ध होती है।
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हम हर द���न प्रकृति की सेवाओं का लाभ उठाते हैं—ताज़ी हवा, स्वच्छ पानी, पेड़ों की छाया और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन।
सबसे खूबसूरत बात यह है कि प्रकृति हमसे पैसे नहीं मांगती।
लेकिन वह एक चीज़ ज़रूर चाहती है—संरक्षण।
प्रकृति की रक्षा ही भविष्य की सुरक्षा है। आइए, इस विश्व पर्यावरण दिवस पर अपनी जिम्मेदारी निभाएँ।
🌱एक पेड़ लगाएँ
♻️कचरा कम करें और पुनर्चक्रण अपनाएँ
💧पानी बचाएँ
🌍पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनें
क्योंकि पृथ्वी हमारे पूर्वजों की विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमानत है।
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विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर जारी रिपोर्ट ने पर्यावरण, स्वास्थ्य और सतत विकास के क्षेत्र में राज्यों की वास्तविक स्थिति को सामने रखा है।
रिपोर्ट बताती है कि नवीकरणीय ऊर्जा में प्रगति के बावजूद अपशिष्ट प्रबंधन, वायु प्रदूषण, सार्वजनिक अवसंरचना और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति अब भी बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
एक स्वच्छ और सतत भविष्य के लिए केवल नीतियाँ ही नहीं, ब��्कि प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
आपके अनुसार पर्यावरण संरक्षण के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
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@Prad_Rajput ���😅 हमको भी देख कर आश्चर्य हुआ कि आपके फोटो में ऐसी किताबें क्यूँ डाल दिया। 📚
मे��ी chatgpt की बात में साहित्य, दर्शन और civil services वाली चर्चा रहती है इसीलिए मेरे में शामिल कर दिया है। 🥰
This 4,500-year-old terracotta dice from the Indus-Saraswati Civilization is a powerful reminder of India’s living heritage. Dicing is also mentioned as a popular game in Rig and Atharva Vedas (two of the four sacred Vedic scriptures).
From symbols and craftsmanship to rituals, yogic practices, and collective memory, numerous elements of ancient Indian civilization continue to thrive in the daily social and religious life of Indian society across regions and communities.
Civilizational inheritance is not just about geography or ruins, it is defined by living customs, symbols, rituals, and unbroken cultural consciousness. India is the enduring living continuity of the Indus-Saraswati Civilization.
#IndusSaraswatiCivilization #AncientIndianHeritage
मेरी पढ़ी दस सबसे ज़्यादा मनपसंद पुस्तकें।
1- मनोरंजक भौतिकी।
आपको वेदप्रकाश शर्मा, धर्मवीर भारती से नये या शेक्सपियर या कालिदास से पुराने लेखकों की पुस्तकों की जगह लिस्ट में इस पुस्तक का नाम पढ़ के आश्चर्य होगा पर मेरे भाई विश्वास करो,
कक्षा 11 में मैंने इस किताब के दोनों पार्ट रात में जग के लैंप की रोशनी से पढ़े थे क्योंकि बिजली खराब थी उस रात।
अगर आपको फिजिक्स में रत्ती भर भी इंटरेस्ट है तो ये बेइंतहा इंट्रेस्टिंग किताब है।
साहित्य सिर्फ शब्दों की सीमाओं में ही नहीं बंधा होता, विज्ञान के फॉर्मूलों को हल्के फुल्के दिलचस्प अंदाज में लिख देना भी साहित्य ही है।
सचिन तेंदुलकर की पहली वनडे शतक उनके पदार्पण के सात आठ साल बाद आई।
आंकड़े देख के जज करने वाले उन्हें इसलिए कमतर कह सकते हैं।
पर जिन्होंने सचिन की शुरुआत देखी है।
वो इस बात पर सिर्फ हंस देंगे।
अब्दुल कादिर पर तीन छक्कों के बाद सचिन सबसे बड़े क्रिकेट स्टार बन चुके थे और जिसने 1989 से 1999 के सचिन को नहीं देखा, वो समझ भी नहीं पाएंगे कि सचिन आज भी इतने बड़े क्यों माने जाते हैं।
सचिन ने जिस युग में शुरुआत की थी तब बल्लेबाजी में 250 रन मैच जिताऊ स्कोर होता था और 90 स्ट्राइक रेट से खेलने वाला विध्वंसक बल्लेबाज माना जाता था।
बिल्कुल शब्दशः सचिन के टीम में आने के बाद उनके ऊपर ही सारी जिम्मेदारी मानी जाती थी।
उन्हें कम रन बनाने पर बहुत गालियाँ भी देते थे लोग टीवी के आगे बैठ कर।
उनसे गेंदबाजी में भी अच्छे की उम्मीद होती थी और सचिन के आउट होने के बाद टीवी बंद होता हो या न होता हो, खुद मेरे घर में लोग इधर उधर हो जाते थे।
जब 92 के विश्वकप में बॉथम ने सचिन को फंसा कर आउट किया था तब उनका सेलिब्रेशन बता रहा था कि मात्र 3 साल पुराने सचिन क्या हैं अभी।
सचिन की लोकप्रियता इतनी थी कि उन्हें अपना भेस बदल के इंग्लैंड में घूमना पड़ता था जब काउंटी खेलने गए
साढ़े तीन दशक बाद भारत को सचिन जैसा ही कम उम्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला एक खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी मिला है। जिसकी बल्लेबाजी देखने लोग टीवी खोलते हैं और जिसके आउट होने के बाद उन्हें मैच में इंट्रेस्ट नहीं रहता।
और इसे अगर जल्द इंटरनेशनल न खिलाया गया तो ये उसके और भारतीय क्रिकेट प्रेमियों दोनों के साथ अन्याय होगा।