राहुल गांधी अपनी भन्नाहट मीडिया पर निकाल रहे हैं। दरअसल उनको आदत है ऐसे पत्रकारों की जो बताते रहे हों कि कैसे राहुल गांधी ने बुलेट पर बैठकर उसे और हसीन बना दिया...
बिना किसी उपलब्धि के मैगजीन के कवर पेज पर छपने की पुरानी आदत है।
ऐसे में सवाल पूछा जाना कहां अच्छा लगेगा।
हांलाकि वो ये भूल जाते हैं कि उनके बिना तर्क और तथ्य के बयान भी मीडिया पर भर भरकर शायद इसलिए चल जाते हैं क्योंकि उनके सरनेम में गांधी है और मीडिया का एक बड़ा इकोसिस्टम आज भी उनके परिवार के सरनेम के ऑरा में काम करता है।
वरना राहुल गांधी से कहीं टैलेंटेड, मेहनती और बेहतर नेता कांग्रेस पार्टी में हैं लेकिन मीडिया के माइक और कैमरों का इंतजार ही करते रह जाते हैं।
शायद राहुल जी को भविष्य के संकट का अंदेशा हो रहा है, इसलिए फ्रस्ट्रेशन मीडिया पर निकाल रहे हैं..
गजबे है।