यह पत्र जरूर 2 वर्ष पुराना है लेकिन डीपीआई का यह झूठ आज भी ताज़ा है 2 वर्ष पहले डीपीआई द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग उपसचिव को पत्र के माध्��म से बताया कि #अतिथि_शिक्षको के नियमितीकरण की कार्यवाही प्रचलन में है अब इतने दिनों तक कोन सी कार्यवाही प्रचलन में है इसका जवाब कोन देगा
मध्यप्रदेश में शिक्षा का हाल पूछिए तो जवाब मिलेगा — योग्य बैठे हैं बेरोज़गार, और पढ़ाने वाले हैं अस्थायी सरकार के भरोसे!
चयनित अभ्यर्थी जिन्होंने Eligibility Test और Selection Test पास किया, वे आज भी नियुक्ति की राह देख रहे हैं। 2023 की भर्ती में कई विषयों में शून्य पद घोषित कर दिए गए — यानी पढ़ाने वाले विषय तो हैं, पर शिक्षक नहीं! अब मांग है कि कम से कम 20,000 पद बढ़ाए जाएं और वेटिंग लिस्ट से दूसरी काउंसलिंग जल्द की जाए।
उधर 70,000 अतिथि शिक्षक सालों से अस्थायी कुर्सी पर टिके हैं। अदालत के आदेश (WP 18935/18) के बावजूद नियमितीकरण नहीं हुआ। RTE कानून को ठेंगा दिखाकर शिक्षा विभाग ‘जुगाड़ व्यवस्था’ चला रहा है। न नियुक्ति की निश्चितता, न वेतन की गरिमा — फिर कैसी CM Rise School?
29 अक्टूबर को अंबेडकर पार्क में शिक्षकों ने मुंडन कर विरोध जताया, तो किसी ने कटोरा थाम लिया। अब कह रहे हैं — अगर 15 दिन में मांगे नहीं मानी गईं तो सामूहिक मुंडन और आमरण अनशन होगा।
सरकार प्रचार में शिक्षा सुधार की बात करती है, पर जमीन पर हाल ये है कि शिक्षक पढ़ाने से पहले अपनी रोज़ी की लड़ाई लड़ रहे हैं!
लगता है मध्यप्रदेश में शिक्षा अब किताबों में नहीं, धरनों और घोषणाओं में पढ़ाई जा रही है!https://t.co/N8x2g3BxEi मप्र
मध्यप्रदेश में शिक्षा का हाल पूछिए तो जवाब मिलेगा — योग्य बैठे हैं बेरोज़गार, और पढ़ाने वाले हैं अस्थायी सरकार के भरोसे!
चयनित अभ्यर्थी जिन्होंने Eligibility Test और Selection Test पास किया, वे आज भी नियुक्ति की राह देख रहे हैं। 2023 की भर्ती में कई विषयों में शून्य पद घोषित कर दिए गए — यानी पढ़ाने वाले विषय तो हैं, पर शिक्षक नहीं! अब मा���ग है कि कम से कम 20,000 पद बढ़ाए जाएं और वेटिंग लिस्ट से दूसरी काउंसलिंग जल्द की जाए।
उधर 70,000 अतिथि शिक्षक सालों से अस्थायी कुर्सी पर टिके हैं। अदालत के आदेश (WP 18935/18) के बावजूद नियमितीकरण नहीं हुआ। RTE कानून को ठेंगा दिखाकर शिक्षा विभाग ‘जुगाड़ व्यवस्था’ चला रहा है। न नियुक्ति की निश्चितता, न वेतन की गरिमा — फिर कैसी CM Rise School?
29 अक्टूबर को अंबेडकर पार्क में शिक्षकों ने मुंडन कर विरोध जताया, तो किसी ने कटोरा थाम लिया। अब कह रहे हैं — अगर 15 दिन में मांगे नहीं मानी गईं तो सामूहिक मुंडन और आमरण अनशन होगा।
सरकार प्रचार में शिक्षा सुधार की बात करती है, पर जमीन पर हाल ये है कि शिक्षक पढ़ाने से पहले अपनी रोज़ी की लड़ाई लड़ रहे हैं!
लगता है मध्यप्रदेश में शिक्षा अब किताबों में नहीं, धरनों और घोषणाओं में पढ़ाई जा रही है!https://t.co/N8x2g3BxEi मप्र
@BhopalSamachar जो अतिथि शिक्षक नियमित शिक्षको के पदों पर पिछले 18 वर्षो से अल्प मानदेय पर अपने भविष्य की चिंता किये बिना पूरे मनोयोग और ईमानदारी से सेवाएं देते हुए हजारों बच्चो के भविष्य गढ़ चुका हो ऐसे में सबसे उपयुक्त उन पदों पर अनुभव व योग्यता के हिसाब से अतिथि शिक्षक ही है @DrMohanYadav51
#शिक्षक_दिवस का वास्तविक सम्मान तभी है जब शिक्षक सुरक्षित, सम्मानित और स्थायी रोजगार में हों। लेकिन मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने शिक्षकों को सिर्फ़ छलने का काम किया है।
चयनित शिक्षक वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हजारों पद खाली हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
अतिथि शिक्षकों को लेकर किए गए वादे सिर्फ़ मंच की बात बनकर रह गए। आज शिक्षा व्यवस्था बदहाल है और इसका सबसे बड़ा कारण भाजपा की शिक्षकों के प्रति संवेदनहीन नीतियाँ हैं।
@GUEST__TEACHER@RavidasShyamlal
#अतिथि_शिक्षक #अतिथिविद्व���न
@BhopalSamachar रिक्त पदों पर सिर्फ 100% अतिथि शिक्षक की भर्ती होना चाहिए l अतिथि शिक्षक ���नुभवी हैं, सरकार अनुभव का फायदा उठाकर बच्चों को लाभान्वित करें l
#महापंचायत की घोषणाएं पूरी होगी
@BJP4MP सरकार वादा निभाए ll