वाकई ये दृश्य बेहद शानदार जहा पुलिस वैन मे भरकर प्रदर्शनकारियों को ले जा रही है मगर रास्ते मे एक प्रदर्शनकारी धीमी चलती वैन का गेट खोल देता है मगर इस वाक्य के दौरान जो खुशी प्रदर्शनकारियों के चहेरे पर जो खुशी दिखाई पडती है वो बेहद सुकून भरी होती है
"यह मुद्दा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी का नहीं है, यह मुद्दा युवाओं छात्र और नौजवानों का है। क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? युवाओं के लिए सदन में क्यों नहीं बोल सकते हैं।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
ये डेमोक्रेसी है!😳😲
पुलिस उनकी है, डंडे उनके है, सिस्टम उनका है सब-कुछ उनका है
तनख्वाह से पैसा कटता है ना 100रुपये कमाती 30 रुपये देती हू ना फिर क्या होता है उसका, ये होता है आप लोग मेरे बच्चो पर डंडे मारोगे सिर्फ इसलिए कि वो अपना हक मांगना रहे
“अगर मुल्क की रहनुमाई एक जाहिल करेगा, तो वह यही चाहेगा कि पूरा देश उसकी तरह जाहिल, नाक़ाबिल, नासमझ और बेरहम बने।”
~ नसीरुद्दीन जी
सलाम उस हर युवा और छात्र को, जिन्होंने लड़ना नहीं छोड़ा, झुकना नहीं स्वीकारा, और लाठियाँ टूटीं, लेकिन वे नहीं टूटे।
ये छोटी कोशिश जरूर है मगर दिल कितना बडा है ये बताता है
डेमोक्रेसी मे चुनी हुई सरकार और जनता के बीच ईगो बैटल नही हो सकता है जब राजनाथ सिंह कहते है कि हमारी सरकार मे इस्तीफे नही होते है तो वो ये कह रहे है कि हमारी सरकार बरबर है वो ये कह रहे है कि हम डिक्टेटरशिप चला रहे है चुनी हुई सरकार मे इस्तीफे ना हो ऐसा कैसे हो सकता है
विपक्ष के नेता को सड़क से जिस तरह उठाया गया और बुरी तरह घायल किया गया, वह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है...अब उस सड़क का नाम 'लोक कल्याण मार्ग' है और लोगों के कल्याण के लिए राहुल गांधी वहां बैठे थे और उनको, प्रियंका गांधी और तमाम नेताओं को उठा लिया गया, यह कहां का लोकतंत्र है?
नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी को जिस बर्बरता के साथ घसीटा गया, उन्हें चोट पहुंची, ये स्वीकार्य नहीं है।
राहुल गांधी जी लोक कल्याण मार्ग पर लोगों की भलाई के लिए बैठे थे, लेकिन उन्हें और प्रियंका गांधी जी समेत कई अन्य नेताओं को वहां से उठा लिया गया।
आज जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है।
: @SachinPilot जी
केरल CM वी डी सतीशन PM आवास के बाहर पहुंचे। यहां राहुल गांधी धरना दे रहे हैं। तमाम कांग्रेसी नेता यहां पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
एक लोकतंत्र में कई बार संसद से अधिक मज़बूत घेरेबंदी सड़क पर की जा सकती है। यहां 'माइक बंद' किए जाने की आशंका भी नहीं होती!
जब बच्चे तक न उठा सकते आवाज़
तो कैसे कहें कि ये वतन है आज़ाद?
आज भाजपा के कट्टर समर्थक भी शर्मिंदा हैं और पश्चाताप और प्रायश्चित की आग में जल रहे हैं, उनका भी तो परिवार है और परिवार में बच्चे भी हैं, और उन बच्चों का भी वर्तमान और भविष्य है।
अब कोई भाजपा से भविष्य की क्या उम्मीद करे, जब वर्तमान में ही जनता भाजपा से पूरी तरह नाउम्मीद हो गई है।
आज हर उम्र के लाखों लोगों ने बेख़ौफ़ होकर जिस तरह भाजपा के विरोध में एकजुटता दिखाई है, सच तो ये है कि उस जन-आक्रोश को देखकर भाजपाई और उनके संगी-साथी बेहद डर गये हैं। ये वो आम जनता है जिसे सरकार की किसी भी एजेंसी का भय नहीं है।
भाजपा ख़त्म!
ज़ुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है,
वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है।
आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया। मैंने जलियांवाला बाग का वह दौर नहीं देखा, लेकिन आज जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद अवश्य दिला दी।
लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि उस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से दिया जाए, तो यह केवल कुछ लोगों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।
इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ, आज से मैं संसद भवन परिसर में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ रहा हूँ। जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।