যারা বিজেপিকে সমর্থন করে বা কমিউনিস্টদের বিরুদ্ধে কথা বলে,তাদের বিরুদ্ধে অশিক্ষিত,চাড্ডি এই শব্দগুলো ব্যবহার করা হয়। কমিউনিস্টরা তাদের এমনভাবে অবজ্ঞা করে যেন তারা যেন খুবই উচ্চশিক্ষিত।
@Bjp_Debjit সপাটে চড় দিয়েছেন।
“I was not involved in the freedom struggle at all. In fact, I opposed it.”
~ Jawaharlal Nehru
A rare video footage allegedly shows Nehru being interviewed by a British journalist.
In the interview, Nehru allegedly says that Gandhi did not want the partition of India, but that he himself was responsible for making it happen.🤬🤬🤬
लाखों दर्शकों से कहता हूँ, जाकर कोई फैक्ट-चेक करे। 1896 के कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम् गाया गया, जिसकी अध्यक्षता मुस्लिम नेता रहमतुल्लाह अहमद सयानी ने की।
वहाँ से लेकर 1923 तक कभी कोई आपत्ति नहीं हुई। 1923 के अधिवेशन में तो उस समय मोहम्मद अली जौहर ने उसकी अध्यक्षता की थी उन्होंने आपत्ति की फिर भी पूरा गाया। झूठ बोलते हैं ये लोग।
मैं पूछना चाहता हूँ, 1896 से 1937 तक हर बार कांग्रेस पूरा गा रही थी, तो 1937 में क्या हुआ जो काट दिया?
मुस्लिम लीग और जिन्ना ने कहा कि आपको यह वंदे मातरम् काटना पड़ेगा, आप एक के बाद एक सरेंडर कर रहे थे। 1905 में बंग-भंग के बाद उस समय सारे हिंदू-मुसलमान एक होकर वंदे मातरम् गाते थे, मगर ये कट्टरपंथियों के आगे झुक गए।
1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र माँग लिया। फिर उनकी हिम्मत और बढ़ी।
फिर 1920 में इन्होंने कहा,
टर्की का खलीफा हट गया है, तो अब हम टर्की के खलीफा के लिए आंदोलन करेंगे और महात्मा गांधी ने अली का समर्थन किया।
उनकी हिम्मत और बढ़ गई। उसके बाद जिन्ना ने कहा, मैं महात्मा गांधी को महात्मा नहीं बोलूँगा। इसलिए हर फिल्म में मिस्टर गांधी बोलता है।
फिर उसने कहा, मैं वंदे मातरम् नहीं गाऊँगा और मैं इनको बताना चाहता हूँ, कोई दर्शक जाकर चेक करे।
6 अप्रैल 1938 को नेहरू को जिन्ना ने एक लेटर लिखा और Selected Works of Jawaharlal Nehru, Series One, Volume 22, Page Number 230 से 239 में लिखा है। क्या शर्मनाक लेटर लिखा है। लिखते हैं, हमने वंदे मातरम् हटा दिया है। पॉइंट नंबर नौ पर। फिर उसके बाद लिखते हैं, पॉइंट नंबर 12 पर, अगर आपको तिरंगे से आपत्ति है, तो हम मुस्लिम लीग के भी झंडे को बराबर सम्मान देने को तैयार हैं। और पॉइंट नंबर सात पर लिखते हैं, मुसलमानों को सरेआम गोहत्या करने का अधिकार होगा। क्या गजब का सरेंडर किया नेहरू ने।
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Another video proving how these people harassed female journalists during the Kolkata Students’ Rally.
And trust me, these people were hooligans, not students.
I will share their profiles if they are arrested. Rest assured.
Highly Important.
I have been able to infiltrate a planned TOOLKIT, and it's extremely shocking to see the detailed planning and information about helpers.
I request you all to share it maximum.
Let's start to expose.👇
Never thought I’d find this gem.
Arundhati Roy exposing the World Bank, Ford Foundation, Rockefeller, and Arvind Kejriwal.
Fascinating blast from the past.
🚨 EXCLUSIVE from 2011!
UPA's HM Chidambaram quoted Nehru during Anna's fast to show how Hunger Strikes are 'UNDEMOCRATIC' 😂
🗣️"We have a Parliament to make decisions.
— Should we close down it and undertake HUNGER STRIKES to come to decisions?
This would only mean, whoever does longest Hunger Strike would WIN & get his demand accepted.
This is neither DEMOCRACY. It is utterly wrong past."
Okay. Nehru perhaps didn't know Hunger strikes against some guy named Modi in the future would be the only hope for his descendants😭
A Baul genre-inspired song celebrating the Bengal BJP government’s infiltrator detection, detention and deportation drive. The video was shot on the roads of Krishnanagar, which were lined up with Bangladeshi hawkers and slum-dwellers until recently.
Derek Nobrain exposed Mamata Banerjee’s propaganda.
For years, we were told that Mamata Banerjee lived in a small tali bari.
Just look at her house. The area is huge, with multiple buildings inside.
THIS ISN'T JUST A RAID. IT'S A REMINDER THAT IMPUNITY IS OFTEN AS BRITTLE AS POWER. Hear Abhishek Banerjee as he and his TMC mates today faced co-ordinated Police and ED action in separate corruption probes.
1. A team from Salboni Police Station reached TMC MP Abhishek Banerjee's Kolkata residence around 2 a.m. in connection with the alleged Salboni land scam. Sources said investigators were searching for his aide, Sumit Roy, after leads emerged during the interrogation of arrested former Medinipur MLA Sujoy Hazra. Chief Minister Mamata Banerjee reportedly arrived at the residence shortly afterwards.
2. ED conducted searches at seven locations linked to TMC MLA and former minister Madan Mitra in the municipal recruitment scam. Raids covered his Dakshineswar residence, Bhawanipur party office and other premises. Investigators are probing allegations of bribes for municipal jobs and examining documents, cash and bank account details recovered during searches.
3. The ED also searched businessman Sanjib Ghosh's premises in connection with the wider recruitment scam probe.
@MumbaichaDon He rolls in wealth if he needs it, he can pay for his own security. True enough, who is he indeed ! A former cricketer who did very well on the field, and off it he has become an even more successful businessman cum quasi politician A 100% opportunist individual making hay while
सोचा एक बार फिर याद दिला दूँ । आप सब भूल गए होंगे ।
डॉ मनमोहन सिंह ने नोबल पुरस्कार विजेता "डॉ अमर्त्यसेन" को असीमित अधिकारों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम चांसलर नियुक्त किया। उन्हें इतनी स्वायत्तता दी गयी कि उन्हें विश्विद्यालय के नाम पर बिना किसी स्वीकृति और जवाबदेही के कितनी भी धनराशि अपने इच्छानुसार खर्च करने एवं नियुक्तियों आदि का अधिकार था । उनके द्वारा लिए गये निर्णयों एवं व्यय किये गये धन का कोई भी हिसाब-किताब सरकार को नहीं देना था ।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि छुपे रुस्तम मनमोहन सिंह और अमर्त्यसेन ने मिलकर किस तरह से जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से भयंकर लूट मचाई ? वो भी तब जबकि अमर्त्यसेन अमेरिका में बैठे बैठे ही 5 लाख रुपये का मासिक वेतन ले रहे थे जितनी कि संवैधानिक रूप से भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, रक्षा सेनाओं के अध्यक्षों, कैबिनेट सचिव या किसी भी नौकरशाह को भी दिए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है ।
इतना ही नहीं अमर्त्यसेन को अनेक भत्तों के साथ साथ असीमित विदेश यात्राओं और उस पर असीमित खर्च करने का भी अधिकार था ।
कहानी का अंत यहीं पर नहीं हुआ बल्कि उन्होंने मनमोहनी कृपा से 2007 से 2014 की सात वर्षों की अवधि में कुल 2730 करोड बतौर चांसलर नालंदा विश्वविद्यालय खर्च किये.... आपकी आंखें फटी रह गयी न ... विश्वास नहीं हो रहा न कि मनमोहन सिंह ईमानदारी के चोंगे में कितने बड़े छुपे रुस्तम थे ?
चूंकि यूपीए सरकार द्वारा संसद में पारित कानून के तहत अमर्त्यसेन के द्वारा किये गये खर्चों की न तो कोई जवाबदेही थी और न ही कोई ऑडिट होना था और न ही कोई हिसाब उन्हें देना था इसलिए देश को कभी शायद पता ही न चले कि दो हज़ार सात सौ तीस करोड़ रुपये आखिर गये कहाँ ?
राफेल राफेल चिल्लाने वाले राहुल और रंक से राजा बने दर्जाप्राप्त भूमाफिया रॉबर्ट वाड्रा की धर्मपत्नी प्रियंका वाड्रा की पारिवारिक विरासत ही है कानूनी जामा पहना कर संगठित लूट की ताकि कानून के हाथ कितने भी लंबे हो जायँ पर उनका कुछ न बिगड़े ।
ऐसी ही संस्कृति में पलने बढ़ने के कारण दोनों भाई-बहनों में कोई आत्मग्लानि का भाव है ही नहीं बल्कि आंखों में बेशर्मी की चमक हो जैसे...किस मुंह से ये गरीब, दलित, किसान और पिछड़ों के हक की लड़ाई लड़ने की बात करते हैं !! निपट ढोंग है ये ।
अभी कहानी खत्म नहीं हुई, पिक्चर अभी बाकी है -
अमर्त्यसेन सेन ने जो नियुक्तियां कीं उसपर भी कानूनन कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता । उन्होंने किन किन की नियुक्तियां कीं ... आइये ये भी जान लेते हैं -
प्रथम चार नियुक्तियां जो उन्होंने कीं वो थे -
1. डॉ उपिंदर सिंह
2. अंजना शर्मा
3. नवजोत लाहिरी
4. गोपा सब्बरवाल
..... कौन थे ये लोग
... ? ? जानेंगे तो मनमोहन सिंह के चेहरे से नकाब उतर जायेगा ।
डॉ उपिंदर सिंह मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी पुत्री हैं और बाकी तीन उनकी करीबी दोस्त और सहयोगी ।
इन चार नियुक्तियों के तुरंत बाद अमर्त्यसेन ने जो अगली दो नियुक्तियां कीं वो गेस्ट फैकल्टी अर्थात अतिथि प्राध्यापक की थी और वो थे -
1. दामन सिंह
2. अमृत सिंह
.....गोया ये कौन थे ?
पहला नाम डॉ मनमोहन सिंह की मझली पुत्री और दूसरा नाम उनकी सबसे छोटी पुत्री का है ।
और सबसे अद्वितीय बात जो दामन सिंह और अमृत सिंह के बारे है वो ये कि ये दोनों "मेहमान प्राध्यापक" अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कभी भी नालंदा विश्वविद्यालय नहीं आयी ... पर बतौर प्राध्यापक ये अमेरिका में बैठे बैठे ही लगातार सात सालों तक भारी-भरकम वेतन लेती रहीं ।
उस दौर में नालंदा विश्वविद्यालय की संक्षिप्त विशेषता ये थी कि -
विश्विद्यालय का एक ही भवन था, इसके कुल 7 फैकल्टी मेम्बर और कुछ गेस्ट फैकल्टी मेम्बर (जो कभी नालंदा आये ही नहीं ) ही नियुक्त किये गये जो अमर्त्यसेन और मनमोहन सिंह के करीबी और रिश्तेदार थे । विश्विद्यालय में बमुश्किल 100 छात्र भी नहीं थे और न ही कोई वहां कोई बड़ा वैज्ञानिक शोध कार्य ही होता था जिसमे भारी भरकम उपकरण या केमिकल आदि का प्रयोग होता हो ।
फिर वो 2730 करोड़ रुपये गये कहाँ आखिर ?
मोदी जब सत्ता में आये और उन्हें जब इस कानूनी लूट की जानकारी हुई तो अमर्त्यसेन के साथ साथ मनमोहनी पुत्रियों को भी तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया ।
कहाँ गए वो राफेल राफेल चिल्लाने वाले... लौट आये बैंकॉक से ? कहाँ गयी गरीब किसान की पत्नी जिनके साथ अत्याचार हो रहा है ....अभी गरीब गुरबा के साथ सेल्फी में ही जुटी हैं क्या ? कहाँ गये वो 49 मॉब लिंचिंग के स्वयम्भू चिंतक जिनके पीठ पर लदा पुरस्कारों का अहसान अभी उतरा नहीं है तो आंखों में बेहयाई अभी बाकी है ?