जंतर मंतर पर धरना दे रहे छात्रों के लिए लोगों ने बिसलेरी के पानी के कई बंडल भेजे थे
तभी एक RAF का जवान उनमें से एक बंडल उठाकर अपने कैंप की तरफ चल पड़ता है
यह देखकर एक छात्र ने उसे आवाज़ दी और कहा सर, हमारा ही पानी ले जाकर पी रहे हो
फिर हमें ही पीटते हो, शर्म नही...Read news
"पिताजी भूख से छटपटा कर मर गए। घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था, इसलिए मां राशन लाने मौसी के घर गई थीं। जब वह वहां से लौटीं तो पिताजी खाट पर मरे पड़े थे।
पड़ोसियों से बॉडी चेक करने के लिए कहा, लेकिन किसी ने उन्हें छूना भी नहीं चाहा। बाद में जब शव से बदबू आने लगी, तब लोगों ने आनन-फानन में उनका अंतिम संस्कार करा दिया।"
खगड़िया में 55 वर्षीय मन्नू साह की बेटी ने अपने पिता की मौत को लेकर यह जानकारी दी। बुधवार को अपने पिता की मौत के बाद वो उत्तर प्रदेश के बरेली से खगड़िया सदर प्रखंड स्थित अपने मायके पहुंची थीं।
ग्रामीण अमित ने कहा कि मन्नू साह की मौत के बाद करीब 48 घंटे तक शव घर में ही पड़ा रहा। शव से दुर्गंध आने के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उनका अंतिम संस्कार कराया गया।
"प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधे AK-47 से फायरिंग की"
◆ RJD नेता तेजस्वी यादव ने साझा किया वीडियो
◆ उन्होंने लिखा, "सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की, AK-47 से भी फायरिंग की गई, जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती है, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो"
#TejashwiYadav | Tejashwi Yadav | #Bihar | Bihar | #StudentProtest
Burhanuddin from Indore who was present at the CJP protest is not getting bail.
Please tag Darab Farooqui and ask him to get them released on bail as soon as possible.
सलमान खान ने किया था तो भावनाए आहत हुई थी
लेकिन पपाराम ओर खेताराम ने यही काम किया तो सारे चुप है
बालोतरा में हिरण के कथित शिकार का मामला, दो आरोपी पकड़े गए! 🦌
राजस्थान के बालोतरा जिले की सिंगधरी रेंज में भग्गा मगरा विष्णोई की ढाणी के पास काले हिरण के कथित शिकार का मामला सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक, वन विभाग और जीव प्रेमियों की टीम ने कार्रवाई करते हुए पाराम और खेताराम नाम के दो लोगों को पकड़ा। उनके पास से कथित तौर पर मuzzleloader बंदूक, दो नाली बंदूक के कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद होने की बात सामने आ रही है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल बताया जा रहा है।
एक सवाल जरूर उठता है—जब 1998 के हिरण शिकार मामले में अभिनेता सलमान खान को 5 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, तो ऐसे मामलों में कानून अपना काम कितनी सख्ती से करता है?
2018 में जोधपुर की अदालत ने सलमान खान को हिरण के शिकार के मामले में 5 साल की सजा सुनाई थी। उनकी सजा के खिलाफ अपील बाद में राजस्थान हाईकोर्ट पहुंची और मामला अभी भी कानूनी प्रक्रिया में है।
वन्यजीव किसी की जागीर नहीं हैं। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।
#Balotra #Blackbuck #Rajasthan #WildlifeProtection #Bishnoi #BlackbuckHunting
इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा कि 10 बार के विधायक और 2 बार के सांसद रहे 78 साल के इस बुज़ुर्ग ने सिस्टम के आगे घुटने नहीं टेके।
आज़म खान चाहते तो आज समझौता करके किसी बड़े राजनीतिक पद पर होते।
मगर क्या करें, मुस्लिम अपने ईमान का पक्का होता है, मर जाएगा लेकिन ज़मीर नहीं बेचेगा।
Save Maulana Mohammad Ali Jauhar University
योगी जी ये तो खुलेआम आपको धमकी दे रहा है।
वर्दी में हमारा जवान सिर्फ जवान होता है चाहे सीमा पर हो या @Uppolice में आख़िर ये बंदा कैसे फ़रमान जारी कर सकता है?
करोड़ों के घोटाले के लिए नेता जेल जाते देखे होंगे
पर कभी एक 2 हज़ार की बकरी के लिए नेता को जेल जाते देखा है कभी??
16 अक्टूबर 2016 को नसीमा खातून नाम की महिला थाने में आकर बोलती है कि रिपोर्ट लिखवानी है चोरी की.
पुलिस पूछती है क्या चोरी हुआ? वो बोलती है
मेरी बकरी और भैंस चोरी हुए हैँ. सपा नेता आज़म खान ने चोरी किया है ये सब.
फिर अचानक से मामला कई बकरी और भैंस चोरी और गहनो चोरी का बन जाता है और अपनी ही सरकार में आज़म खान के खिलाफ ये केस दर्ज़ होता है रामपुर में.
सरकार बदलते ही कोर्ट आरोप तय करता है और आज़म खान को सज़ा सुनाई जाती है, यहीँ नहीं 84 और मुकदमे भी लाद दिए जाते हैँ.
जो आदमी जौहर यूनिवर्सिटी बनाकर हिन्दू मुस्लिम सभी के बच्चों को लगभग मुफ्त शिक्षा दे रहा हो
उसको बकरी चोर बनाकर बदनाम किया जाता है
और अभी तो यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने वाले हैँ, सुना है.
मुस्लिम नाम के आदमी को कभी देश में शिक्षा और रोज़गार की बात नहीं करनी चाहिए क्योंकि नारंगी सत्ता वालों को अब्दुल सिर्फ पंचर बनाता ही अच्छा लगता है
कड़वा है, मगर सच है. 😊
जंतर मंतर जाते वक्त जिन दो छात्रों की पिटाई हुई, उसमें एक आयुष को सुनिए –
"सत्यम पंडित और उसके साथियों ने हमारे साथ मारपीट की। हम किसी की मदद नहीं ले सकते थे, क्योंकि पुलिस हमारे खिलाफ थी, आर्मी हमारे खिलाफ थी"
@Asifansari9410
जामिया के कुछ छात्र जंतर मंतर से लौट रहे थे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें डिटेन कर लिया और साथ थाने ले जाने लगी, वहाँ से गुज़र रहीं सामाजिक कार्यकर्त्ता ज़ेबा खान और पत्रकार अफ़ज़ल आलम ने हिम्मत दिखाते हुए उन बच्चों को छुड़ाया, और पुलिस से सवाल पूछा कि प्रोटेस्ट में जाना कैसे जुर्म है?
’शिक्षा की रक्षा’ आंदोलन भी जीतेगा!
रामपुर के जौहर विश्वविद्यालय को बचाने के लिए धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं की हौसलाअफ़जाई के लिए हमारे सांसद व विधायक शामिल हैं। जब यूपी सरकार के शासनादेश के आधार पर भाजपा सरकार अन्य निर्माणों का नियमतीकरण कर सकती है तो जौहर यूनिवर्सिटी का क्यों नहीं, जौहर यूनिवर्सिटी के साथ भेदभाव-दुराव क्यों? हम सबकी माँग है कि भाजपा अपने प्रतिशोध की आग में नौजवानों का भविष्य न झोंके।
मुझे आजादी दो या कब्र के लिए दो गज जमीन…
अशोक उपाध्याय
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पास से गुजरते हुए एक सड़क का नाम आपको ठहरने पर मजबूर कर देगा- मौलाना मोहम्मद अली जौहर मार्ग। यह सिर्फ एक नाम नहीं, उस शख्स की याद है जिसने दिल्ली को अपनी कलम, आवाज और अपने जज्बे से आजादी की लड़ाई का महत्वपूर्ण मोर्चा बनाया। रामपुर में जन्मे मौलाना जौहर का दिल्ली से गहरा रिश्ता रहा। आजकल उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय खबरों में है।
पत्रकारिता का केंद्र: जब 1911 में ब्रिटिश हुकूमत ने भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट करने का ऐलान किया, तो मोहम्मद अली जौहर भी इस बदलाव के साथ दिल्ली आ गए। वह तब तक कलकत्ता से अंग्रेजी साप्ताहिक अखबार 'द कॉमरेड' निकाल रहे थे। महंगे कागज पर छपने वाला यह अखबार अपनी बेबाक टिप्पणियों और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार के लिए जल्द ही प्रसिद्ध हो गया। मौलाना जौहर दिसंबर 1912 में दिल्ली शिफ्ट हुए। 12 अक्टूबर 1912 को 'द कॉमरेड' का पहला दिल्ली संस्करण निकला।
हमदर्द की शुरुआत: आम जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उन्होंने 1913 में दिल्ली से उर्दू दैनिक अखबार 'हमदर्द' भी शुरू किया। वह खुद इसके संपादक थे। उनकी लेखनी इतनी प्रभावशाली थी कि ब्रिटिश अधिकारी भी इसे ध्यान से पढ़ते। लॉर्ड मिंटो ने एक बार कहा था कि भारत में मोहम्मद अली जौहर की कलम से ज्यादा खतरनाक कोई कलम नहीं। उनकी तीखी लेखनी से आजिज आ अंग्रेजी सरकार ने दोनों अखबारों पर रोक लगा दी। 1924 में उन्होंने फिर से प्रकाशन शुरू किया, पर बाद में बंद हो गया।
पहले वीसी: 1920 में खिलाफत और असहयोग आंदोलन के दौरान जौहर ने अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई। वह इसके पहले वाइस-चांसलर बने। बाद में यह संस्थान दिल्ली के करोल बाग में आ गया। जौहर शिक्षा को आजादी का सबसे बड़ा हथियार मानते थे। उन्होंने कहा था कि गुलाम देश की शिक्षा व्यवस्था गुलाम ही पैदा करेगी, इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान जरूरी हैं।
बापू से मतभेद: वह मुस्लिम लीग के अध्यक्ष रहे। 1923 में कांग्रेस के भी अध्यक्ष बने। हालांकि कुछ महीनों बाद ही संगठन में बढ़ते असंतोष के चलते वह पार्टी से अलग हो गए थे। शुरू में वह महात्मा गांधी के करीब थे, पर बाद में दोनों में राजनीतिक मतभेद उभरे। 1922 के चौरी-चौरा कांड के बाद जब गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को स्थगित कर दिया, तो जौहर निराश हो उठे थे।
अंतिम इच्छा: उन्होंने 1930 में लंदन के गोलमेज सम्मेलन में बीमार होने के बावजूद भाग लिया। वहां उन्होंने कहा, 'मुझे आजादी दो या कब्र के लिए दो गज जमीन। मैं गुलाम देश में लौटना नहीं चाहता।' 4 जनवरी 1931 को लंदन में उनका निधन हो गया। अंतिम इच्छा के अनुसार उन्हें यरुशलम में दफनाया गया।
(लेखक नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं।)
पुलिस द्वारा मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
बस्ती जिले के थाना छावनी के पुलिस कर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ मारपीट का एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा
आरोप है के पुलिस द्वारा जबरदस्ती जमीन कब्जा करने के मामले में रिश्वत लेकर महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट की गई है,
फिलहम मामले की जांच चल रही है
CJP प्रोटेस्ट के समर्थन में व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाने के आरोप में तीन मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया, मामला असम के लखीमपुर का है। गिरफ्तार युवकों के नाम असराफ़ुल इस्लाम, मंज़ूर रहमान और अब्दुल कासेम हैं। इन मुस्लिम युवकों पर आरोप है कि वे छात्रों के आंदोलन के समर्थन में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश कर रहे थे।
गाजियाबाद का रहने वाला जुनैद जंतर मंतर पर आंदोलनकारियों के लिए खाने के इंतज़ाम में सहयोग करता था।
बाबा की पुलिस ने उसका और उसके परिवार का उत्पीड़न शुरू कर दिया।
प्रधान के इस्तीफ़े के बाद उसको छोड़ा गया।
योगी जी आप @Uppolice की छवि ज़ालिम पुलिस की क्यों बनाना चाहते हो?
क्या खाना खिलाना पाप है?
योगी जी लाठीतंत्र को छोड़ दो वरना सत्ता छोड़नी पड़ेगी।
आज के दौर में जहां ईमानदारी की मिसालें कम ही देखने को मिलती हैं, वहीं रेलवे पुलिस के एएसआई मोहम्मद राशिद ने अपने फर्ज और उसूलों से सबका दिल जीत लिया है।
यह पूरा मामला ट्रेन संख्या 12425 का है। इस ट्रेन के कोच A4 में सफर कर रहीं एक महिला यात्री की लगभग 2 लाख रुपये की कीमत वाली सोने की चेन गलती से वहीं छूट गई थी।जैसे ही एएसआई मोहम्मद राशिद की नजर उस कीमती चेन पर पड़ी, उन्होंने फौरन अपनी सतर्कता और ईमानदारी का सबूत देते हुए उसे महफूज कर लिया। इसके बाद उन्होंने पूरी तफ्तीश की और जम्मू में इस सोने की चेन को उसकी असली मालकिन सुश्री सेतु कटियाल को सही-सलामत सौंप दिया।एक अफसर का यह नेक कदम और अपनी ड्यूटी के प्रति उनका जज्बा हम सबके लिए फख्र की बात है। समाज में ऐसी ही ईमानदारी और साफ नीयत से आपसी भरोसा कायम रहता है। रेलवे महकमे के साथ-साथ आम अवाम भी उनकी इस निष्ठा की जमकर तारीफ कर रही है।
इमारतें टूट सकती हैं, लेकिन उनसे जुड़े हज़ारों छात्रों के सपनों का क्या??
तोड़ना आसान है, बनाना उतना ही मुश्किल है!
और जहां किताबें खुलती हैं, वहां बुलडोज़र नहीं चलाई जाती!
जौहर यूनिवर्सिटी को बचा लो!