B.E.; LL.B. Engineer & Law person. Crusader of rule of law. Corruption is root cause of all problems in India. Prosecuting several corrupt public servants.
‘अंतरिक्ष मंत्रालय’ प्रधानमंत्री के मातहत है?
इसरो ने फैसला किया है कि रॉकेट बनाने का काम अब प्राइवेट सेक्टर करेगा.
ऐसा फैसला क्यों करना पड़ा और किसके लिए? कहीं स्टार्टअप को काम देने के लिए इसरो अपना काम तो नहीं बंद कर रहा?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि इसरो के रॉकेट बनाने के संसाधनों को प्राइवेट कंपनियों को बेचा जा रहा है. 100 से अधिक इसरो के वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दे दिया.
इसरो जो भारत की कामयाबी का एक बड़ा चेहरा है, उसकी जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टार्टअप के साथ बैठक करते हैं और देश का स्पेस सेक्टर ‘निजीकरण’ की तरफ धकेला जा रहा है 😠
एक रिकॉर्ड और देखिए - 1993 से 2026 के दौरान इसरो ने पीएसएलवी के तहत 64 मिशन लाँच किए, लेकिन जनवरी 25 से जनवरी 26 के बीच इसरो के तीन-तीन मिशन फेल हो गए. फेल होने की रफ्तार क्यों बढ़ती जा रही है?
सरकार को बताना चाहिए कि 2 लाख से अधिक स्टार्टअप में कितने युवाओं को नौकरी मिली है? किस सैलरी की नौकरी मिली है?
#NeetiAyog
#ज़िम्मेदार_कौन?
यह सच है या नही यह अभी पता नही चलेगा क्योंकि की जेफरी एपस्टीन और 2019 चुनाव डोनाल्ड हारने के बाद मोदी को जिताता आया था, लेकिन ट्रम्प की हार हो जाने के बाद से डोनाल्ड मोदी से 2020 से 2027 तक बदला ले रहा है / लेता रहेगा। अबतक जेफरी को 57000 अमेरीकी डोलर का भुगतान हो चुका है शायद 2029 मे ट्रम्प अमेरिका का राष्ट्रपति नहीं बन पायेगा तो मोदी और भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेकेगा और रं…बाजी की तमाम विडीयो और फाईले सार्वजनिक हो कर रहेगी, यह तय है 🤫
#EpsteinCase #BJP4IND #NarendraModi #HardeepSinghPuri #JagoIndiaJago🙏🏻
#mohitarjun_inc🇮🇳
उदित प्रकाश राय कौन हैं, और ये जेल में क्यों हैं?
उदित 2007 बैच के IAS अधिकारी हैं, तथाकथित DJB टेंडर घोटाले में सतेंद्र जैन के साथ इन्हें भी ACB नें गिरफ़्तार किया है।
उदित का मुख्य क़ुसूर ये है कि जब दिल्ली के लगभग सभी अधिकारी केजरीवाल सरकार के काम रोकने के “आदेश” का पालन कर रहे थे, तब इन्होंने सिविल सर्वेंट होने के अपने कर्तव्य का पालन किया!
आज उसी कर्तव्य पालन की सज़ा के रूप में उदित जेल में हैं!
दिल्ली जल बोर्ड के CEO के रूप में उदित का कार्यकाल मात्र 7 महीने का था- 22 अक्टूबर 2021 से 30 मई 2022 तक!
उदित पर आरोप है कि इन्होंने दिल्ली के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाने की योजना के लिए ऐसी टेक्नोलॉजी का चयन किया जो सिर्फ़ चुनिंदा वेंडर्स के पास थी। इस तरह इन्होंने तमाम वेंडर्स के बीच कम्पटीशन की संभावना को कम किया।
यमुना की सफ़ाई में इन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की अहम भूमिका है।
ये प्लांट दिल्ली के मल-मूत्र-ऐफ़्लुएंट्स यमुना में विसर्जित होने से पहले स्वीकृत स्तर तक लाते हैं।
उदित नें टेक्निकल कमेटी की सिफारिश पर एक भविष्योन्मुखी टेक्नोलॉजी का चयन किया, और मात्र 7 महीने के कार्यकाल में यमुना को साफ़ करने की पूरी योजना लागू करने के मुहाने तक पहुँचा दी!
बस यही तेज़ी “किसी” को खटक गई!
जिन्होंने देश को डुबोने का बीड़ा उठा रखा है, उन्हें लगा कि अगर वाक़ई यमुना साफ़ हो गई और अरविंद केजरीवाल नें उसमें डुबकी लगा ली तो 2025 का चुनाव गया हाँथ से!
लिहाज़ा उदित की घेराबंदी शुरू हुई।
सबसे पहले उदित पर आरोप लगा कि इन्होंने अपने सरकारी बंगले को रेनोवेट करने के दौरान ऐतिहासिक पुरातन ढाँचे को नुक़सान पहुँचाया!
ये अलग बात है कि पुरातत्व विभाग के कुछ रिकॉर्ड्स उस तथाकथित ढाँचे की लोकेशन बंगले से कई किलोमीटर दूर बताते हैं!
और ये भी बिल्कुल अलग बात है कि वही बँगला फ़िलहाल दिल्ली के मुख्य सचिव का निवास है!
पर इस बंगले के लिए उदित सिर्फ़ सस्पेंड हुए थे, तो अब उसी कार्यकाल के दूसरे केस में जेल जाने की कसर भी पूरी हो गई!
वैसे गौर करने के बात ये है सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम निहायत ही टेक्निकल होता है। इसकी डिज़ाइन इंजीनियर्स और एक्सपर्ट तैयार करते हैं।
CEO एक IAS ऑफिसर होता है जिसे इंजीनियर्स और विशेषज्ञों की टीम एसिस्ट करती है।
अब सवाल ये उठता है कि क्या किसी स्टेज पर उदित नें विशेषज्ञों की सिफारिश के विपरीत निर्णय लिया? ऐसा कहीं नहीं दिखाई देता है!
यही नहीं, टेक्निकल और फाइनेंसियल बिड उदित के ट्रांसफर होने के बाद खोली गई, फ़िर भी ज़िम्मेदार अकेले ये हैं न कि इनके सक्सेसर!
यानि दो “नॉन एक्सपर्ट्स”- सतेंद्र जैन बतौर मंत्री और उदित प्रकाश बतौर CEO एक ऐसे मामले में जेल में हैं जो बिना विशेषज्ञों के अनुमोदन के एक क़दम भी आगे नहीं बढ़ सकता!
और कोई भी विशेषज्ञ कटघरे तक में नहीं है!
अब अगर महीनों जेल में रहने के बाद कोई जज इस नतीजे पर पहुँचता है कि इसमें मुक़दमा चलाने लायक भी सुबूत नहीं हैं,
तो उदित को जेल में बिताए वक़्त उनको कौन लौटाएगा?
चोर दरवाज़े से मोदी सरकार ने आरक्षण ख़त्म करने की योजना रची !!
2015 में केंद्र सरकार में 4.21 लाख पद खाली थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 8.24 लाख हो गई।
रेलवे में 2.40 लाख पद खाली हैं। डिफेंस में 2.41 लाख। गृह मंत्रालय में 1.10 लाख।
PSU में 5.1 लाख स्थायी नौकरियां खत्म हो गईं। ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी 19% से बढ़कर 49% हो गई।
सवाल सिर्फ रोजगार का नहीं, सामाजिक न्याय का है।
सरकारी पद खाली रखो तो आरक्षण का अवसर खत्म।
PSU बेचो तो आरक्षित नौकरियां खत्म।
स्थायी नौकरी को ठेके में बदलो तो आरक्षण खत्म।
आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान बदलना जरूरी नहीं, आरक्षण वाली नौकरियां खत्म कर देना ही काफ़ी है।
सामाजिक न्याय विरोधी भाजपा का यही एजेंडा है।
पद खाली रखो। PSU बेचो। ठेकेदारी बढ़ाओ।
और SC, ST, OBC, EWS से उनका संवैधानिक हक छीन लो।
बाबासाहेब के संविधान से मिले अधिकारों को षड्यंत्र के तहत खत्म करने की भाजपाई नीति का अब पर्दाफ़ाश हो चुका है।
"रैंक कितनी भी हो, 18 लाख खर्च कीजिए, सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिल जाएगी": यह दावा बिहार के एजेंट्स कर रहे हैं जो बंगाल, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की MBBS सीट बेच रहे हैं; दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन में जानिए जिस NEET पेपरलीक को लेकर इतना बड़ा आंदोलन हुआ, एजेंट्स उसके आगे बढ़कर MBBS की सीट कैसे बेच रहे हैं...
पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें- https://t.co/wSyTDJOSTo
#BiharNews #HindiNews #NEET #PaperLeaK #NEETSeatDeal #Investigation #MBBS
"The recent protests by Gen-Z assure us that democracy in India will not be allowed to die and that people will turn to the Constitution to safeguard and preserve this country's future. The week of 20th July this year was one of relief and joy. It was reassuring to know that our young generation will not be swayed by rhetoric and propaganda by powerful oratory, reminiscent of the Goebbelian polemic and empty promises of 'Ache din' and "Viksit Bharat". They remained undeterred by the demonising of the 'Dhimagi Naxal'. It told us this generation's value is giving, compassion and adherence to truth. It doesn't hesitate to ask questions to those in power and of course, Gen Z has a wonderful sense of humour. The irreverence of Gen Z is a sure sign of democratic progress." - Dr S Muralidhar.
यह वीडियो क्लिप ‘गागर में सागर’ जैसी है. इसी बात से राहुल गाँधी देश को बार बार आगाह करते रहे हैं : 👇
कंपनियों के भीतर भारत का “लापता मिडिल” क्लास कहाँ है?
शेयर बाजार की इस चमक और सेंसेक्स की नई ऊंचाइयों के पीछे एक कड़वा सच छिपा है, जिसे समझना बहुत जरूरी है. देश के रजिस्टर्ड MSMEs का 98% हिस्सा (97.92%) सिर्फ ‘माइक्रो’ यानी सूक्ष्म उद्योगों का है, जबकि मध्यम (Medium) कंपनियां कुल कॉर्पोरेट जगत का मात्र 0.01% हैं, यानि 100वां हिस्सा भी नहीं.
यही कारण है कि अर्थव्यवस्था में एक तरफ कुछ बड़े घराने हैं और दूसरी तरफ लाखों छोटे दुकानदार, और बीच का हिस्सा पूरी तरह गायब यानि ‘मिसिंग मिडिल’ है।
भारत की टॉप 20 कंपनियां आज पूरे देश का 80% मुनाफा कमाती हैं, जबकि 10 साल पहले यह आंकड़ा सिर्फ 40% था.
जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा बीते दो दशकों से महज 14% पर अटका हुआ है. दूसरी तरफ, देश के कुल बैंक कर्ज का लगभग 45% हिस्सा सिर्फ 5 करोड़ से ऊपर के बड़े कर्जदारों के पास जाता है, और टॉप 10 कॉरपोरेट समूह अकेले कुल बैंक कर्ज का 13% ले जाते हैं.
जब सारा मुनाफा, सारे बैंक कर्ज और सारा बाजार कुछ ही हाथों में सिमट जाएगा, तो देश के छोटे कारखाने बंद होंगे, युवा सालों-साल नौकरी ढूंढते रह जाएंगे और अर्थव्यवस्था का आधार खोखला होता चला जाएगा.
कोई भी देश अपनी सबसे ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि अपने आम आदमी और मजबूत मध्यम वर्ग की समृद्धि से महान बनता है 🎯👍
'कुंभ के बजट का 0.1% भी मिलता तो बंद नहीं होते 100 से ज्यादा स्कूल', सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रसन्न बी. वराले ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सिंहस्थ कुंभ के बजट का सिर्फ 0.1 फीसदी हिस्सा भी शिक्षा पर खर्च किया जाए तो कई सरकारी स्कूलों को बचाया जा सकता है.
पूरी खबर https://t.co/yMnxIeIsnW
#SupremeCourt #Education #Kumbh
ये खबर पढ़कर कौन सा 'शॉक' लगा?🤔
प्रधानमंत्री मोदी जी को 'कल्चरल शॉक' लगा था क्योंकि जन्तर-मंतर पर आंदोलन कर रही Gen Z लड़कियों ने गुस्से में कुछ तीखे शब्द इस्तेमाल कर दिए थे.
लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया 'The New York Times' की रिपोर्ट बता रही है कि असली 'शॉक' और शर्मिंदगी क्या होती है!
The New York Times ने दुनिया के सामने 'न्यू इंडिया' का सच खोलकर रख दिया है—जो महिलाएं हक के लिए आवाज उठाती हैं, उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग, बॉडी-शेमिंग और धमकियों से खामोश करने की कोशिश की जाती है।
लेकिन जब उन्हीं बेटियों को ट्रोल आर्मी चरित्रहीन कहे, बलात्कार की धमकियां दे और उनका चरित्र हनन करे, तब कोई 'संस्कृति' याद नहीं आती!
Indian Youth | Exam Irregularities | Gen z | Video | PM Modi
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री @BorisJohnson ने तो @narendramodi को फट्टू बता दिया!
नेहरू में हिम्मत थी, मोदी शॉर्टकट ढूंढते हैं।
नेहरू के पास दूरदर्शी सोच थी, मोदी झुक जाते हैं।
UK के पूर्व PM बोरिस जॉनसन ने बताया कि #महारानी ने उनसे कहा था कि 1952 में PM नेहरू ने उनसे कहा था कि भारत हमेशा रूस के साथ रहेगा।
अब #मोदी को देखिए, वे कैसे USA के सामने झुक गए। मोदी के राज में भारत को रूस, वेनेज़ुएला वगैरह के साथ व्यापार करने के लिए US से इजाज़त लेनी पड़ती है।
USA के कहने पर मोदी UPI पर टैक्स लगाते हैं ताकि वीज़ा और मास्टरकार्ड के हितों की रक्षा हो सके; USA भारत को ईरान के साथ व्यापार न करने का आदेश देता है और भारत के लिए सीज़फायर का फ़ैसला भी USA ही करता है।
मोदी भारत के लिए एक आपदा हैं। इतिहास उन्हें भारत के सबसे कमज़ोर PM के तौर पर याद रखेगा।
बोरिस जॉनसन को मोदी गुजरात घुमाने ले गए थे और बुलडोजर पर बैठाया था।
RSS वाले ‘नाथूराम गोडसे’ बनाते ही जा रहे हैं और आगे भी बनाते रहेंगे.
“COVID-19 की पहली वेव के दौरान RSS ने बड़े जोर-शोर से प्रचार किया कि उन्होंने हज़ारों किट मरीजों तक पहुँचाए हैं. तब मैंने ED में शिकायत दर्ज कराई और पूछा कि जब यह संस्था रजिस्टर्ड ही नहीं है, तो इसके पास इतने फंड्स आए कहाँ से, जिनसे ये लाखों लोगों के लिए मदद बाँट सके?
यह मामला अभी भी ED में लंबित है. परिणामस्वरूप, COVID की दूसरी वेव में RSS ने कोई काम किया हो, इसका प्रचारित बयान सामने नहीं आया”
- मोहनीश जबलपुरे
आज इसरो का भी खात्मा कर दिया गया है।अब न तो इसरो राकेट बनायेगा न ही राकेट लाॅच कर पायेगा।मतलब आज के बाद इसरो जैसे संस्थान को भी अब सिक यूनिट बनाकर बेचने की तैयारी पूरी हो चुकि है। हालाॅकि जो साइंटिस्ट छोड़कर गये थे, उनका कहना तो यह था कि जब वो देश की ही नही ब्लकि दुनिया की तीसरी बड़ी स्पेस एजेंसी को जॉइन करने आए थे,तब वो रॉकेट,मिसाइल्स और बेहतरीन तकनीक बनाने का सपना लेकर आए थे। पर यहां हमे चिप फेब्रिकेटर बनाकर सीमित कर दिया गया है।
प्राइवेट स्पेस-एक्स और एजेंसियों को खुलकर तकनीक बेची गयी ।जानबूझ कर न सुविधा दी गयी और न ही पैसा दिया गया।इसलिए ISRO के बड़े-बड़े बड़े प्रोजेक्ट को लटकता छोड़कर साइंटिस्ट भाग रहे हैं। लेकिन कुछ खबर ये भी है कि सरकार के दबाव के चलते उन्हे प्राइवेट कंपनीयों में मोटी रकम का लालच देकर भेजा गया है।
सच सामने आ ही गया कि दो गुजरातीयों को आज देश का Elon Musk बनाने का पूरा प्लान तैयार हो चुका है।!
सरकार की ये मंशा उसी दिन बाहर आ गई थी जिस दिन निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड और ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड जैसे कई वित्तीय उपाय इन अड़ानी के नो सीखियें वैग्यानिकों को दिए गये थे ।जिन्हें इसरो पर दबाव बनाकर पहले तकनीक ट्रांसफर की जा रही थी। अब इसरो से ये "ब्रेन ड्रेन" का ड्रामा क्या था और क्यों हो रहा था आज साफ हो गया l कि इस देश में अब किसी का कोई भविष्य नही बचा है।देश को बर्बाद करने की होड़ लगी है।
देश में कलयुगी भगवान मोदी जी का बिहार में मंदिर बनने वाला हैं ही,और प्रसिद्ध शिव कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कलियुग में भगवान शंकर का अवतार पहले ही बता दिया है। तो क्यों न अब अदानी को भी प्राइवेट प्रधानमंत्री बना दिया जाए..?
Courtesy Gopal Pandey fb post
लोग मृत व्यक्ति को ड्रम में बांध कर पानी पर तैरा कर ले जा रहे हैं क्योंकि आवागमन की और कोई सुविधा नहीं है।
यह मध्य प्रदेश के रीवा का दृश्य है। रीवा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं डिप्टी सीएम का गृह जनपद है।
जिन्हें #आरक्षण के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है इसीलिए मैं इस post के माध्यम से उन लोगों को बोलना चाहता हूं कि आरक्षण क्या है ?
आरक्षण में आपको चावल, गेहूँ, नमक मिल गया और चपरासी, मास्टर, पटवारी आदि में नौकरी लग जाये तो इसे आरक्षण न समझें।
आरक्षण किसे कहते हैं इसे कुछ उदाहरणों से समझते हैं:
1. जब अपने स्कूल की क्रिकेट टीम में भी चयनित न होने वाले जय साह को सीधे BCCI के सचिव बनाते हैं, -इसे कहते हैं आरक्षण।
2. जब बिना किसी परीक्षा और इंटरव्यू के सीधा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं रिस्तेदारी के कारण जज नियुक्त होते हैं, उसे कहते हैं आरक्षण।
3. जब तमाम स्कूल और कॉलेज खोलने वाले मैनेजर अपने रिश्तेदारों, बहू-बेटों को, बिना किसी योग्यता और पात्रता के आधार पर और सरकारी अनुदान पर नियुक्त करा लेते हैं, तो इसे कहते हैं आरक्षण।
4. जब तमाम अकेडमिक परिक्षाएं पास करने तथा पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी सिर्फ जाति के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया जाता है अर्थात "नाट फाउंड सूटेबल"( कोई पद के योग्य नहीं मिला)। ताकि आगे उन पदों पर अपने वर्ग के हितों के अनुरूप नियुक्ति की जा सके तो उसे कहते हैं आरक्षण।
5. जब केन्द्रीय मंत्री के पुत्र को बिना किसी प्रतियोगी परीक्षा के राज्य सरकार बड़े पद पर नियुक्त कर देती है तो इसे कहते हैं आरक्षण।
6. जब पहली बार सांसद अथवा विधायक बनने पर कैबिनेट मंत्रालय में अहम मंत्रालय सौंपा जाता है तो इसे कहते हैं आरक्षण।
7. जब बिना IAS की परीक्षा पास किए किसी वर्ग-विशेष के लोगों को सीधे संयुक्त-सचिव बना दिया जाता है तो इसे कहते हैं आरक्षण।
8. जब लॉकडाउन में भी # मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री मंदिरों में जाते हैं या विवाह-पार्टी अटैंड करते हैं जबकि दूसरी तरफ मरीजों व मजदूरों को सड़क पर मुर्गा बनाकर पीटा जाता है तो इस विशेषाधिकार को कहते हैं आरक्षण।
9. आज तक तीर-कमान भी न बनाने का अनुभव रखने वाली कम्पनी को सीधे राफेल लड़ाकू विमान बनाने का ठेका दे दिया जाता है तो उसे कहते हैं आरक्षण।
10. जब एक ही तरह् के मुकदमे में दलित को जेल और मिश्रा को बेल (रिहाई) मिल जाती है तो यहाँ दिखाई देता है वर्ग और जाति विशेष का आरक्षण।
11. जब हजारों-करोड़ों रूपयों का कर्जा माफ और दस-बीस हज़ार रूपये के लिये कुर्की की जाती है तो उसे कहते हैं आरक्षण।
12. प्राईमरी स्कूल खोलने लायक भी इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के बावज़ूद " कागज़ी जियो यूनिवर्सिटी" को 10,000 करोड़ रूपये मिलते हैं वो भी "सेंटर आफ एक्सीलेंस" बनाने के लिये तो इसे कहते हैं आरक्षण
13. जब राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की भर्ती चुनिन्दा जातियों से की जाती है तो उसे कहते हैं आरक्षण।
14. सारे मंदिर के पुजारी एक वर्ग विशेष को बनाया जाता है तो उसे कहते है आरक्षण
15. जब सेनाध्यक्षों की पूरी टोली एक वर्ग से आती है इसे कहते है आरक्षण
16. जब राम मंदिर ट्रस्ट में वर्ग विशेष को ही ट्रस्टी बनाया जाय तो उसे कहते है आरक्षण
17. जब एससी बीसी वर्ग के बदमाशों को अपराधी और सवर्ण वर्ग के बदमाशों को बाहुबली कहा जाय तो उसे कहते है आरक्षण
जिसको भारत में आरक्षण नजर आता है, वो सिर्फ प्रतिनिधित्व है। जो सभी यूरोपीय, अमेरिकी, अफ्रीकी और जापान आदि देशों में भी अपनाया गया है।
" संख्या के अनुपात मे प्रतिनिधित्व " लोकतंत्र का प्राण होता है, जिसे "भारतीय संविधान " ने अपने प्रत्येक नागरिक को प्रदान किया है।
NEWS24 SHOWS FIVE CLASSES CRAMMED INTO ONE BROKEN RAJASTHAN SCHOOL 🚨
REPORTER: This school is barely 5 km from Rajasthan Secretariat, but the gate is shut so the real picture stays hidden.
LOCAL 🔥: We complain again and again. They come for votes, not for schools.
REPORTER: Five classes in one room under wood, ply and tin. Filth outside. Broken toilets. No proper boundary. A buffalo shed next to the school.
WOMAN 💔: Poor children study here. Government school does not mean children should sit with insects and dirt.
REPORTER: Even the tin shed came from donors, not the education department.
LOCAL 🎯: I spent my own money so poor children could study. If government comes forward, this can be fixed.
ये गुजरात के पत्रकार @AtulTiwari90 है,
जिनकी पत्रकारिता शिक्षा की कमियों को उजागर कर रहा है,दिल्ली के दरबारी पत्रकारो को भी इनसे सीखना चाहिए!
अब गुजरात के 35 साल में BJP के विकास का मॉडल देखिए 👇
गुजरात के दाहोद के सिंगवड में सरकारी प्राइमरी स्कूल के पास 2012 से अपना कमरा नहीं है।
पिछले 4 साल से 2 महिला शिक्षिकाएं 1 से 5वीं तक के बच्चों को गांव के एक किसान के कमरे में पढ़ाने को मजबूर है,
सरकार से अच्छे वे किसान है जिन्हे इन बच्चों की चिंता है ❤️
देखिये ये ग्राउंड रिपोर्ट
वंदे मातरम के दो छंद राष्ट्रगीत होंगे, ये कैसे तय हुआ?
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक समिति बनाई। इसमें थे सुभाष चंद्र बोस, पंडित नेहरू, मौलाना आजाद, आचार्य नरेंद्र देव... इन लोगों ने रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह ली, उनकी सलाह पर अमल करते हुए फैसला लिया। उस फैसले को डॉ राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में पेश किया और प्रस्ताव पास हुआ।
वंदे मातरम के छह छंद राष्ट्रगीत होंगे, ये कैसे तय हुआ?
गृहमंत्रालय ने एक आदेश पारित कर दिया कि संविधान सभा वाला राष्ट्रगीत नहीं माना जाएगा। पूरे छह छंद गाने होंगे। इसे हमेशा राष्ट्रगान से पहले गाना होगा। फिर संसद में संशोधन विधेयक आया और बिना चर्चा के पारित हो गया।
उस पर तुर्रा ये कि इनके हिसाब से उन सारे महापुरुषों और संविधान सभा का फैसला देशविरोधी था। अब इस धरती पर एक अंग्रेजों के पाले हुए जासूस ही असली देशभक्त रह गए हैं!
87 million Indian youth, between the age of 15 to 29, are neither studying or working nor receiving training. This is the official data, not the actual numbers.
87 million means more than the population of 177 countries in the world. Only 18 countries have more population.
बड़ी ख़बर 🔥
देश में सिर्फ़ IAS और IPS की सही जाँच हो, 50 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति इन्हीं की निकलेगी।
उदित राय, सीनियर IAS बड़े भ्रष्टाचार में शामिल पाए गए हैं। इंडियन सिविल सर्विसेज ने देश में लूट का इतना आतंक मचाया हुआ है कि सिस्टम सुधरने की उम्मीद धूमिल हो जाती है।
IAS उदित प्रकाश राय, 2007 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी हैं, जिनकी छवि एक तेज-तर्रार अफसर की रही है, अब गंभीर आरोपों के घेरे में हैं।
उन पर दिल्ली जल बोर्ड के CEO रहते हुए 5 करोड़ रुपये की कथित घूस लेने, मुख्य सचिवों के फर्जी सिग्नेचर करने, फर्जी अनुभव पत्रों से अपनी पत्नी की नियुक्ति करवाने, और एक हेरिटेज बिल्डिंग को गिराकर बंगला बनाने जैसे संगीन आरोप लगे हैं।
देश का भविष्य तब तक अंधेरे में है जब तक सिस्टम चलाने वाले सिविल सर्विस के अफसरों के भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगती। सभी विभाग उगाही का अड्डा बन गए हैं।