आईआईटी में पढ़ने वाले एक एक्स स्टूडेंट ने बताया जैसे ही SC ST और OBC समाज के स्टूडेंट IIT में आते हैं
वो देखते हैं उनके समाज का फैकल्टी में कोई भी प्रोफेसर या अधिकारी नही है.
IIT में सवर्ण प्रोफेसरों का वर्चस्व है. दूसरा सबसे बड़ा डरावना बात है कि IIT के कैंपस में आरक्षण को एक गाली की तरह पेश किया जाता है.
सवर्ण स्टूडेंट आपस में खुलकर आरक्षण के खिलाफ बात करते हैं. SC ST स्टूडेंट यह माहौल देखकर खुद को IIT के कैंपस अलग थलग पाता है.
एक्स स्टूडेंट ने कहा अगर कोई शिकायत है तो SC ST सोचते हैं किससे कहा जाए. कारण IIT का पूरा वातावरण आरक्षण विरोधी नजर आता है.
अभी तक बहुजन समाज का कोई नेता IIT में सवर्ण समाज के प्रोफेसरों के ओवर रिप्रजेंटेशन को मुद्दा नही बना पाया.
किसी भी सेक्टर या इंस्टीट्यूशन में ओवर रिप्रजेंटेशन का अर्थ है अवैध कब्जा. भारत के सभी समुदाय जाति का प्रतिनिधित्व IIT में होना चाहिए. यह केवल डाइवर्सिटी नही, रोजगार का भी मुद्दा है. सभी बड़े रोजगार मुट्ठीभर जातियों को क्यों दिया जा रहा है ?
@uhbvnpkl श्री मान /श्री मती जी मेरा मोबाइल नो 9416965155 मेरे घर का कनेक्शन अनिता रानी के नाम से है खंड बिलासपुर यमुनानगर में सरस्वती कॉलोनी बिलासपुर मेरी समस्या है कि लाइट कुछ देर आती है फिर फेस उड़ जाता है कृपया उसे ठीक करवा दो
@uhbvnpkl श्री मान जी/श्री मती जी,
एक आम बिजली उपभोक्ता किससे शिकायत करे कि उसकी लाइट ठीक हो जाए रात 10.45 पर शिकायत की फिर 1 बजे की लेकिन सिर्फ आश्वासन के कुछ नहीं जब आपसे किसी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होती तो ये टोल फ्री न फलाना न क्यों दिए हुए है जब इनकी कोई सुनता ही नहीं
@BhimArmyChief ये तो कुछ भी नही बिलासपुर यमुनानगर हरियाणा में जंहा बच्चों के पेपर का सेंटर बना है वन्ही मैरिज हाल भी है दोनों आपस मे से है आज वँहा शादी थी तो डीजे इतनी तेज आवाज मव बज रहा था किसी को कोई फर्क नही पड़ता
चुनाव आयोग सुबह ही आधिकारिक परिणाम घोषित कर दिया.
NDA : 202
MGB : 35
AIMIM : 5
जीते हुए 243 विधायकों को वेतन अन्य अन्य भत्ता सुविधाएं मिलाकर कुल 2,49,000 मासिक वेतन मिलेगा.
हवाई यात्रा के लिए 4,00,000 का कूपन. गाड़ी, बंगला, सिक्योरिटी और बिजली पानी मुफ्त मिलेगा.
भूतपूर्व विधायकों को 45,000 रुपए पेंशन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
चटनी रोटी खाने वाले बेरोजगार भक्तों से अनुरोध है नेताओं और विधायकों की चिंता ना करें. अपनी चिंता करो, अपने परिवार की चिंता करो.
मनुवादी लोग RJD की तेज तरार और फायर ब्रांड प्रवक्ता PRIYANKA BHARTI को ट्रोल कर अपमानित कर रहे हैं.
उनकी ओर से कहा जा रहा है, न्यूज़ डिबेट में उल्टा सीधा बोलती है. लाउड होकर जवाब देती है,
बीजेपी प्रवक्ताओं के खिलाफ खराब भाषा का प्रयोग करती है. न्यूज़ एंकरों तक से बदतमीजी करती है. आरोप बेबुनियाद है.
मनुवादी हज़म नही कर पा रहे हैं. 1000 सालों से इन लोगों केवल बोलने की आदत पड़ी है, सुनने की आदत नही है. वो लोग चाहते हैं, प्रियंका भारती उनका अहंकार और उनकी बात बर्दाश्त करे.
बहुजन समाज की बेटी प्रियंका भारती पीएचडी स्कॉलर है, वो जानती कब सम्मान करना है और कब जस को तस जबाब देना है.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर अगर जूता सनातन जिंदाबाद नारे लगाने के बजाय अल्लाह हु अकबर नारा लगाते हुए
किसी ने जूता उछाला होता तो उस पर UAPA लगाकर जेल में बंद कर दिया जाता. पुलिस जेल में डंडा चलाती, उस व्यक्ति को मीडिया आतंकी घोषित कर देता.
दावे के साथ कह सकता हूँ अगर जूता फेंकने वाला ओबीसी एससी या आदिवासी होता और नारा लाल सलाम या जय भीम लगा होता तो उसे नक्सली बताकर जेल में डाल दिया जाता.
लेकिन जूता फेंकने वाला सवर्ण है, उसका कहना है उसने सनातन धर्म के लिए यह सब इसलिए उसे चीफ जस्टिस बीआर गवाई ने भी माफ कर दिया. बीआर गवाई कौन होते हैं माफ करने वाले. हिंसा करने वाले को माफ करना दूसरों को हिंसा करने के लिए प्रोत्साहन देना है.
2020 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि समतलीकरण के दौरान प्राप्त प्राचीन अवशेषों और
कलाकृतियों को संरक्षित करने की याचिका को पूरी तरह से तुच्छ बताते हुए किसने खारिज किया था ?
याचिकाकर्ता बौद्ध भिक्षु थे. उनकी केवल छोटी सी मांग थी अवशेष बौद्ध सभ्यता दौर के हैं. इन्हें सुरक्षित रखकर जांच की जाए.
सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जज अरुण मिश्रा को गुस्सा आ गया उन्होंने पूजनीय बौद्ध भिक्षुओं को अपमानित किया, अनाप शनाप बोला और एक एक लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया.
तब उस समय क्या बौद्ध धर्म का अपमान नही हुआ. बौद्ध भिक्षुओं का अपमान नही हुआ. इतिहासकार डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा था अवशेष बौद्ध कलाकृतियां लग रही हैं.
चित्रा त्रिपाठी जी उदित राज ने किसी का अपमान नही किया है. क्या डाइवर्सिटी की बात करना गुनाह है.
उदित राज ने एक जाति के ओवर रिप्रजेंटेशन का मुद्दा उठाया है. एक जाति के ओवर प्रिविलेज का विरोध किया है.
चित्रा त्रिपाठी जी आपकी गलत है, उदित राज जिस पार्टी में हैं उस पार्टी का नेता ब्राह्मण नही, बल्कि मल्लिकार्जुन खड़गे जी हैं, और वो दलित हैं.
इस पार्टी में पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और आदिवासियों का समावेश है. आप जिस न्यूज़ चैनल में हैं उसमें कितने ओबीसी एससी एसटी हैं.
सवाल तो उठेगा ही 140 करोड़ की आबादी में किस आधार पर शुभम शुक्ला का चयन हुआ. सवाल तो पूछा जाएगा, सभी न्यूज़ चैनलों में कौन सी परीक्षा पास कर अगड़ी जातियों के लोग न्यूज़ एंकर बने हैं ?