देश में राजनीतिक तौर पर SC-ST वर्ग को आरक्षण इसलिए दिया गया क्योंकि वर्चस्ववा��ी ताकतों के कारण इस वर्ग के सांसद-विधायक नहीं बन पाते थे। इसलिए लोकसभा और विधानसभा में SC-ST सीटें आरक्षित की गई
तमिलनाडु में कुछ इसी तरह की स्थिति ब्राह्मणों के साथ है। वहाँ वर्चस्ववादी ताकतों के सामने ब्राह्मण वर्ग असहाय, पीड़ित, शोषित औ राजनीतिक रूप से वंचित है।
इसलिए अब जरूरी है कि तमिलनाडु में ब्राह्मणों के लिए राजनीतिक-शैक्षणिक-प्रशासनिक आरक्षण की व्यवस्था की जाए। ब्राह्मणों को तत्काल राजनीतिक आरक्षण की व्यवस्था की जाए
PM मोदी के वाराणसी में UP कॉलेज में SC मंजीत चौहान ने जनरल कैटेगरी के मेधावी छात्र सूर्य प्रताप सिंह को क्लासरूम में 8 गोलियां मारकर ठिकाने लगा दिया! खून की नदियाँ बहाईं ।
ये अगर रिवर्स होता ~ऊंची जाति का लड़का दलित को गोलियां मारता ~तो अब तक
जय भीम वाले सड़कों पर आग लगा चुके होते!
UGC एक्ट, SC/ST एक्ट, मर्डर चार्जेस लग चुके होते, कॉलेज जल चुक��� होता,
योगी-मोदी का रो रो कर बुरा हाल हो चुका होता होते!
लड़के के पूरे खानदान विदेश में रहने वाले मौसा मौसी मामा मामी पे भी sc-st act लग गया होता ।
सब जेल में होते ।
लेकिन यहां? चुप्पी! क्योंकि आरोपी SC है तो ‘पर्सनल डिस्प्यूट’ बन गया।
ये है जातिवादी हिंदुस्तान और ‘राम राज्य’ का असली चेहरा!
म��्य प्रदेश के रीवा के दयाशंकर पांडे ने 200 करोड़ रु के घोटाले के खिलाफ आवाज उठाई। उन पर चार बार जानलेवा हमला किया गया। उन्होंने पुलिस से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक दिन उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उनकी गर्भवती पत्नी भी थीं। बच्चे ने पेट में ही दम तोड़ दिया। अपनी आवाज सुनाने के लिए दयाशंकर पांडे हाईकोर्ट पहुंचे और जज की टेबल पर मृत भ्रूण रख दिया।
जब मामला सामने आय�� तो तुरंत कार्रवाई की गई और चार पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया गया।
इसलिए नहीं कि पुलिस ने दयाशंकर पांडे की मदद क्यों नहीं की, बल्कि इसलिए कि एक आम नागरिक, बिना वकील जज साहब की टेबल तक पहुंचने की हिम्मत कैसे कर सका..
नहीं आता एट्रोसिटी एक्ट में। जब पानी पीने नहीं दिया, और तुम अरब से भी नहीं आए कि कहते तेल पीकर जी रहे थे, मूलनिवासी भी हो, नब्बे प्रतिशत होने क��� दावा भी है, तो जीवित बच कैसे गए?
किसने पानी नहीं पीने दिया? दूसरे का कुआँ खोद देते थे, अपने में कोढ़ लग जाता था? कोई ‘हजारों वर्ष तक प्रताड़ित’ नहीं था। सब दो कौड़ी की कल्पना सत्तर के दशक में लिखी गई। एक भी समकालीन पुस्तक जो हजार वर्ष भी पुरानी हो, ऐसे किसी भी भेदभाव का वर्णन नहीं करती।
इसलिए प्रिंटआउट ले कर पिछवाड़े में डाल ले ये एट्रोसिटी की बकचोदी।
मैं विकास दिव्यकीर्ति का समर्थन करता हूँ, बस एक शर्त है अपने कोचिंग संस्थान में दो काम कर दे।
1. गरीब SC/ST/OBC जो सालो से पढ़ाई नहीं कर पाये, दिव्यकीर्ति उनकी पढ़ाई का खर्चा उठा ले।
2. अपने सारे सवर्ण शिक्षकों को हटाकर SC/ST शिक्षक भर्ती कर ले।
अगर ये दो काम विकास भाई करेंगे, तो हम सब भी आरक्षण का समर्थन करेंगे। 🔥✅
कल्पना कीजिए कि आपके घर में किसी को अचानक रात में पेट दर्द हो जाये। आप इमरजेंसी में ज़िला सदर अस्पताल में ले कर मरीज़ को जाते हैं जहाँ पे डॉक्टर उसे तुरंत किसी बड़े मेडिकल कॉलेज में रेफेर कर देते हैं।
एंबुलेंस से तुरंत आप वहाँ से निकलते हैं। चूँकि आपको पता है कि मेडिकल कॉलेज में पता नहीं कितनी भीड़ होगी इसलिए आप एंबुलेंस से किसी निजी अस्पताल में उतरते हैं।
और अस्पताल में मरीज़ जैसे ही बेड पर लेटा, अभी कुछ इलाज शुरू भी नहीं हुआ है, डॉ ने देखा भी नहीं और आपका बिल हो गया 20,000 रुपए।
मार्केटिंग के नाम पर कमीशन के खेल ने तथा सरकारी अस्पताल के कर्मियों / डॉक्टरों , एंबुलेंस और निजी अस्पताल के गठजोड़ ने यही स्तिथि बना कर रखी है।
और ये प्राइवेट एम्बुलेंस ही नहीं बल्कि 108 एम्बुलेंस की हालत है ।
और इतनी भयावह स्थिति के बावजूद कोई इसके विरोध में कुछ लिखना तो छोड़िए, बात नहीं करना चाहता।
@JharkhandCMO@IrfanAnsariMLA
एंजेल चकमा वाले विषय में जो लोग कह रहे हैं कि अपराधियों में से एक मणिपुरी, एक नेपाली भी था, इसलिए ये रेसिज्म नहीं है, वो जबरन इसे छोटा करना चाहते हैं। नस्लवाद इतना साधारण नहीं होता कि सब एक जगह से हैं तो नहीं होगा।
नॉर्थ ईस्ट के ही एक राज्य के तो छोड़ो, एक कबीले के लोग दूसरे के साथ ऐसी टिप्पणी करते हैं। रेसिज्म हर स्तर पर होता है, जिनके साथ होता है वो भी करते हैं। कहीं माइल्ड है, कहीं कठोर। दिल्ली वाले तो बिहारियों से अलग नहीं दिखते, तो क्या वहाँ भेदभाव नहीं है? क्या यूपी वाले बिहारियों के साथ भाषा-क्षेत्र-नस्ल पर टिप्पणी नहीं करते?
एक ने तो एंज��ल के भाई का वीडियो लगा कर कहा कि इसमें रेसिज्म कहाँ ��ै, जबकि उसी वीडियो में भाई बोल रहा है कि उसे उन लोगों ने ‘चिंकी’ कहा। ‘चिंकी’ किसके लिए प्रयुक्त होता है?
उसके पिता का वीडियो में कहना है कि पुलिस ने आरंभ में FIR भी लिखने से मना कर दिया और जब तक वो आए नहीं, तब तक FIR नहीं लिखी गई। उन्होंने भी ‘चिंकी’ और ‘इंडियन’ वाली बात बोली।
हम यह मान भी लें कि पिता-पुत्र झूठ बोल रहे हैं, तो क्या यह बात छुप जाएगी कि नॉर्थ ईस्ट के बच्चों के साथ रेसिज्म नहीं होता? चाहे वह झड़प दारू पी कर हुई हो, क्या यह सत्य नहीं कि छः लोगों ने चकमा की हत्या की?
क्या आपको लगता है कि जब लड़ाई चल रही होगी तो जो गालियाँ दी जा रही होगी तो उसके चेहरे को ले कर नहीं दी होगी? जब लड़ाई होती है और सामने वाले को नीचा दिखाना होता है तो हम वह भी कहते हैं जो सामने वाला नहीं होता।
कृपया यह साबित न करें कि रेसिज्म तो आपके यहाँ होता ही नहीं। सत्य यह है कि ऐसी टिप्पणी सुनाई हर दिन देती है, हत्या कभी-कभी होती है। याद कीजिए लाजपत नगर में ��क अरुणाचली बच्चे (नाइदो तानियम) के रंगे बालों के कारण उसे कैसे लातों से मार-मार कर मार दिया गया था।
आप यह नहीं कह सकते कि दिल्ली में तो ये होता है, आपके यहाँ नहीं होता। आप इसे स्वीकार नहीं रहे, यह भी अपराध ही है। यह लचर तर्क है कि सब नॉर्थ ईस्ट के ही हैं तो रेसिज्म कैसे हुआ।
इतने भोले मत बनिए।
After that, Dipu Das was hung from a tree and beaten like this. The frenzied jihadists kept shouting ‘Allahu Akbar’ as they did so.
Content warning: graphic violence
स्कूल की छत गिर गई मासूम मर गए, किसने जिम्मेदारी ली ?
गोरखपुर के अस्पताल में बच्चे ऑक्सीजन सप्लाई से मार गए , किसने ली थी जिम्मेदारी ?
झांसी के अस्पताल में नवजात जल कर मार गए , किसने ली जिम्मेदारी ?
रेल हादसों में मौतें हो गईं, किसने जिम्मेदारी ली ?
पहलगाम हुआ , दिल्ली ब्लास्ट हुआ लोग मरे किसने जिम्मेदारी ली ?
स्मार्ट सिटी मिशन चालू हुआ , कोई स्मार्ट सिटी ही नहीं बनी , लाखों करोड़ किसकी झोली में गया , किसने जिम्मेदारी ली ?
स्वच्छ भारत मिशन चालू है , AMRUT मिशन आया , किसकी झोली में गया पैसा , बदलाव कहां है , किसने ली जिम्मेदारी ?
मेक इन इंडिया PLI चालू हुआ , उसके बावजूद हर साल हमारा इंपोर्ट बढ़ता जा रहा , चीन हमको आंख भी दिखाता है , हमको सामान भी बेचता है , हम मजबूरी में खरीदते भी हैं ,किसने ली जिम्मेदारी ?
फर्जी कैंसर , डायबिटीज, हार्ट अटैक क��� दवाइयां बिक रहीं, अभी कुछ दिन पहले जहरीले सिरप पीने से बच्चों की मौत हुई , किसने ली जिम्मेदारी ?
कभी डॉक्टर का रेप होता है , कभी किसी छोटी बच्ची का रेप होता है , न्याय मिलने में सालों लगते हैं , लेकिन जिम्मेदारी ?
लाखों रुपए खर्च करके बच्चे तरह तरह के ग्रेजुएशन और कोर्स कर रहे तब भी बेरोजगार घूम रहे , किसने जिम्मेदारी ली ? केवल सरकार का काम प्राइवेट संस्थानों को मान्यता देने का है ? उनको आउटडेटेड कोर्स कराने का और पैसा कमाने का लाइसेंस देने का है ?
सरकारी अस्पताल में इलाज न मिलने पर , ट्रेलीटमेंट में नेग्लीजेंस होने पर , दवाइयां न मिलने पर , डॉक्टर साहब के गायब रहने पर , लापरवाही से मरीज की मौत होने पर किसने जिम्मेदारी ली ?
झोलाछाप के इलाज से कोई मर जाता है , तो किसकी जिम्मेदारी और किसने ली जिम्मेदारी ?
हर एक खाद्य पदार्थ में मिलावट दबाकर हो रही , लोग तरह तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे , ���िसने जिम्मेदारी ली ?
हर प्रदेश में पेपर लीक हो रहे , छात्र परेशान है , किसने ली जिम्मेदारी ?
देश का दुर्भाग्य ��ै , अब कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं बचा जो जिम्मेदारी ले सके ।
आज 52 दिन हो गए
सोनम वांगचुक को जेल गए।
यह शख्स न मुस्लिम है, न पाकिस्तानी, न आतंकी, न वामपन्थी, खालिस्तानी, कांग्रेसी, राजदिया, सपाई। ये व्यक्ति गुंडा नही, अपराधी नही, गैंगस्टर नही।
पर यह जेल में है।
क्यो है?
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जो अपराधी है, वो संसद, विधानसभा, मंत्रालय में बैठे हैं। बंगलो में रहते, लाल बत्ती में घूमते है। लेकिन एक वैज्ञानिक, समाजसेवक, अहिसंक, प्रबुद्ध शख्स जेल में है।
यह हमारे समाज के बारे में क��छ कहता है। यह हमारी सोसायटी के बारे में एक सच कहता है। ऐसा सच जो मेरे आपके, हम सबके मुंह पर एक थूक की तरह है।
52 दिनों से देश मे कहीं, कोई आवाज सोनम के लिए नही उठी। नेता, पत्रकार, एक्टिविस्ट, वकील, लेखक, कवि, सोशल मीडिया पर लाइक्स बटोर रहे वॉरियर सबके मुंह इस थूक से लसलसे, घृणित औऱ बदबूदार दिख रहे हैं।
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उसने वोट चोरी की शिकायत नही की। वह सरकार उखाड़कर फेंकना नही चाहता। उसने सिर्फ एक मांग की..
6th शिड्यूल।
अपनी संस्कृति की रक्षा।
जो वादा, अपने घोषणा पत्र में लिख करके, सरकार सत्ता में आई थी। इस मांग को पूरा करवाना, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। सोनम पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा है।
कोई दलील नहीं। अपील नही।
कोर्ट नही, सुनवाई नहीं।
52 दिन।
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हम सबको, हम सबकी
सामूहिक लानत है।
🚨🚨 95% स्लीपर क्लास में सफर करने वाले मेहनती और गरीब लोग हैं, जो पसीना बहाकर टिकट खरीदते हैं।
पर हर बार जब कोई बिना टिकट या जनरल टिकट वाला घुस आता है, TTE सबको स्लीपर में ठूंस देता है।
पुलिस वाले, जुगाड़ू यात्री, या AC क्लास से उतरे ठाठबाज सब स्लीपर कोच में आकर गरीब की सीट पर कब्जा कर लेते हैं।
क्या स्लीपर टिकट लेने वाले बेवकूफ हैं जो नियम से पैसा देते हैं? क्या स्लीपर कोच रेलवे का “धक्का मारो” डिब्बा बन गया है?
बिना टिकट वाले आराम से बैठते हैं, असली यात्री खड़े रहते हैं, महिलाओं का सामान गायब हो जाता है, बच्चों की सुरक्षा खतरे में रहती है और रेलवे मुँह फेर लेता है।
रेलवे गरीब से पैसा वसूलता है, पर इज्जत और हक छीने रखता है।
अगर टिकट लिया है तो सीट की गारंटी दो, नहीं तो ये पूरा सिस्टम सिर्फ लूट है।
सबसे भ्रष्ट विभाग के सबसे बड़े अपराध
लगभग 70 बेगुनाहों के खून से सनी हमारी सड़कें शमशान बनी हुई हैं। जयपुर में नशे म���ं धुत डंपर चालक ने 19 जिंदगियां छीन लीं, फलोदी में 18 श्रद्धालु ट्रेलर से टकराकर मरे, मनोहरपुर में दो मजदूर करंट की भेंट चढ़े और जैसलमेर में 28 यात्री बस में जलकर राख हो गए। मंजिल का तो पता नहीं लेकिन परिवहन विभाग यात्रियों को मौत के मुंह में जरूर पहुंचा रहा है। सबसे बड़े भ्रष्ट विभाग सबसे बड़े अपराधों का रिकॉर्ड बना रहा है। कोई इतना बेफिक्र कैसे हो सकता है। शायद सरकार भी मानती है कि जिंदगी की कीमत नकद में तय क��� जा सकती है, मुआवजा घोषित किया और पीछा छुड़ा लिया। इसीलिए तो नशे में ड्राइवर और अवैध बसें सड़कों पर बेरोकटोक दौड़ती हैं। इन हत्याओं का सबसे बड़ा कारण परिवहन विभाग की सुनियोजित छूट, लापरवाही और भ्रष्टाचार ही है। जयपुर में नशे की हालत में दौड़ते डंपर को किसी ने नहीं रोका, जैसलमेर की बस को गैर-कानूनी मॉडिफिकेशन के बावजूद परमिट थमा दिया गया, मनोहरपुर में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई स्लीपर बस छत पर सिलेंडर लादकर चल रही थी। ये सब विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं। फर्जी लाइसेंस, ओवरलोडेड वाहन, शराबी चालक - हर गुनाह की कीमत रिश्वत देकर चुकाई जाती है। सस्पेंशन और मुआवजे से ज्यादा कुछ नहीं किया जाता। यात्रियों की जान की कीमत कुछ लाख के मुआवजे में सिमटकर रह गई है। जिनके अपने नहीं जाते वे दर्द समझ भी नहीं सकते। रिश्वत की जड़ें जब तक नहीं कटेंगी तब तक ये हत्याएं जारी रहेंगी। #road_accidents #road_safety #jaipur #rajasthan
एमपी में अब कानून नहीं, डर और लाठी का राज है।
कल जिस इंजीनियर छ��त्र की पुलिस की पिटाई से मौत हुई,
उसका नया वीडियो आया है —
उसे पहले अर्धनग्न करके भगाया गया,
फिर एक कॉन्स्टेबल ने जूते से पैर कुचला,
और पिता ने कहा — बेटे को राइफल की बट से पीटा गया।
ये इंसाफ नहीं, जुल्म की हद है।
एमपी में अब कानून नहीं, जंगल राज चल रहा है।
#घोरकलजुग #MadhyaPradesh
@jitupatwari
सनातन विरोधी लॉबी चीफ जस्टिस गवई के साथ इसलिए नहीं है क्योंकि वे दलित समुदाय से हैं। वे केवल उनके भगवान विष्ण�� के बारे में बयान से खुश हैं। अगर गवई सनातन के पक्ष में कुछ कर देते तो यही लोग उन पर महाभियोग की मांग कर रहे होते। जस्टिस शेखर यादव का मामला देख लें, जिन्होंने इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ बोला, लेकिन सनातन विरोधी लॉबी उनके ओबीसी होने की परवाह किए बिना उनके ऊपर महाभियोग की मांग कर रही है। इनको वही दलित, वही ओबीसी चाहिए जो सनातन विरोधी हो।