जो वास्तव में सनातनी है वो BJP के साथ है....
सनातन के प्रति आस्था और उसकी संस्कृति व
मूल्यों के संरक्षण की भावना रखने वाले लोगों का
BJP के साथ खड़ा होना स्वाभाविक है। 🙏🚩
हम ओर हमारी धर्म करने की परम्परायें कैसे प्रकृति को असंतुलित करती है।
चींटियों को आटा ओर शक्कर डालना,कबूतरों को चुग्गा डालना,कुत्ते को रोटी देना ओर बंदरों को केला खिलाना
हम कभी नहीं सुधरेंगे क्योंकि हमारे मस्तिष्क में यहीं सब भरा गया है
“गऊ हमारी माता है” नारे के परिणाम असली तबाही मचायेंगे
एक तो मुझे ये गाँधी परिवार की क़ुरबानी वाली अवधारणा समझ नहीं आती।
कोई भी चुनाव हो... इनके चशमो चिराग तो यही गाते हैं कि हमारी दादी ने देश के लिए क़ुरबानी दी, हमारे पापा ने देश के लिए क़ुरबानी दी।
अरे भैया कौन सी क़ुरबानी... कौन सा बलिदान??
पंजाब में सब सही चल रहा था... अकाली दल को रोकने के लिए इंदिरा गाँधी एक विकल्प ढूंढ रही थी... फिर उन्हें भिंडरावाले मिला... उसको दिल्ली बुला कर बकायादा संजय गाँधी ने साक्षात्कार ले कर अपने काम के लिए तैयार किया।
फिर इनका प्यादा भिंडरावाले महत्वकांक्षी हो गया... ऊपर से पाकिस्तान ने भी उसके सर पर हाथ रख दिया... उसे ख़ालिस्तान का सपना दिखाया और फिर वह कांग्रेस के हाथों से निकल गया।
फिर उसे निपटवाने के लिए स्वर्ण मंदिर पर चढ़ाई कर दी... सैंकड़ो सिख मा गए... बाद में इस घटना का बदला लेने के लिए 2 सिख अंगरक्षकों ने इंदिरा गाँधी को मा दिया।
यह कोई क़ुरबानी या बलिदान नहीं था... खुद के कुकर्मो का फल था... जिन कुकर्मो के कारण 70-80 के दशक में हजारों हिन्दूओं ने जान गंवाई पंजाब में... और फिर 84 के दंगों के बाद हजारों सिख मा गए... पंजाब आतंकवाद की आग में 2 दशक झुलसा रहा... जिसमें हजारों लोग मा.. रे गए।
अपने कुकर्मो के कारण त्या हो जाना देश के लिए क़ुरबानी नहीं होती।
रही बात राजीव गाँधी की... तो वह अपने और अपनी माँ द्वारा किये गए दुर्घटना के शिकार हुए।
वैसे तो श्रीलंका में आजादी के बाद से ही तमिल और स्थानीय आबादी सिंहली लोगों के बीच द्वन्द शुरू हो गया था... 70 के दशक में यह और भी उग्र हो गया... और फिर प्रभाकरण ने LTTE बनाया।
शीत युद्ध का जमाना था... भारत जहाँ सोवियत के खेमे में था... श्रीलंका अमेरिका के करीब था... ऐसे में इंदिरा गाँधी को लगा कि वह तमिल और सिंहली लोगों के इस मुद्दे को सुलझा कर इस क्षेत्र में बढ़त हासिल कर सकती हैं।
इसीलिए उन्होंने श्रीलंका सरकार और LTTE के बीच मध्यस्थता की... और भूटान की राजधानी में दोनों पक्ष के बीच बातचीत शुरू करवाई।
अब यहाँ इंदिरा गाँधी खेल कर गई... तमिलनाडु की कुछ पार्टियों को खुश करने और खुद की महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए उन्होंने LTTE के लड़ाकों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया था।
आपको जानकार आश्चर्य हो सकता है कि तमिलनाडु में LTTE के ढेरों प्रशिक्षण शिविर थे... जिसमें सबसे बड़ा था कोलाथुर का शिविर... इसके अतिरिक्त कर्नाटक, उत्तरप्रदेश (नैनीताल... तब नैनीताल UP में ही था) में भी प्रशिक्षण शिविर थे। प्रभाकरण बाकायदा RAW के अफसरों के साथ घूमता था... मैंने कहीं पढ़ा था कि वह महू के आर्मी प्रशिक्षण केंद्र भी गया था।
यह 80 के दशक के शुरुआत की बात है... LTTE दिन प्रतिदिन घातक होता चला गया... क्यूंकि उन्हें आर्मी स्तर का प्रशिक्षण और हथियार दिए जा रहे थे।
इंदिरा गाँधी की त्या हुई... और उसके बाद खेल बिगड़ने लगा... राजीव गाँधी ने श्रीलंका सरकार और LTTE के बीच बात करवाई... लेकिन बात बनी नहीं। LTTE को लगने लगा था कि राजीव गाँधी उनके साथ खेल कर रहे हैं।
और जल्दी ही वह समय भी आया... जब इंदिरा गाँधी द्वारा पोषित LTTE का प्रभाकरण उनके बेटे का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया था।
राजीव गाँधी ने पीस कीपिंग फ़ोर्स भेज दी... बिना किसी तैयारी के... कश्मीर के पहाड़ो पर तैनात यूनिट को रातो रात श्रीलंका के जंगलो में तैनात किया गया... हमारे 1165 सैनिक शहीद हो गए थे इस पूरी प्रक्रिया में।
और इसके बाद तो LTTE और भारतीय सरकार के रिश्ते बेहद ख़राब हो गए थे... जिसका परिणीति राजीव गाँधी की त्या में हुई।
बताइये... क्या यह देश के लिए क़ुरबानी थी? या अपने कुकर्मो का फल??
"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪
जय श्री राम 🙏
हर हर महादेव 🔱🙏🚩
अभी तक तो आपने सुना होगा कि राहुल गांधी विश्वेश्वरैया शब्द नहीं बोल पाए थे पर कल तो और भी गजब हो गया था। संदीप दीक्षित ने "रचनात्मक कांग्रेस ' नामक के संस्था बनाया है जिसका कल दिल्ली में एक कंवेंशन था। इसमें विद्वान राहुल रचनात्मक शब्द बोल नहीं सके। तीन बार प्रयास के बाद भी।
राष्ट्र निर्माण का संकल्प सिर्फ नारे नहीं, कर्म से साकार होता है!SP सरकार के समय उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का नामोनिशान नहीं था। गैंगवार, अपहरण, दंगा और भ्रष्टाचार का राज था। विकास सिर्फ कागजों पर रह गया था। युवा बेरोजगार थे, किसान परेशान थे और तिरंगा सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित रह गया था।लेकिन योगी जी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार ने यूपी को नया रूप दिया।
कानून-व्यवस्था सख्त हुई, अपराधियों पर लगाम लगी। सड़कें, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर — हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई। आज उत्तर प्रदेश देश के विकास का इंजन बन चुका है।अब हर घर तिरंगा और हर दिल तिरंगा सिर्फ नारा नहीं, हकीकत है।
शांति, सुरक्षा और प्रगति के माहौल में ही राष्ट्रभक्ति फलती-फूलती है।योगी जी के नेतृत्व में विकसित उत्तर प्रदेश → विकसित भारत की नींव!#HarGharTiranga #TirangaYatra #ViksitBharat #PrideOfIndia #AzadiKaAmritMahotsav
तो आखिरकार शेर को सवा शेर मिल ही गया। सनातन हिन्दू धर्म को डेंगू मलेरिया कहने वाले और समूल नाश करने का विचार करने वाले उदय निधि स्टालिन को विजय जोसैफ ने अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर अश्लील टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
अगर E20 वाकई इंजन खराब करता तो पिछले ढाई सालों में इसका असर दिख जाता
सड़कों पर 20 करोड़ से ज्यादा टू व्हीलर्स और 20 लाख फोर व्हीलर्स इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर बिना किसी परेशानी के चल रहे हैं।
E20 से इंश्योरेंस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और इसका ऑक्टेन नंबर 108.5 है जो पेट्रोल के 84.4 से काफी ज्यादा है
इससे मॉडर्न इंजनों में बेहतर एक्सीलेरेशन और स्मूथ परफॉर्मेंस के साथ कार्बन उत्सर्जन 30 प्रतिशत तक कम होता है।
पुरानी गाड़ियों में रूटीन सर्विस के दौरान बस कुछ रबर पार्ट्स थोड़े जल्दी बदलने पड़ सकते हैं
#E20myth #E20 #अफवाह #Facts
फ़ोटो में दिख रहा भ्रष्ट अधिकारी पन्ना (शाहनगर) का SDM है।
भ्रष्ट की हरकत देखकर खूN खौ ल उठता है। जिस कुर्सी पर जनता के काम करने और न्याय देने की जिम्मेदारी होती है, उस पर बैठकर एक मेहनतकश डिलीवरी बॉय को सरेआम गालियाँ दे रहा है।
महज 120 रुपये का एक मोबाइल कवर! पार्सल कंपनी से पैक होकर आता है, उसमें धूप-गर्मी में साइकिल-बाइक दौड़ाने वाले डिलीवरी बॉय की क्या गलती? लेकिन भ्रष्ट को अपनी 'अफ़सरी' का रोब जो झाड़ना था! जब उस लड़के ने हिम्मत करके सिर्फ इतना पूछा कि "आपने मुझे गाली क्यों दी?"—तो भ्रष्ट की अंधी अना (Ego) तिलमिला उठी।
इसने पुलिस बुलाकर उस बेकसूर को धक्के मार कर बाहर करवाया और धारा 151 (शांति भंग) ठोक कर जेल भिजवा दिया!
भ्रष्ट अधिकारी गाली दें: तो वो 'प्रशासनिक कड़ाकेपन' का हिस्सा?
और गरीब अपने स्वाभिमान के लिए सवाल पूछे: तो वो 'शांति भंग'?
ये धारा 151 आम जनता के लिए बनी है या अफ़सरों के अहंकार को छुपाने का ढाल? शांति उस लड़के ने भंग नहीं की, शांति और मर्यादा उस कुर्सी पर बैठे अधिकारी ने भंग की है जिसने एक गरीब के आत्मसम्मान को अपने जूते तले रौंदने की कोशिश की।
यह सिर्फ उस डिलीवरी बॉय का अपमान नहीं है, यह हर उस आम इंसान के मुंह पर तमाचा है जो ईमानदारी से पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी कमाता है।
भ्रष्ट अधिकारी, याद रखिए—कुर्सी और पावर आज है, कल नहीं रहेगी। लेकिन जो बदतमीज़ी और घमंड तू ने दिखाया है, वो जनता कभी नहीं भूलेगी।
ऐसे अहंकारी अफ़सरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, वरना कल को कोई भी भ्रष्ट अधिकारी किसी भी गरीब को अपनी सनक के लिए जेल भिजवा देगा!
*रोंगटे खड़े हो जाएँगे!*
यह अद्भुत छोटी बच्ची उस क्षण को इतनी बेजोड़ वाक्पटुता और संयम के साथ व्यक्त करती है कि किसी को भी हथियार उठाकर खड़ा हो जाना चाहिए, यह वाकई अद्भुत है
Do our Puranas really contradict each other? 🤔 Or is this just another half-baked propaganda spread by critics of Sanatan Dharma?
In this video, it is claimed that because different Puranas describe different creators, at least three of them must be false. But the truth is that you cannot understand PhD-level Vedic knowledge with a kindergarten-level mindset! The Rigveda declares: "Ekam Sat Vipra Bahudha Vadanti" — Truth is One; the wise describe it in many ways. The Supreme Reality is one, though it is worshipped and explained through different forms and perspectives.
Unless you understand the concepts of Kalpa Bheda (differences across cosmic cycles) and the idea of a multiverse, these descriptions may appear contradictory. In reality, they represent different contexts within the vast framework of Vedic cosmology.
Watch the video till the end to learn the complete explanation and the reasoning behind these apparent differences. 🌌✨
For more scriptural and logical responses to common misconceptions, follow us now and share this video so the truth reaches everyone who has been misled.
वैसे तो राम मंदिर में दान देने वाले असंख्य हैं पर आइए मिलते हैं कलयुग के चार महारानियों से जिन्होंने अपनी दानशीलता से दानवीर कर्ण राजा रंतिदेव महाराजा शिवि और महर्षि दधीचि को मीलों पीछे छोड़ दिया है। हमारे यहां कहते हैं कि दान ऐसा दें कि दायां हाथ दान दे और बाएं हाथ को पता न चले