*मीरा को लगा कि..जहर में कैसा नशा है... देख लूँ*
*तो जहर को भी लगा कि..इसी बहाने कंठ में..कृष्ण प्रेम देखलूँ*
*बिना रिश्ते के जो अजनबी*
*अपने हो जाते हैं,*
*कभी-कभी खू�� के रिश्तों से*
*बड़े हो जाते हैं !*
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*अपनी आत्मा को*
*कभी मत बेचिए. . .*
*यही एक-मात्र चीज है जो*
*आप संसार में ले के आ���े थे,*
*और यही चीज है जो*
*जाते समय लेकर जाएंगे !!*
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