Rsmssb cet graduation ka syllabus 2026- ek qualifying exam ka syllabus itna vast kaise ho skta h.....upsc ka prelims ka b km h isse .... what's going on... Rajasthan govt.
@alokrajRSSB@BhajanlalBjp@hanumanbeniwal
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह कहना कि पेपर लीक से छात्रों को तैयारी के लिए ज़्यादा समय मिल जाता है, करोड़ों छात्रों की मेहनत और संघर्ष का अपमान है।
पेपर लीक किसी छात्र के लिए “फ़ायदा” नहीं, बल्कि उसके सपनों पर सीधा प्रहार है।
देश के युवाओं को बहाने नहीं, निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था चाहिए। दोषियों पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दो!
देश के छात्रों का भरोसा टूट चुका है। अब जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में OBC आरक्षण के साथ हो रहा निरंतर खिलवाड़ बेहद चिंताजनक है।
LDC भर्ती में 21% के बजाय मात्र 15% आरक्षण देना युवाओं के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। चतुर्थ श्रेणी, वनपाल और द्वितीय श्रेणी भर्तियों में भी इसी तरह नियमों की अनदेखी कर आरक्षित वर्गों के साथ सुनियोजित अन्याय किया गया है।
रोस्टर की आड़ में युवाओं के हक छीनना बंद करे भाजपा सरकार। मुख्यमंत्री जी तत्काल दखल देकर आरक्षण की इन विसंगतियों को दूर करें और युवाओं को न्याय दें।
राज ठाकरे की रैली में करीब 4 मिनट का एक वीडियो दिखाया गया कि 2014 के बाद से पूरे देश में अडानी का साम्राज्य कैसे फैला है...
ये अद्भुत है अब तक कोई और इतने सही तरीके से अडानी का विकास नहीं दिखा पाया है...
भारत सरकार द्वारा राज्यों को अरावली में ICFRE के माध्यम से 'मैनेजमेंट प्लान फॉर सस्टेनेबल माइनिंग' (MPSM) बनने तक नए पट्टे जारी करने पर रोक लगाना, केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिंदु 50 के उप-बिंदु (v) की पालना है। इसमें कुछ भी नया नहीं है।
केंद्र सरकार केवल 'हेडलाइन मैनेजमेंट' के लिए इसका प्रचार कर रही है, पर इंटरनेट के इस दौर में जनता को भ्रमित करना आसान नहीं है।
#SaveAravalli
(संलग्न: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति)
“पहाड़ कटेंगे तो इतिहास रोएगा,
अरावली बचेगी तो भविष्य मुस्कुराएगा।”
------------------
दिनांक: 25 दिसंबर, सुबह 11 बजे से
स्थान: इंद्रा कॉलोनी, आबू रोड़ सिरोही से
अपील : हम भविष्य को बचाने के लिए अरावली आंदोलन से जुड़ें।
यह लड़ाई सिर्फ पहाड़ों की नहीं, जीवन की है। आइए, एक कदम साथ चलें।
#अरावली_आंदोलन #हम_सब_अरावली_बचाएंगे
#SaveAravali #अरावली_बचाओ
#निर्मल_संग_अरावली_बचाएंगे
#NirmalChoudhary
श्री @byadavbjp, आपके भ्रामक दावे के अनुसार 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर अरावली के 0.19% क्षेत्र पर ही नया खनन होगा यानी लगभग 68,000 एकड़ पहाड़ पर खनन होगा।
एक खनन पट्टा यदि एक हैक्टेयर (2.5 एकड़) हुआ तो भी 27,200 नई खदानें खुल जाएंगी।
इससे होने वाले प्रदूषण से पूरे इलाके की कैसी दुर्गति होगी?
#SaveAravalli
प्रिय दिल्लीवासियों,
बची रहे जो ‘अरावली’
तो दिल्ली रहे हरीभरी!
अरावली को बचाना कोई विकल्प नहीं है बल्कि ये तो संकल्प होना चाहिए। मत भूलिए कि अरावली बचेगी तो ही एनसीआर बचेगा।
अरावली को बचाना अपरिहार्य है क्योंकि यह दिल्ली और एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है या कहें क़ुदरती ढाल है। अरावली ही दिल्ली के ओझल हो चुके तारों को फिर से दिखा सकती है, पर्यावरण को बचा सकती है।
अरावली पर्वतमाला ही दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम करती है और बारिश-पानी में अहम भूमिका निभाती है।
अरावली से ही एनसीआर की जैव विविधता बची हुई है। जो वेटलैंड गायब होते चले जा रहे हैं, उन्हें यही बचा सकती है। गुम हो रहे परिंदों को वापस बुला सकती है।
अरावली से ही एनसीआर का तापमान नियंत्रित होता है।
इसके अलावा अरावली से एक भावात्मक लगाव भी है जो दिल्ली की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है।
अरावली को बचाना, दिल्ली के भविष्य को बचाना है, नहीं तो एक-एक साँस लेने के लिए संघर्ष कर रहे दिल्लीवासी स्मॉग जैसे जानलेवा हालात से कभी बाहर नहीं आ पाएंगे। आज एनसीआर के बुज़ुर्ग, बीमार और बच्चों पर प्रदूषण का सबसे ख़राब और ख़तरनाक असर पड़ रहा है। यहाँ के विश्व प्रसिद्ध हॉस्पिटल और मेडिकल सर्विस सेक्टर तक बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो लोग बीमारी ठीक करने दिल्ली आते थे, वो अब और बीमार होने नहीं आ रहे हैं।
- यही हाल रहा तो उत्तर भारत के सबसे बड़े बाज़ार और आर्थिक केंद्र के रूप में भी दिल्ली अपनी अहमियत खो देगी।
- विदेशी तो छोड़िए, देश के पर्यटक भी यहाँ नहीं आएंगे।
- न ही दिल्ली में कोई बड़ा इवेंट आयोजित होगा।
- न ही कोई राजनीतिक, शैक्षिक, अकादमिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक सम्मेलन आयोजित होगा।
- न ही ओलंपिक, कॉमनवेल्थ या एशियाड जैसी कोई बड़ी खेल प्रतियोगिता आयोजित होगी।
- यहाँ का होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी-कैब, गाइड, हैंडीक्राफ़्ट बिज़नेस, हर काम-कारोबार व अन्य सभी आर्थिक-सामाजिक गतिविधियाँ ठप्प हो जाने के कगार पर पहुँच जाएंगी।
- जब प्रदूषण की वजह से हवाई जहाज़ नहीं चलेंगे, ट्रेनें घंटों लेट होंगी, सड़क परिवहन असुरक्षित हो जाएगा, तो दिल्ली कौन आएगा।
- यहाँ तक कि इसका असर ये भी पड़ेगा कि लोग अपने बेटी-बेटे की शादी तय करने से पहले दिल्ली के हवा-पानी के बारे में सोचने लगेंगे।
- इसीलिए हर नागरिक के साथ हर स्कूल-कोचिंग, हर व्यापारी, हर कारोबारी, हर दुकानदार, हर रेहड़ी-पटरीवाले, हर घर-परिवार तक को ‘अरावली बचाओ’ अभियान का हिस्सा बनना चाहिए।
- हर चैनल, हर अख़बार को ये अभियान चलाना चाहिए। जो लोग सरकार की चाटुकारिता कर रहे हैं, वो भी समझ लें कि उनका स्वयं का जीवन भी ख़तरे में है।
अरावली को बचाना मतलब ख़ुद को बचाना है।
अगर अरावली का विनाश नहीं रोका गया तो भाजपा की अवैध खनन को वैध बनाने की साज़िश और ज़मीन की बेइंतहा भूख देश की राजधानी को दुनिया की ‘प्रदूषण राजधानी’ बना देगी और लोग दिल्ली छोड़ने को बाध्य हो जाएंगे।
इसीलिए आइए हम सब मिलकर अरावली बचाएं और भाजपा की गंदी राजनीति को जनता और जनमत की ताक़त से हराएं!
आपका
अखिलेश
यह लड़ाई मेरी, आपकी और उनकी नहीं है,
यह लड़ाई उस गौमाता की है जिसने हमें इस रेगिस्तान में जिंदा रखा,
ओरण नहीं बचेगा तो गौवंश नहीं बचेगा
और गौवंश नहीं बचेगा तो बचेगा क्या…..?
कहीं हम वो आखिरी पीढ़ी तो नहीं जो अपने पूर्वजों (पाबूजी, गोगाजी, मेहाजी, हड़बूजी, जांभोजी, रामदेवजी, तेजाजी, आलाजी, पनराजजी, इत्यादि असंख्य वीरो और वीरांगनाओं) द्वारा गौमाता के लिए किए गए संघर्ष और दिए गए बलिदान के स्वर्णिम इतिहास को शून्य कर देंगे ।
#ओरण_बचाओ #गौवंश_बचाओ
RPSC द्वारा RAS 2024-25 भर्ती परीक्षा को लेकर जारी की गई विज्ञप्ति में जो पदों का असंवैधानिक बँटवारा किया गया है वह आरक्षित वर्गों के साथ सरासर अन्याय है।
आयोग से मेरा निवेदन है कि अनुसूचित जाति,जनजाति,ओबीसी वर्ग को उनके प्रतिशत के अनुसार आरक्षण देते हुए पुनः विज्ञप्ति जारी की जाये।
@BhajanlalBjp@RajGovOfficial
कभी उस बेरोजगार बच्चें की जगह रखकर सोचना... वो क्या क्या सहन करते हुए, वो कर्ज लेकर, जमीं बेचकर, खून के आंसू रोकर,घरवालों की उम्मीद का बोझ लिए हर दिन अपनी इच्छाओं को मारते हुऐ यह सोचता है एक दिन मेरी मेहनत जीत जायेगी लेकिन शायद यह गलत सिस्टम उसे जितने नही देगा....