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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राज़िऊन। 😭
मौलाना सलमान हुसैनी नदवी साहब के इंतक़ाल की खबर बेहद अफ़सोसनाक है, उनका जाना मिल्लत का बड़ा नुक़सान है।
अल्लाह से दुआ है कि उनके चाहने वालों को सब्र अता करे। #SalmanHusainiNadwi
अमरीका ईरान पर बम बरसा रहा हैं — बंदर अब्बास और केशम द्वीप पर हमला किया है।
ये होर्मुज़ जलडमरूमध्य के केंद्र में स्थित दो सबसे रणनीतिक ��्थल हैं।
यह अब तीसरी बार है जब अमेरिका ने बातचीत के बीच ईरान पर हमला किया है।
#IranWar #America
भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी मेजर गौरव आर्य राष्ट्रीय मीडिया चैनल पर लेबनान और गाज़ा में हुई बमबारी का खुल के समर्थक कर रहे है।
उन्होंने कहा "हम इज़राइल के सगे भा�� हैं। इजरायल लेबनान में वे जो कुछ भी कर रहे हैं, हम उसका समर्थन करते हैं। हम चाहते है कि वे लेबनान पर 100 और बम- 1/4
Unity that s@nghis h@te.
2 women from WB, 2 nice views. -Hindu Brahmin says,"I face no threat,we live like sisters,"
-While a Muslim woman claims that despite a Hindu PM,Hindus are still in danger.
If so,why not make a Muslim d PM & place Muslims in that claimed danger instead?
इस्लाम कब से ? – Since when is Islam?
आज अधिकांश लोगों में यह भ्रम प्रचलित है कि इस्लाम के संस्थापक हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हैं । यद्यपि सत्य यह है कि हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाह�� अलैहि वसल्लम कोई नया धर्म लेकर नहीं, बल्कि उसी धर्म के अन्तिम संदेष्टा(आख़री पैगंबर) थे, जो धर्म ईश्वर ने समस्त मानवजाति(पूरी इंसानियत) के लिए चुना था। हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस्लाम के संस्थापक नहीं, बल्कि उसके अंतिम संदेष्टा हैं। यही वह धर्म है जिसकी शिक्षा मनुष्य को दी गई थी। सबसे पहले मानव आदम(अ.स) हैं जिनकी रचना ईश्वर ने बिना माता-पिता के की थी और उनके बाद उनकी पत्नी हव्वा(���.स) को उत्पन्न किया था। इन्हीं दोनों पति-पत्नी से मनुष्य की उत्पत्ति का आरंभ हुआ, जिनको कुछ लोग मनु और सतरोपा कहते हैं, तो कुछ लोग ऐडम और ईव । जिनका विस्तारपूर्वक उल्लेख पवित्र क़ुरआन (2/30-38 ) तथा भविष्य पुराण प्रतिसर्ग पर्व (खंड 1 अध्याय 4) और बाइबल (उत्पत्ति 2/6-25) और दूसरे अनेक ग्रंथों में किया गया है।
"ईश्वर ने हर दौर में प्रत्येक समुदाय को उनकी अपनी ही ज़बान में शिक्षा(तालीम) दी है।" (सूरह इब्राहीम 14:4)
उसी शिक्षा के अनुसार जीवन-यापन(ज़रिया ए माश) का नाम इस्लाम था, जिसका नाम प्रत्येक संदेष्टा(मैसेंजर) अपनी-अपनी भाषा में रखते थे जैसे संस्कृत में नाम था ‘सर्व समर्पण धर्म’ जिसका अरबी भाषा में अर्थ होता है “इस्लाम धर्म” ।
ज्ञात यह हुआ कि मानव का धर्म आरंभ से एक ही रहा है, परन्तु लोगों ने अपने-अपने गुरुओं के नाम से अलग-अलग धर्म बना लिया और विभिन्न धर्मो में बंट गए।
आज हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता यही है कि हम अपने वास्तविक ईश्वर(हक़ीक़ी ख़ुदा) की ओर पलटें, जिसका संबंध किसी विशेष देश, जाति या वंश से नहीं, बल्कि वह सम्पूर्ण संसार का स्रष्टा(पूरी क़ायनात का खालिक़), अन्नदाता(ख़ुराक फराहम करने वाला) और पालनकर्ता(परवरिश करने वाला) है। ईश्वर ही ने हम सबको पैदा किया, वही ह��ारा पालन-पोषण कर रहा है, तो स्वाभाविक तौर पर हमें केवल उसी की पूजा(इबादत) करनी चाहिए, इसी तथ्य का समर्थन प्रत्येक धार्मिक ग्रंथों ने भी किया है। इस्लाम भी यही आदेश देता है कि मात्र एक ईश्वर की पूजा की जाए, इस्लाम की दृष्टि में स्वयं मुहम्मद (सल्ल.) की पूजा करना अथवा आध्यात्मिक चिंतन(रूहानी ग़ौर ओ फ़िक्र) के बहाने किसी चित्र का सहारा लेना महापाप है। सुनो अपने ईश्वर की-
“लोगो ! एक मिसाल दी जाती है, ध्यान से सुनो! जिन पूज्यों को तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो वे सब मिलकर एक मक्खी भी पैदा करना चाहें तो नहीं कर सकते। बल्कि यदि मक्खी उनसे कोई चीज़ छीन ले जाए तो वे उसे छुड़ा भी नहीं सकते। मदद चाहने वाले भी कमज़ोर और जिनसे मदद चाही जाती है वह भी कमज़ोर, इन लोगों ने अल्लाह की क़द्र ही नहीं पहचानी ��ैसा कि उसके पहचानने का हक़ है।” (कुरआन, 22:73-74)
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"दौड़ कर चलो उस राह पर जो तुम्हारे रब की बख़्शीश(माफ़ी) ���र जन्नत की तरफ ले जाती है, जिसकी वुसअत(चौड़ा��) ज़मीन और आसमान जितनी है और वह उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो हर हाल में अपना माल ख़र्च करते हैं(अल्लाह की राह में),चाहे गरीबी में हो या खुशहाली में, जो ग़ुस्से को पी जाते हैं और लोगों के क़सूर माफ कर देते हैं। ऐसे नेक लोग अल्लाह को बहुत पसंद है।"(सूरह अल इमरान: 133-134)
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ऐ मुहम्मद(सल्ल०) उनसे पूछो, "आसमान और ज़मीन से तुम्हें कौन रिज़्क (रोज़ी) देता है? ये समाअत और बीनाई(सुनने और देखने) की ताक़तें किसके पास है? ज़िंदा को मुर्दों से और मुर्दों को ज़िंदा से कौन निकालता है? दुनिया की यह तदबीर(व्यवस्था) कौन कर रहा है?" वे ज़रूर कहेंगे, "अल्लाह।" तो क्या तुम सच के खिलाफ जाने से नहीं रुकोगे? तब तो यही अल्लाह, तुम्हारा हाक़ीक़ी(सच्चा) रब है। तो फिर हक़(सच) के बाद गुमराही के अलावा क्या बचा है? तुम कहाँ भटक रहे हो? ऐ पैगंबर, देखो इस तरह तुम्हारे रब का वादा (वचन) उन लोगों पर सच हुआ है जो नाफ़रमानी करते हैं, कि वे ईमान नहीं लाएंगे।"(सूरह यूनुस:31-33)
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"बेशक, हमने इस(क़ुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल किया है। और तुम क्या जानो की शबे क़द्र क्या है? शबे क़द्र हज़ार महीनों से ज़्यादा बेहतर है। फ़रिश्ते और रूह इसमें अपने रब के हर हुक्म के साथ उतर��े हैं। वह रात सरासर सलामती है तुलु ए फज्र(भोर) तक।"[कुरान-सूरह अल-क़द्र]
अल्लाह तआला ने इस क़ुरान को लोहे महफूज़ से यकायक समाए दुनिया (यानी पहला आसमान) पर उतार दिया। इस रात क़ुरान का, जो की एक जलील ओ कद्र किताब(शानदार और मूल्यवान पुस्तक) है, उतारा जाना ही तारीख़ ए इंसानी का एक बहुत बड़ा मौजजा़(चमत्कार) था। इस क़ुरान को नाज़िल करके अल्लाह ने इंसान की तक़दीर को संवारने के लिए एक ऐसा निज़ाम दे दिया ज��� बीते हज़ार महीनों में भी ऐसा काम अंजाम नहीं पाया, क्योंकि इब्राहिम (अ. से) के जाने के बाद मोहम्मद (स अ व) के आने तक ढाई हजार साल का वक़्त गुजरा, उस लंबी मुद्दत के लिए यहां हज़ार का लफ्ज़ इस्तेमाल किया है, हजा़र कोई निर्धारित अंक नहीं है बल्कि अरब में हज़ार को सबसे बड़ा अंक माना जाता है। इस क़द्र वाली रात में क़ुरान को नाज़िल करके एक ऐसा अज़ीम कारनामा कर दिया जो रहती दुनिया तक इंसान की रहनुमाई (गाइडेंस) के लिए काफी है। हज़रत जिब्रील अ. स(फरिश्तों के सरदार) अल्लाह के हुक्म से हज़रत मोहम्म��(स अ व) के क़ल्ब(दिल) पर वही(रिविलीशन) के ज़रिए 23 साल तक क़ुरान लाते रहे। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने ईमान वालों को ताक़ रातों में शबे क़द्र को तलाश करने का हुक्म दिया है, जिसमें इंसानों की तक़दीर के फैसले होते हैं, जो सुबह तक सलामती (शांति) की रात है।
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दिल्ली के उत्तम नगर मामले में मीडिया और बड़ी आबादी के लोगों ने एकतरफा नॉरेटिव दिखाकर माहौल खराब किया और एक की पक्ष पर सारी कार्यवाही करके परिवार का वैध महान तोड़ दिया गए। लेकिन सच्चाई क्या है, दूसरे पक्ष की मुस्लिम लड़की ने खुद सामने आ कर बताया।
वीडियो पूरा देखिये और ज्यादा- 1/2
मक्का की पवित्र मस्जिद Masjid al-Haram में एक खास दुआ पढ़ी गई, जिसमें मुसलमानों की मदद और ज़ालिमों पर जीत की दुआ मांगी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी इमाम ने दुआ ��रते हुए कहा:
“ऐ अल्लाह! यहूदियों के खिलाफ हमारी मदद फरमा और हम पर हमला करने वालों पर हमें कामयाबी और फतह अता फरमा।”
🚨 इजरायल ने हिजबुल्ला के खिलाफ भीषण हमले शुरू कि 💥
बेरुत में इस एयरस्ट्राइक को देखिए और अंदाजा लगाइए कि कितना विस्फोटक डाला गया होगा कि पूरी इमारत जमींदोज हो गई।
#IsraelIranConflict
अमेरिकी-इजरायली युद्धक विमानों ने तेहरान में ईरानी तेल अवसंरचना को निशाना बनाया, जिससे शहर-ए रे रिफाइनरी में भीषण आग लग गई और कई क्षेत्रों में ईंधन डिपो में विस्फोट हुए।
ये हमल��� सबसे गंभीर तनावों में से एक हैं, क्योंकि इजरायली अधिकारी ईरान की अर्थव्यवस्था-1/2
पुराने लखनऊ में होल��� के त्योहार के दौरान होलिका दहन की रस्म के में डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरें भी जलाई गईं।
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साइंस व टेक्नोलॉजिया जो अब बता रही है वह कुरआन में अल्लाह तआ़ला ने 1447 साल पहले बता रखा है
"और हमने हर चीज़ को जोड़ा-जोड़ा पैदा किया है।"
[सूरह अज़-ज़ारियात, 51:49]
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि दुनिया की हर चीज़ को उसने जोड़ियों में पैदा किया है इंसान, जानवर, पेड़-पौधे, फल-फूल, सब में जोड़े मौजूद हैं। यहाँ तक कि दुनिया की बुनियादी चीज़ एटम (परमाणु) भी दो तरह की क़ुव्वतों नेगेटिव (इलेक्ट्रॉन) और पॉज़िटिव (प्रोटॉन) पर क़ायम है।
"पाक है वो अल्लाह, जिसने ज़मीन की उगाई हुई हर चीज़ की जोड़ियाँ बनाईं, और इंसानों की भी, और उन चीज़ों की भी जिनका इंसान को इल्म तक नहीं है।"
(क़ुरआन: सूरह या-सीन, 36:36)
यानी क़ुरआन कहता है कि इस दुनिया में हर चीज़ जोड़ियों में है कुछ जोड़ियाँ हमें दिखाई देती हैं और कुछ ऐसी हैं जिन्हें इंसान अब से पहले नहीं जानता था, और आगे चलकर इल्म बढ़ेगा तो नई चीज़ें मालूम होंगी।
#Note: क़ुरआन ने 1400 साल पहले "हर चीज़ जोड़े में है" का जो हक़ीक़त बताया, आज साइंस उसी बात को अपनी खोजों के ज़रिये साबित कर रही है। नर-और-मादा पौधे नर-और-मादा जानवर मर्द-और-औरत पॉज़िटिव-और-नेगेटिव चार्ज रात-और-दिन गर्मी-और-ठंड बारिश-और-खुश्की
हर चीज़ में एक पेयर सिस्टम है। यह अल्लाह की कुदरत की वो निशानी है जो इंसान को बताती है कि ये दुनिया किसी हिकमत के साथ बनाई गई है।