It is a moment of immense pride to see the Tiranga fly high in Aichi-Nagoya as Neeru Dhanda wins India’s first individual Gold Medal at the Asian Games 2026.
My heartiest congratulations to you on your historic victory in the Women’s Trap individual event and on setting a new Asian record. May this golden moment inspire many more young Indians to take up shooting and strive for excellence.
HISTORIC GOLD FOR INDIA 🥇
26-year-old Neeru Dhanda scripts HISTORY at the Asian Games 2026, winning India's FIRST-EVER individual Asian Games GOLD in Women’s Trap shooting. 🔥
Chak De Bharat 🇮🇳
कॉकरोचों की ऐसी रोस्टिंग किसी ने नहीं देखी होगी
अभिजीत दीपक है कौन ..?
ध्यान आकर्षित करने वाली R उसके चेस्ट ढल चुके हैं
अजीत ब्रो ने दीपके को तगड़ा रगड़ दिया 😅
ज्ञानेश कुमार को 'देश का गद्दार' बोला जा रहा है क्योंकि एक अख़बार ने, जो परंपरागत रूप से सनसनी फैलाने वाले समाचार छापता रहा है, यह लिखा कि दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार असहमति जतायी। 5 जजों की बेंच में दो असहमत हो तो बेंच का निर्णय ग़लत नहीं हो जाता।
दूसरी बात, असहमत होना चर्चा का एक मुख्य अंग है। प्रश्न यह होना चाहिए कि क्या असहमति का निवारण हुआ या नहीं? चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण आ चुका है कि हर निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। अब आपका प्रश्न होगा कि आप चुनाव आयोग की बात क्यों मानेंगे?
उत्तर यह है कि यदि आपको आज भी राहुल गाँधी और चुनाव आयोग में चुनना पड़ रहा है तो आपकी मति मारी गई है। यदि तिलचट्टे इसमें नाचने के लिए तैयार हैं तो आप समझ जाइए कि कुछ भी ग़लत नहीं हुआ है।
दुर्भाग्य यह है कि मीडिया में दक्षिण टोले के पत्रकार भी ज्ञानेश कुमार की जान लेने को उतारू हैं, वह भी बिना किसी तर्क के। मेरा मत यह है कि यदि सरकार 2003-04-05 के बाद SIR करवा रही है, तो वह तो डेमोग्राफिक संकट से उबरने का सबसे अच्छा मार्ग था और यह साबित भी हुआ है।
ज्ञानेश कुमार ने मृतक, डुप्लीकेट और विस्थापित वोटरों के नाम पर हो रही धाँधली को रोका है और इस कारण उन्हें यदि वामपंथी गद्दार कह रहे हैं, तो आप मान कर चलिए कि बंदे ने सही काम किया होगा। IAS लोगों को नोट लिखने का अच्छा शौक होता है, ताकि लगे कि काम हो रहा है।
कोई इस सामान्य प्रक्रिया को ऐसे प्रस्तुत करे कि कुछ आउट ऑफ़ द ब्लू हो गया, तो उन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।
इसके साथ ही, देश में अभी तिलचट्टा से ले कर रावण तक, सत्ता की चूलें हिलाने के लिए आंदोलन के लिए कुछ अवसर ढूँढ रहे हैं। शीतकालीन सत्र भी बहुत दूर है, तो व्यस्तता बढ़ाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा ही। इसीलिए, 'चक दे इंडिया' से 'गद्दार ज्ञानेश' की बकलोली हो रही है।
यह सब हाशिए पर जा चुके वामपंथियों और अपना अस्तित्व तलाश रहे काँग्रेसियों का षड्यंत्र मात्र है।
Do you remember ???
Just one month back, E20 petrol was destroying the vehicles of every supporter of the Congress ecosystem and paid X handles.
Arvind Kejriwal had promised to launch a pan India agitation to ban E20 petrol.
Abhijeet Dipke had threatened a protest.
Rahul Gandhi had made a video claiming that the blending of the fuel by Modi was stealing from the ordinary citizens by destroying their cars and scooters.
Suddenly....after a month
The SAME E20 petrol has stopped destroying the vehicles and damaging the engines of all vehicles.
Every car is running smoothly in India.
JNU में टुकड़े टुकड़े गैंग के साथ कौन - सलीम
शाहीन बाग और दिल्ली दंगाइयों के साथ कौन- सलीम
किसान आंदोलन में हाईवे रोकने वालो के साथ कौन- सलीम
और अब अराजक कोकरोचो के साथ कौन - सलीम
और जहाँ सलीम हो, वहाँ देश विरोध और अराजकता ना हो ये संभव ही नहीं है।
इसीलिए बस इनकी क्रोनॉलजी हर भारतीय तक पहुँचनी चाहिए।