श्री मोदी जी के हिन्दुत्ववादी कालखंड में स्कूल की पुस्तकों में ईसाइयों का गुणगान यह कह कर हो रहा है कि कन्वर्जन के बाद लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हुए।
“दूसरे शब्दों में कहें तो ईसाईयत भारत में दीर्घकालिक (सकारात्मक) परिवर्तनों का उद्गम रहा है।”
Congratulations to Kumkum Anil Mohod on winning India’s first-ever Gold in the Recurve Women’s Individual event at the #AsianGames2026.
A phenomenal achievement and a proud moment for the nation. More power to you, champion!
#Cheer4Bharat
44 साल का इंतज़ार हुआ खत्म, भारत की बेटियों ने रचा इतिहास! 🇮🇳🏑
भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इस गोल्ड के साथ टीम ने LA 2028 ओलंपिक का कोटा भी हासिल किया।
गोल्डन गर्ल्स, आपकी इस उपलब्धि पर संपूर्ण राष्ट्र गौरवान्वित है।
#AsianGames2026 #TeamIndia
#Cheer4Bharat
जब कॉकपिट के अंदर यह घटना हो रही थी,
तब मैं हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था।
मैं रोज सुबह उठकर कर पूजा करता हूं
अपने बेटे के साथ हनुमान चालीसा पढ़ता हूं।
~भारतीय कैप्टन, स्मित मच्छार
राजस्व विभाग अधिकारी- तुम्हारी जाति क्या है?
किसान- मैं पांडेय हूं, और वो पासी है।
चलो, इसे SC/ST वाला लगाओ?
यूपी के हरदोई में जमीन की पैमाइश के दौरान राजस्व विभाग के एक अधिकारी पर किसान को SC/ST एक्ट में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगा है।
22-वर्षीय देवा द्विवेदी ने स्वयं के ब्राह्मण होने और मोदी के दलीत-पीड़ीत फैन होने का अपराध झेलते हुए आत्महत्या कर ली।
उस पर मोदी एक्ट लगा था जिसके दवाब को वह सह नहीं पाया और अंतिम विकल्प चुना। सामाजिक और मानसिक यातना को झेलने से बेहतर उसने मरना चुना।
आशा है कि उसमे मरते समय ‘हर हर मोदी’ कहा होगा ताकि उसकी आयु भी मोदी जी को लग जाए और वह 2097 तक भारतभूमि पर राज कर सकें।
कहा जाता है कि ब्राह्मण देवा द्विवेदी अब श्री मोदी जी के परमधाम में वास कर रहे हैं। बोलिए @narendramodi भगवान की जय!
ज्ञानेश कुमार को 'देश का गद्दार' बोला जा रहा है क्योंकि एक अख़बार ने, जो परंपरागत रूप से सनसनी फैलाने वाले समाचार छापता रहा है, यह लिखा कि दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार असहमति जतायी। 5 जजों की बेंच में दो असहमत हो तो बेंच का निर्णय ग़लत नहीं हो जाता।
दूसरी बात, असहमत होना चर्चा का एक मुख्य अंग है। प्रश्न यह होना चाहिए कि क्या असहमति का निवारण हुआ या नहीं? चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण आ चुका है कि हर निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। अब आपका प्रश्न होगा कि आप चुनाव आयोग की बात क्यों मानेंगे?
उत्तर यह है कि यदि आपको आज भी राहुल गाँधी और चुनाव आयोग में चुनना पड़ रहा है तो आपकी मति मारी गई है। यदि तिलचट्टे इसमें नाचने के लिए तैयार हैं तो आप समझ जाइए कि कुछ भी ग़लत नहीं हुआ है।
दुर्भाग्य यह है कि मीडिया में दक्षिण टोले के पत्रकार भी ज्ञानेश कुमार की जान लेने को उतारू हैं, वह भी बिना किसी तर्क के। मेरा मत यह है कि यदि सरकार 2003-04-05 के बाद SIR करवा रही है, तो वह तो डेमोग्राफिक संकट से उबरने का सबसे अच्छा मार्ग था और यह साबित भी हुआ है।
ज्ञानेश कुमार ने मृतक, डुप्लीकेट और विस्थापित वोटरों के नाम पर हो रही धाँधली को रोका है और इस कारण उन्हें यदि वामपंथी गद्दार कह रहे हैं, तो आप मान कर चलिए कि बंदे ने सही काम किया होगा। IAS लोगों को नोट लिखने का अच्छा शौक होता है, ताकि लगे कि काम हो रहा है।
कोई इस सामान्य प्रक्रिया को ऐसे प्रस्तुत करे कि कुछ आउट ऑफ़ द ब्लू हो गया, तो उन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।
इसके साथ ही, देश में अभी तिलचट्टा से ले कर रावण तक, सत्ता की चूलें हिलाने के लिए आंदोलन के लिए कुछ अवसर ढूँढ रहे हैं। शीतकालीन सत्र भी बहुत दूर है, तो व्यस्तता बढ़ाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा ही। इसीलिए, 'चक दे इंडिया' से 'गद्दार ज्ञानेश' की बकलोली हो रही है।
यह सब हाशिए पर जा चुके वामपंथियों और अपना अस्तित्व तलाश रहे काँग्रेसियों का षड्यंत्र मात्र है।
आज मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में UGC नियमों के विरोध में सवर्ण समाज ने प्रदर्शन किया।
यह आंदोलन स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज,काली सेना और सवर्ण सेना के नेतृत्व में किया गया।
जब व्यक्ति पूजा में दीपावली मनाई जाने लगे तो दीया नहीं जलाने वाले के हिन्दुत्व का सर्टिफिकेट छीन लिया जाता है। आज जिन हिन्दुओं ने सिंहासन दिया, वही राजद्रोही हो गए हैं।
देश का ऐसा कोई कोना नहीं बचा है
जहाँ UGC नियमों का विरोध न हुआ हो।
दिल्ली से लेकर जम्मू तक लगातार UGC का विरोध किया जा रहा है। यह वीडियो हिमाचल प्रदेश का है।
विष्णु तिवारी ने फर्जी SC/ST एक्ट और रेप केस में 20 साल तक जेल काटे और निर्दोष साबित हुए।
जेल से आए हुए विष्णु तिवारी को 5 साल हो गए है
अब जाकर मेनस्ट्रीम मीडिया आवाज़ उठा रही है।
राष्ट्रकवि दिनकर जी की जयंती पर बड़ा निर्णय।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' जी की जयंती पर मंत्रिपरिषद ने रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय, बेगूसराय की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है। विश्वविद्यालय की स्थापना के क्रम में पदाधिकारी एवं कर्मियों के वेतनादि के लिए ₹15 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति का प्रावधान किया गया है।
दिनकर जी की साहित्यिक एवं राष्ट्रचेतना की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है।
#CabinetDecisions #NDA4Bihar #दिनकर_जयंती
जाति और गोत्र पर उनका लिखा पढ़ लीजिएगा। राष्ट्रवाद पर भी। और हाँ, ‘उतरा कहाँ स्वराज? बोल दिल्ली तू क्या कहती है’ भी अच्छी है।
आप एक गोबर नेता बन चुके हैं जिसे न राष्ट्र से मतलब है, न धर्म से, न समाज से। कॉपी-पेस्ट बकलोली होती रहनी चाहिए बस!
कोसी क्षेत्र में जब नदी बढ़ना शुरू करती थी, तब बाढ़ का स्वागत होता था। महिलाएँ नदियों की प्रशंसा में मंगल गान गाती थीं। नदी अगर फिर भी बढ़ती रहती, तो उसकी पूजा शुरू होती थी कि, "माँ! अब जाओ।" और कोसी अगर फिर भी न माने, तो उसे सिंदूर दिखाकर डराया जाता कि, "...अब चली जाओ, नहीं तो तुम्हारी शादी कर देंगे।" कोसी, जो कि एक चंचल और कुमारी नदी है, ब्याह के डर से भाग जाती। पारंपरिक मान्यता है कि जिन नदियों की धारा स्थिर होती है, उन्हें विवाहिता स्त्री की तरह धीर-गंभीर माना जाता है। जो नदियाँ अपनी धारा बदलती रहती हैं, उन्हें कुमारी कन्या की तरह चंचल रूप में देखा जाता है। कोसी की धारा स्थिर नहीं है, अतः उसे कुमारी माना जाता है।
नदियों के साथ लोगों का बराबरी का रिश्ता था। यही कारण था कि अधिकांश नदियों को लोगों ने माता के रूप में देखा। महर्षि विश्वामित्र कोसी को अपनी बड़ी बहन कहते थे। ब्रह्मपुत्र को स्थानीय लोग बाबा कहते हैं। गंगा, राजा शांतनु की पत्नी तथा प्रत्येक भारतीय की माँ के रूप में प्रख्यात हैं। नर्मदा, मान्धाता की पुत्रवधू और पुरुकुत्स की पत्नी हैं। नदियों में आसक्ति रखने वाले प्रख्यात समाजसेवी काका कालेलकर अपने गाँव के बगल में बहने वाली मारकंडी नदी को अपने बचपन की सहेली मानते थे।
असम में जब ब्रह्मपुत्र और दिबांग में एक साथ बाढ़ आती है और उनका पानी एकाकार होने लगता है, तब लोगों की मान्यता है कि दोनों का विवाह संपन्न होता है। इसके पहले कि लोग बाढ़ से अपनी रक्षा करें, नवविवाहितों को भेंट-उपहार देना नहीं भूलते। उत्तर प्रदेश में घाघरा तथा तरैना के बारे में भी इसी तरह की किंवदंती मशहूर है।
बाहर कहीं से आए फिरंगियों को यह भारतीय व्यवस्था हजम नहीं हुई। उनका ध्यान रेवेन्यू यानी "दुगुना लगान" वसूलने पर था। तो उन्होंने तटबंधों के बीच नदियों को बाँधकर कृषि से अधिक से अधिक लगान वसूलने की कोशिश की और जल्दी ही उन्हें इसकी निरर्थकता समझ में आ गई। फिरंगियों ने दामोदर पर तटबंध बनाने के बाद ईडन कैनाल भी बना डाली। रेल लाइन तो अपने आप में एक बाँध थी ही। उधर से गुजरने वाली ग्रैंड ट्रंक रोड को भी ऊँचा और मजबूत किया गया। ये सारी संरचनाएँ एक-दूसरे के समानांतर (पैरेलल) थीं। वे जमीन के ढाल को सीधा काटती थीं और पानी की राह में रुकावट बनकर रह गई थीं। एक अंग्रेज इंजीनियर, विलियम विलकॉक्स ने इन बाँधों जैसी संरचनाओं के बारे में लिखा था, "इन पाँच राक्षसी दीवारों ने दामोदर को कैद कर लिया और (बर्धमान से) हुगली के बीच के मस्त और खुशहाल इलाके को मलेरिया और गरीबी के गड्ढे में ढकेल दिया।"
दामोदर पर तटबंध बन जाने की आड़ में बाहर के प्राकृतिक तालाब और पोखरे बेमौत मरने लगे; क्योंकि वे पानी में उगने वाले खरपतवार से भर गए, जमीन की उर्वरता समाप्त होने लगी और सूखा तथा अकाल अपना बदनुमा चेहरा दिखाने लगे। रेल लाइन के 1860 में पूरा होने के सिर्फ एक साल के अंदर बर्धमान में 1861 में मलेरिया फैला। आखिरकार दामोदर पर बने दाहिने तटबंध को 1859 में 32 किलोमीटर की लंबाई में सरकार द्वारा तोड़ा गया। इस तरह जमीन की उर्वरा शक्ति वापस लौटी और 1863 तक हालात पर काबू पा लिया गया।
(इन्टरनेट से साभार लिया गया वीडियो झंझारपुर में कमला-बलान का है)
अक्ल के अंधों को वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह जी का वर्तमान राजनीति पर यह विश्लेषण जरूर सुनना चाहिए। अब यह मत कह देना प्रदीप सिंह भी बिक गया है। याद रखना कड़वे सच कहने का साहस बहुत कम पत्रकार कर पाता है, वो भी सत्ता के शीर्ष के खिलाफ।
प्रदीप सिंह : भाजपा के लिए कोर समर्थक भाजपा के अलावा किसी दूसरे पार्टी को वोट देना नहीं चाहता है। लेकिन भाजपा ने ऐसी परिस्थिति उत्पन्न कर दिया है कि वे भाजपा को वोट ना देकर दूसरे पार्टी को वोट दे। अब भाजपा को तय करना है उसे अपने कोर समर्थकों को अपने साथ रखना है या उसे बाहर करना है।
हमारा टार्गेट चुनाव नहीं वो बस माध्यम है
हमारा टार्गेट सवर्णों के खिलाफ फैलाए झूठ और नफरत को खत्म करना है
अब इसके लिए BJP या कॉंग्रेस दोनों की बलि क्यों ना चढ़ानी पड़े
समाज है तब पार्टी है पार्टी से समाज नहीं है तुम्हारे लिए चुनाव मुद्दा हो सकता हमारा टार्गेट इस पूरी नफरत की राजनीति को खत्म करना है
सुनिए अजित भारती जी को -- सवर्ण इस देश में कितने है? मैं कहता हूं तो तुम लोग मानते नहीं 🤦♂️
ये भारत के ह्यूमन कैल्कुलेटर आर्यन शुक्ला है।
ये गणित की बड़ी संख्याओं को बिना किसी कैलकुलेटर के आसानी से जोड़ देते हैं। इतनी बड़ी-बड़ी संख्याओं को इतनी आसानी से जोड़ना देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। ऐसा लगता है जैसे आर्यन शुक्ला के दिमाग में कोई कैलकुलेटर लगा हो। लेकिन यह कोई जादू नहीं है, बल्कि उनकी सालों की मेहनत, लगन और लगातार अभ्यास का नतीजा है।
आर्यन महज 6 साल की उम्र से ही मानसिक गणित और गणना का अभ्यास कर रहे हैं। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद और मनोरंजन में अपना समय बिताते हैं, उस उम्र से ही आर्यन ने गणित की कठिन गणनाओं को आसान बनाने का अभ्यास शुरू कर दिया था। इस समय आर्यन 14 साल के है।
आर्यन ने 12 साल की उम्र में जर्मनी में आयोजित प्रतिष्ठित मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड कप 2022 जीता। इस समय आर्यन शुक्ला के नाम कुल 6 वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं। आर्यन शुक्ला को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
If the so-called Left had even an ounce of functional brain cells, they would have supported Ajeet Bharti right now. Or at least kept their mouths shut instead of attacking him just because he supported BJP in the past for whatever reasons he thought were right at the time. And the GC cause benefits General Category people from the Left as well. It isn’t a Left vs Right issue. But they don’t have that political capacity to process this.
The real problem is BJP. Ajeet Bharti and many others like him are opposing BJP today, for perfectly valid reasons. People who once defended BJP are now attacking it because BJP has moved away from positions that earned their support in the first place.
Its ideological shift has become so drastic that it is willing to compromise its own core voters to appease the same brainless Left loonies who hate BJP anyway. So BJP is losing people who actually supported it while trying to please people who probably never will. Imagine sacrificing people who actually stood with you to impress people who still hate you. That’s not ideological evolution for long-term cultural influence. That’s political self castration.
And people can keep cancelling Ajeet and others. This cancel culture against Ajeet will only help him. They’re giving him publicity and the GC cause momentum for free. BJP can keep taking this lightly. They’ll eventually pay for these short term ideological compromises.