यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ़ एक नाम बचा - बाकी 727 नाम काट दिए गए।
ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली चुनावों में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे - पर ये कहीं नहीं गए, यहीं हैं।
आज मैं इनकी झुग्गी में गया और सीधे इन्हीं से सुना कि चुनाव आयोग ने इनके साथ क्या किया है।
SDM से फ़ोन पर मैंने यही कहा - मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है। ख़ुद CEC ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि "हाउस नंबर 0" बेघरों के लिए है। फिर भी 727 लोगों का नाम काट दिया गया।
यह SIR नहीं - यह वोट चोरी का तरीक़ा है। जिनके पास पहले ही सबसे कम है, उनसे उनकी इकलौती ताक़त छीनी जा रही है।
ज्ञानेश कुमार तो जाएँगे। पर जिस सिस्टम ने उनसे यह करवाया, उसका हिसाब भी होगा।
#VoteChori
आज़ादी के 75 सालों बाद और अपनी मृत्यु के 62 सालों बाद भी नेहरू जिंदा है,🔥
बिल्कुल सही कहा आपने निशिकांत दुबे जी नेहरू अय्याश ही थे।
नेहरू ने अपने अय्याशी के दौर में ही देश को IITs दिया,
नेहरू ने अय्याशी करते हुए ही देश को AIIMS दिया,
नेहरू ने अपने अय्याशी में ही देश को ISRO दिया,
नेहरू ने अय्याशी करते हुए देश को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (NID)दिया,
नेहरू ने अपने अय्याशी में ही देश को Atomic energy commission दिया,
नेहरू ने अपने अय्याशी में ही भारत को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र दिया,
प्लानिंग कमीशन दिया,ONGC दिया,indian oil दिया।
अगर आज़ादी के 75 सालों बाद भी देश के संसद में नेहरू का ज़िक्र हो और RSS के सीने पर कील की तरह नेहरू चुभ रहे है तो नेहरू अय्याश तो होंगे ही।
शिक्षकों के सम्मान में बबीता मैडम भी आ गई मैदान में..
उन्होंने जबरदस्त ढंग से अंजना को रेलते हुए कहा कि अगर अंजना टीचरों को कह रही है कि टीचर दो कौड़ी की है तो अंजना खुद फूटी कौड़ी की ठहरी..!
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।
गहलोत सरकार में पेपर आउट होता था….
भजनलाल सरकार में OMR शीट आउट हो रही है
35 नम्बर आने वाले को 195 नम्बर दिए जा रहे हैं…
65 वाले को 165 दिए जा रहे हैं…
ईमानदार छात्रों के क़िस्मत में तो रोड़े ही रोड़े हैं…!!
#चयन_बोर्ड_OMR_घोटाला#OMR_का_खेल_बंद_करो
आज मैं अपनी प्रोफाइल पिक्चर (DP) बदलकर #SaveAravalli अभियान का हिस्सा बन रहा हूँ। यह सिर्फ एक फोटो नहीं, एक विरोध है उस नई परिभाषा के खिलाफ जिसके तहत 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को 'अरावली' मानने से इंकार किया जा रहा है। मेरा आपसे अनुरोध है कि अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलकर इस अभियान से जुड़ें:
अरावली के संरक्षण को लेकर आए इन बदलावों ने उत्तर भारत के भविष्य पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह निर्णय हमारे अस्तित्व के लिए खतरनाक है क्योंकि:
1️⃣ मरुस्थल एवं लू के खिलाफ दीवार: अरावली कोई मामूली पहाड़ नहीं, बल्कि कुदरत की बनाई 'ग्रीन वॉल' (Green Wall) है। यह थार रेगिस्तान की रेत और गर्म हवाओं (लू) को दिल्ली, हरियाणा और यूपी के उपजाऊ मैदानों की ओर बढ़ने से रोकती है। अगर छोटी पहाड़ियाँ (Gaping Areas) खनन के लिए खुल गईं, तो रेगिस्तान हमारे दरवाज़े तक आ जाएगा और गर्म हवाएं तापमान को बढ़ा देंगी।
2️⃣ प्रदूषण से रक्षा: ये पहाड़ियाँ और यहाँ के जंगल NCR और आसपास के शहरों के 'फेफड़ों' (Lungs) की तरह काम करते हैं। ये धूल भरी आंधियों (Dust Storms) को रोकते हैं और जानलेवा प्रदूषण को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। दिल्ली और आसपास के इलाके में अरावली के बावजूद इतनी गंभीर स्थिति है तो अरावली के बिना कैसी स्थिति होगी, उसकी कल्पना करना भी वीभत्स है।
3️⃣ भूजल (Groundwater): अरावली हमारे लिए पानी का मुख्य रिचार्ज ज़ोन है। अरावली की चट्टानें बारिश के पानी को ज़मीन के भीतर भेजकर भूजल रिचार्ज करती हैं। अगर पहाड़ खत्म हुए, तो भविष्य में पीने के पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा,जिससे वन्यजीव लुप्त होने की कगार पर आ जाएंगे तथा इकोलॉजी को खतरा होगा।
वैज्ञानिक सच यह है कि अरावली एक निरंतर शृंखला (Continuous Chain) है। इसकी छोटी पहाड़ियाँ भी उतनी ही अहम हैं जितनी बड़ी चोटियाँ। अगर दीवार में एक भी ईंट कम हुई, तो सुरक्षा टूट जाएगी।
📢 हमारी अपील:
हम केंद्र सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट से विनम्र निवेदन करते हैं कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस परिभाषा पर पुनर्विचार (Reconsider) करें। अरावली को 'फीते' या 'ऊंचाई' से नहीं, बल्कि इसके 'पर्यावरणीय योगदान' (Ecological Impact) से आंका जाए।
#SaveAravalli
न्यूयार्क में गूँजे….जवाहरलाल नेहरू के शब्द
एक ऐसा क्षण आएगा, जो इतिहास में बहुत कम आता है, जब हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाएंगे, जब एक युग का अंत होगा, और जब एक राष्ट्र की आत्मा, जो लंबे समय से दमित थी, अभिव्यक्ति पाएगी।
—“ट्रिस्ट विद डेस्टिनी”
सबसे दुःखी तो बीएडधारी😑🥺
अध्यक्ष साहब @alokrajRSSB जी पद मे वृद्धि होनी चाहिए...चाहे एग्जाम को आप थोड़ा लेट सेट करके आयोजित करवाओगे तो भी चलेगा...7500 से तो अच्छा है की विज्ञप्ति ही ना जारी हो 💔
राजस्थान में सबसे बड़ी भर्ती रीट की होती है और उसमें में भी 7500 पद.?
#शिक्षक_भर्ती_में_पद_बढ़ाओ @BhajanlalBjp
प्रिय राजस्थान सरकार माननीय श्रीमान भजनलाल जी आपसे विनम्र निवेदन है की 3rd Grade भर्ती परीक्षा मे पद बढ़ाकर कम से 25 हजार करो।
Reet = 7500 💔💔 इससे तो अच्छा है की Reet मुख्य भर्ती परीक्षा की विस्तृत विज्ञप्ति ही जारी ना हो।
#शिक्षक_भर्ती_में_पद_बढ़ाओ@BhajanlalBjp