यदि यही भाषा इस लड़के ने बोली होती तो ये जेल में होता ।
लेकिन साहब @IASassociation के मेंबर हैं । स्वयं IAS हैं । तो इनको कुछ नहीं होगा ।
गुलामी के दौर में अंग्रेजी हुकूमत तो यही चलाते थे । अब स्वतंत्र भारत में ये अधिकारी गुलामी का अहसास दिलाते हैं ।
कहने को कानून सब के लिए बराबर है।
लेकिन @DoPTGoI को अगर गीता की कसम खा कर बोलना हो तो वह भी बोल देगा कि वो इन IAS का कुछ नहीं कर सकता । क्योंकि वो भी ये IAS ही चलाते हैं।
बाकी @PMOIndia को तो मजा आता है, इसलिए आज तक एक भी कानून , एक भी नियम इन IAS लोगों के ऊपर लागू होने वाला नहीं बना पाए ।
आम जनता के लिए हर दूसरे दिन नया नियम बना देते हैं।
क्या आप जानते हैं?
-EWS criteria, OBC creamy layer की criteria की तुलना में बहुत ही अधिक कठोर है! 👇
1. OBC-NCL में सिर्फ़ माता-पिता की आय देखी जाती है, उम्मीदवार की खुद की आय भी नहीं जुड़ती!
जबकि EWS में पूरे परिवार की आय जोड़ी जाती है, जिसमें माता-पिता, भाई-बहन, ख़ुद, बीवी सब शामिल हैं!
2. OBC-NCL में कृषि, और अन्य पारम्परिक व्यवसायों की आमदानी जोड़ी ही नहीं जाती!जबकि EWS में पूरे परिवार के वेतन के साथ कृषि और अन्य साधनों की आमदनी भी जोड़ी जाती है!
3. OBC-NCL में पिछले 3 सालों की आय का average लिया जाता है!
जबकि EWS में सिर्फ़ एक साल पहले की आय देखी जाती है!
4. OBC-NCL के लिए कोई "asset limit" नहीं!
जबकि EWS में एक "asset criteria" होता है! यानी अगर किसी के पास पांच एकड़ कृषि ज़मीन, या 1,000 वर्ग फुट का आवासीय फ्लैट, या अधिसूचित नगर पालिकाओं में 100 वर्ग गज की आवासीय ज़मीन, या गैर-अधिसूचित नगर पालिकाओं में 200 वर्ग गज की आवासीय ज़मीन है, तो वो EWS नहीं ले सकता!
5. OBC-NCL में सरकारी नौकरियों में आय देखी ही नहीं जाती, सिर्फ रैंक देखी जाती है!अगर किसी के माता-पिता ग्रुप C या D नौकरी में हैं, या माता-पिता में कोई एक ग्रुप B नौकरी में है, तो आय भले ही 8 लाख से ऊपर हो, वो फिर भी OBC-NCL माना जायेगा!
साथ ही अगर प्रोमोशन से ग्रुप A में अगर 40 साल के बाद पहुंचे तो भी उनके बच्चे NCL हैं!
है ना कमाल?
जबकि ऐसा EWS में नहीं!
और इन्ही वजहों से EWS में अधिकांश लोग qualify ही नहीं करते!
ये आरक्षण सिर्फ एक छलावा है!
Crude oil is down now from around 120 to 80 dollars and retail petrol price is still up.
Now no one from ministry or TV News media will tell us how much money OMC is earning per quarter and how much tax revenue Govt is making due to this.
राम मंदिर में जिन 5 लोगों से पूछताछ चल रही है, उसमें टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव भी शामिल हैं, मनीष भी रुपए की गिनती करता था। स्वर्गद्वार इलाके में पुश्तैनी घर में रहता था। चर्चा है कि उसकी बताई जगह से 36 लाख रुपए कैश मिला है।
राम मंदिर में दान में चढ़ने वाले सोने-चांदी के जेवरों को केडी तिवारी संभालते हैं,वह भी अब संदेह के घेरे में हैं। इन्होंने 1.5 करोड़ की जमीन खरीदी है, ये भी जांच के दायरे में है। आरोप यह भी है कि केडी तिवारी ने 5 करोड़ रुपए की संपत्ति जुटाई है।
कई लोग जानना चाहते हैं कि राम मंदिर में दान चोरी का मामला खुला कैसे? असल में कुछ दिन पहले चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में एक नया कर्मचारी शामिल हुआ था। 7 जून, 2026 को उसने नोटों की एक गड्डी छिपा ली। उसकी यह हरकत CCTV में रिकॉर्ड हो गई।
पूछताछ होने पर उसने चढ़ावे की रकम में हो रही चोरी से जुड़ी कई बातें बताईं। 9 जून को यह जानकारी सार्वजनिक हो गई और मामला सुर्खियों में आ गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इसे मुद्दा बनाकर सरकार और ट्रस्ट को घेरा।
हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने पर चंपत राय ने बाकी ट्रस्टियों को इसकी जानकारी नहीं दी। हेरा-फेरी की जानकारी होने के बावजूद पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई।
चंपत राय ने 12 जून को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी। कहा- ट्रस्ट समय-समय पर चढ़ावे की राशि को ऑडिट कराता है। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है।
Gajab ka cabinet hai!
PM – Foreign Tour Paglu
Home Minister – Election Paglu
Foreign Minister – Laser Light Paglu
Defence Minister – Kadi Ninda Paglu
Transport Minister – Ethanol Paglu
Finance Minister – Tax Paglu
Education Minister – Exam Leak Paglu
Rail Minister – Reel Paglu
Ishwar hi bachaye mere desh ko.
Modi launches ‘Bharat Innovates’ everywhere, except in India. While other nations invest in real R&D, AI, and infrastructure, our governments stay obsessed with PR, freebies, and fuel adulteration experiments.
Innovation doesn’t grow through speeches abroad; it grows through action at home.
Crude oil is at ~$81/barrel today.
Under UPA, when crude was $107/barrel, petrol was ₹72/litre in Delhi.
Under Modi, with crude at $81; petrol is ₹102/litre.
CHEAPER crude. COSTLIER petrol.
Someone is pocketing the difference. Let’s talk about who. 🧵
@narendramodi Nice joke.
I must be living in some parallel universe where the condition of middle class has deteriorated so much that it has become a fight for survival.
Your government is just for billionaires like Adanis, Ambanis.
Saying this as a voter who till now has only voted for BJP.
रेल मंत्री जी , सवाल बहुत सीधा है।
15 साल बाद भी ट्रेन लेट होने की समस्या जस की तस है।
तत्काल टिकट बुकिंग आज भी टिकट कम और डिजिटल जुआ ज्यादा लगती है।
IRCTC पर लॉगिन , CAPTCHA, OTP, पेमेंट और सीट - सब भगवान भरोसे चलते हैं।
स्टेशन और ट्रेनों में फूड वेंडर मनमानी करते हैं।
कभी ओवरचार्जिंग, कभी खराब क्वालिटी, कभी बिल नहीं - लेकिन कार्रवाई सिर्फ पोस्टर और ऐप में दिखती है।
देश की आबादी बढ़ती रही, यात्री बढ़ते रहे, लेकिन ट्रेन और सीटों का अनुपात उसी पुराने हिसाब में अटका पड़ा है।
त्योहारों पर जनता इंसान कम और मालगाड़ी का सामान ज्यादा महसूस करती है।
सवाल यह है कि जब ट्रेन समय पर नहीं चल रही , टिकट समय पर नहीं मिल रहा , खाना सही दाम पर नहीं मिल रहा और यात्रियों के लिए पर्याप्त ट्रेनें नहीं हैं, तो 2047 का विकसित भारत किस प्लेटफॉर्म से छूटेगा?
रेल मंत्री जी, देश को सिर्फ वंदे भारत की फोटो नहीं चाहिए।
देश को समय पर ट्रेन , आसान टिकट, साफ खाना, सुरक्षित सफर और पर्याप्त सीटें चाहिए।
कृपया बताइए - हम 2047 के बाद अचानक विकसित होंगे, या उससे पहले भी आम यात्रियों के अच्छे दिन आने का कोई chance है?
अगर जमीन की खरीद फरोख्त के समय ही तन्द्रा टूट गई होती तो आज पैसे की हेर फेर का दिन ही न आता ।
लेकिन उस समय इनको गुमान था कि जनता और वोट इनकी मुट्ठी में बंद हैं । इसलिए इन्होंने अपने लोगों को करोड़पति बना दिया और सोचे थे कि कोई रिएक्शन नहीं होगा ।
सही बताए अगर 2024 के चुनाव में छीछालेदर नहीं हुई होती तो आज भी ये कुछ जांच वांच न करते ।
ये तो जस्ट एक साल से कम समय में चुनाव है और पहले एक बार झंउसा चुके हैं । इसलिए कार्यवाही कर रहे हैं।
यह सब सोच विचार ,मंथन के बाद कार्यवाही हो रही है।
नहीं तो पहले दिन तो चंदा का हिसाब मागने की ऑथोरिटी पूँछ रहे थे ।
India’s greatest export is not software or IT services or textiles or pharmaceuticals. It is ambition under constraint.
The educated white collar Indian who leaves for America, Canada, the UK, Singapore, Australia or Dubai is not always more talented than the Indian who stays. He is quite often the same person placed in a system where rules are clearer, public goods work better, institutions are less insulting and competence has more room to compound.
That is what makes the NRI story so revealing.
The same family that was negotiating with babus, brokers, landlords, power cuts, school admissions, relatives and polluted air suddenly becomes disciplined abroad. Taxes are paid. Lanes are followed. Public libraries are used. Parks are respected. Children play outside. The same people who "adjusted" endlessly in India become civic participants elsewhere. They stop stressing about facing off against the intensity of low cunning, low trust behaviour and can focus more intently on innovation and wealth creation.
This should disturb us more than it does.
It means Indians are not naturally chaotic and are not naturally unimaginative. They are often responding rationally to chaos, bureaucracy and a dysfunctional environment. Put them in a high-trust system and many behave like high-trust citizens. Put them in a low-trust system and they become defensive, extractive and suspicious.
Culture matters, but systems train culture every day.
The tragedy is that India produces millions of people capable of flourishing in better institutional environments, then treats their exit as either betrayal of the nation or false pride. It is neither. It is simply market feedback about a society which did not allow them to grow.
जिम्मेदार सो रहे थे,वो मंदिर लूट रहे थे..
श्री राम मंदिर में लगी 14 दानपेटियों में आने वाले चढ़ावे की चोरी को रोकने की जिम्मेदारी इन महाविधर्मियों पर थी।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय,ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव के नाम सबसे ज्यादा लिए जा रहे हैं।
चंपत राय मेन हैं.अयोध्या के कारसेवकपुरम में रहते हैं।मंदिर संचालन के लिए 15 सदस्यीय ट्रस्ट बना है। लेकिन, मंदिर परिसर की व्यवस्था संभालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी चंपत राय की मानी जाती है।
कुछ दिन पहले चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में एक नया कर्मचारी शामिल हुआ था। 7 जून, 2026 को उसने नोटों की एक गड्डी छिपा ली। उसकी यह हरकत CCTV में रिकॉर्ड हो गई।
हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने पर चंपत राय ने बाकी ट्रस्टियों को इसकी जानकारी नहीं दी। हेरा-फेरी की जानकारी होने के बावजूद पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई।
चढ़ावा चोरी मामले का मुख्य आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव बताया जा रहा है। टिन्नू कभी चंपत राय का ड्राइवर हुआ करता था आज करोड़पति है।वर्तमान में टिन्नू चंपत राय के बहुत करीबी लोगों में शामिल हैं।मंदिर परिसर की कई व्यवस्थाएं चंपत के कहने पर वही देखता हैं।
चंपत राय ने 12 जून को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी। कहां- ट्रस्ट समय-समय पर चढ़ावे की राशि को ऑडिट कराता है। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है।
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