जैन धर्म और शास्त्रविरुद्ध भक्ति: क्या जैन धर्म सही मार्ग पर है?
अहिंसा और तपस्या: जैन धर्म के सिद्धांत या भ्रांतियां?
जैन धर्म: एक आध्यात्मिक यात्रा या शास्त्रविरुद्ध आचरण?
#SundaySpecial
@rssurjewala संत रामपाल जी महाराज जी का
ज्ञान समझाने के बाद उपदेश प्राप्त करते ही हर प्रकार का नशा छूट जाता है।
आज संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लेकर लाखों अनुयायी नशा छोड़ चुके हैं।
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Book Title - Hindu Religion is Great
Author - Sant Rampal Ji Maharaj
Language - English Read Hindu Dharm Mahaan in Hindi
Publisher - Satlok Ashram, Barwala, Hisar
Genre - Spiritual, Tatvagyan
Subject - Bhagavad Gita, Hinduism
Download - https://t.co/ZN1Ra6L2UI
🙏 सर्व प्रथम इसे पढ़ें 🙏
विश्व में जितने धर्म (पंथ) प्रचलित हैं, उनमें सनातन धर्म (सनातन पंथ जिसे आदि शंकराचार्य के बाद उनके द्वारा बताई साधना करन�� वालों के जन-समूह को हिन्दू कहा जाने लगा तथा सनातन पंथ को हिन्दू धर्म के नाम से जाना जाने लगा, यह हिन्दू धर्म) सबसे पुरातन ��ै।
इस धर्म की रीढ़ पवित्र चारों वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद) तथा पवित्र श्रीमद्भगवद गीता है। प्रारंभ में केवल चार वेदों के आधार से विश्व का मानव धर्म-कर्म किया करता था। ये चारों वेद प्रभुदत्त (God Given) हैं। इन्हीं का सार श्रीमद्भगवद गीता है। इसलिए यह शास्त्र भी प्रभुदत्त (God Given) हुआ।
शास्त्रविधि अनुसार साधना करनी चाहिए
ध्यान देने योग्य है कि जो ज्ञान स्वयं परमात्मा ने बताया है, वह ज्ञान पूर्ण सत्य होता है। इसलिए ये दोनों शास्त्र (वेद तथा श्रीमद्भगवद गीता) निःसंदेह विश्वसनीय हैं। प्रत्येक मानव को इनके अंदर बताई साधना करनी चाहिए। वह साधना शास्त्रविधि अनुसार कही जाती है। इन शास्त्रों में जो साधना नहीं करने को कहा है, उसे जो करता है तो वह शास्त्रविधि त्यागकर मनमाना आचरण कर रहा है जिसके विषय में गीता अध्याय 16 श्लोक 23-24 में ��स प्रकार कहा हैः-
गीता अध्याय 16 श्लोक नं. 24:- इससे तेरे लिए इस कर्तव्य यानि जो भक्ति कर्म करने योग्य हैं और अकर्तव्य यानि जो भक्ति कर्म न करने योग्य हैं, इस व्यवस्था में शास्त्र ही प्रमाण हैं। ऐसा जानकर तू शास्त्रविधि से नियत कर्म यानि जो शास्त्रों में करने को कहा है, वो भक्ति कर्म ही करने योग्य हैं। (गीता अध्याय 16 श्लोक 24)
हिन्दू भाईजान! पढ़ें फोटोकाॅपी श्रीमद्भगवत गीता पदच्छेद, अन्वय के अध्या�� 16 श्लोक 23-24 की प्रमाण के लिए जो गीता प्रैस गोरखपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित है तथा श्री जयदयाल गोयन्दका जी द्वारा अनुवादित है:-
अधिक जानकारी के लिए पुस्तक डाउनलोड करे, पढ़े-समझे और संत रामपाल जी महाराज के सत्संग देखे रोजाना शाम 07:30 बजे साधना चैनल पर। 🙏
#GodMorningThursday #thursdayvibes
बाख़बर का संदेश!
यदि हलाल करने का शौक है तो अपने काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि बुराइयों को हलाल कर, खत्म कर। अल्लाह के लिए समर्पण भाव से सत्य भक्ति कर, यही वास्तव में कुर्बानी है।
#AlKabir_Islamic#SaintRampalJi