बड़े प्लेयर पर बड़े मैच में होने वाले तनाव की कल्पना भी नहीं कर सकते है।
वो भी 1 गोल से पिछड़ने और एक पेनल्टी मिस करने के बाद।
#Messi#Fifa2026#Arg_Vs_Egv
इथनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियां हाँफ रही है…कई जगह खड़ी हो रही है…अगर आप इस समस्या से निजात चाहे तो पेट्रोल भरवाये इथनॉल मुक्त जिसकी कीमत है मात्र 167.35₹ प्रति लीटर।
बाक़ी इथनॉल मंत्री जी की जय क्योंकि ना तो उनको इथनॉल मिश्रित तेल भरवाना है ना कहीं उनकी गाड़ियों का टोल लगना है।
फोकट क्लास तो आम जनता है…गाड़ी के तब रोड़ टैक्स दे फिर सड़क पर चलने का टोल टैक्स दे…गाड़ी खड़ी करने का पार्किंग दे…इथनॉल मिक्स तेल भरवाये और हल्की गलती पर चालान भी दे।
वाह गडकरी जी वाह अद्भुत शानदार जिंदाबाद
ये देश के पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण जी हैं। इन्होंने राम मंदिर में एक सोने से बनी रामचरितमानस दान की थी। कह रहे हैं कि वह गायब हो चुकी है।
ये अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। इनकी मां ने करीब 15 साल तक वैधव्य का जीवन जिया। उन्होंने अपने सारे गहने अपनी बहू को दे दिए। जब वे नहीं रहीं तो इन्होंने सोचा कि उनके गहने हम राम के चरणों में न्योछावर कर देंगे। इन्होंने अपनी मां के गहने और कुछ और पैसे लगाकर सोने की रामचरितमानस बनवाकर दान की। इनको कोई रसीद नहीं दी गई। फिर इनको एक दिन बताया गया कि आपका रामचिरतमानस अब गायब हो गया है।
ये कई बार अयोध्या गए। घंटों-घंटों इंतजार करके चंपत राय से मिले और शिकायत की। चंपत बोले कि क्या मैं यही करता रहूं? इन्होंने कहा कि आपने तो कहा था कि आप इसे रखवाएंगे, फिर अब क्यों हटवा दी? चंपत बोले कि जो मैं कहूंगा वही होगा। जाओ, जो करना है करो। इन्होंने बहुत पत्र लिखे, बहुत कोशिश की, बहुत अधिकारियों से गुहार की, लेकिन गायब रामचरितमानस आजतक नहीं मिली। अब ये जानना चाहते हैं कि आखिर वह रामचरितमानस गया कहां? इन्होंने लूट कांड की जांच कर रही SIT को भी चिट्ठी लिखी है।
सोचिए, राममंदिर में बैठाए गए चोरों ने ऐसी कितनी आस्थाओं पर डाका डाला है?
यदि आपको एथनॉल वाला पेट्रोल नहीं डलवाना है तो आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है, और वो है 170 ₹ प्रति लीटर वाला पेट्रोल।
इंजन “दबंग” रहेगा और “वाहन” फर्राटा भरेगा। जोरदार पिकअप के मज़े के साथ शानदार सवारी होगी।
कोई लोक कल्याणकारी सरकार इससे ज़्यादा आपको क्या दे सकती है?
#Ethanol #petrol
@Balkrishan0911@MukeshPathakji पिछले 14 साल से बहुमत की सरकार है, और कितने दिन सत्ता की कमियों को छुपाने के लिए कुतर्क करते रहेंगे मित्र?
नहीं संभलता तो छोड़ दीजिए,
ये मुँह छुपाने से काम न चलेगा।
आज जैसे फूल होंगे वैसा ही शहद होगा, समझें