@Hindi_panktiyan बदलाव की हवाएं
चलती हैं अनवरत,
सतत प्रतिपल सर्वदा
पनपती है नई सोच,
नवांकुर फूटता बढ़ता है,
नवजीवन प्रफुल्लित होता है।
अंगुल-अंगुल बढ़ता पौधा
पुष्पित पल्लवित होता है।
कण-कण से बनता है पर्वत,
पर्वत कण-कण हो जाता है।
बदलाव की हवाएं यूँ चलती हैं,
नव स्वर हिय में उठ जाता है।
~भारती
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@amarujalakavya बहोतों की दी खुशियाँ
बहोतों को ग़��
जाते जाते देते जाना
बस अपनों का अपनापन।
इक्कीस तुम ख़ास थे
और रहोगे हमेशा ख़ास
तुमने कराया है हमें
हमारे अपनों का एहसास।
उन्नीस था प्यारा
जद्दोजहद भरा बीस
बाईस हो बेहतरीन
अलविदा इक्कीस!
-भारती
@Hindinama2 दिन ढलते ही
हो जाती हूँ
तेरी यादों की गिरफ़्त में,
और फिर बंद आँखों से
चलती रहती है गुफ्तगू।
बस यूँ ही तेरे होने का
हर पल एहसास है।
ये साँझ,ये गिरफ़्त और ये गुफ्तगू।
ये सब कुछ बेहद ख़ास है।