@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@RajCMO@DIPRRajasthan@RajGovOfficial
निजी लैब की मनमानी चरम पर
या तो सरकार को आर्थिक चूना लगाने की, चांदी कूटने की अधिकारी परमिशन दे
नहीं तो लैब बंद
सरकार के पास शुरू से साधन संसाधान सब है फिर प्रदेश की जनता के जांचों की गुणवत्ता से खिलवाड़ ?
@BhajanlalBjp@cmo@akhilarora93@svoruganti1466
LT समय पर रिपोर्ट न दे तो एक्शन
लेकिन आलाअधिकारी कार्मिकों की फाइल ही अटका के बैठ जाये तो?
GP में राज. के #लैबटेक दूसरे राज्यों से पिछड़े हुए
DPC,पदस्थापन तो मैराथनी रेस बनचुके
मागो पर लेग ब्रेक, हैंड ब्रेक दोनों खींच रखे हैं
समाधान नहीं
@cmo@akhilarora93@svoruganti1466
LT समय पर रिपोर्ट न दे तो एक्शन
लेकिन आला अधिकारी कार्मिकों की फाइल ही अटका के बैठ जाये तो?
GP में राज. के LT दूसरे राज्यों से पिछड़े हुए
DPC, पदस्थापन तो मैराथनी रेस बन चुके
मागो पर लेग ब्रेक हैंड ब्रेक दोनों खींच रखे हैं
समाधान नहीं
@Jitendr10505882@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan जितना पैसा निजीकरण में सरकार ने बर्बाद किया है इससे अच्छा तो सरकार हर chc phc DH SDH में खुद equipment लगवाती और मैन पावर बढ़ाती तो बात ही कुछ और होती। ना जनता को परेशान होना पड़ता और गलत रिपोर्ट जाती।
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
सरकारी क्षेत्र जांचों का निजीकरण
बिना सैंपल के जांच रिपोर्ट देना
खांसी की जांच में अविवाहिता को प्रेगनेंसी रिपोर्ट पकड़ना
हेपेटाइटिस सी (लिवर कैंसर संभावना) नेगेटिव मरीज को पॉजिटिव बताना
इन सब के ऊपर विभाग की चुप्पी समझ से परे
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी,आपका ध्यान राजस्थान राज्य की अत्यंत चिंताजनक एवं बदहाल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। वर्तमान में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग “वेंटिलेटर” पर है, जहाँ आम जनता को बुनियादी उपचार भी समुचित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के बजाय अपने निजी व्यवसायों को बढ़ाने में अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, एक निजी डायग्नॉस्टिक कंपनी को सरकारी अस्पतालों में लैब जांच का कार्य सौंपा गया है, जो कथित रूप से स्वास्थ्य मंत्री के करीबी व्यक्ति से जुड़ी हुई है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में निजी लैब द्वारा की जा रही कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं ,बिना सैंपल जांच किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं,स्वस्थ व्यक्तियों को थायराइड एवं कैंसर जैसे गंभीर रोगों से ग्रसित बताया जा रहा है और इन घटनाओं से संबंधित समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है, जो आपराधिक श्रेणी में आता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से यह प्रश्न है कि इस निजी लैब को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? गलत रिपोर्टों के कारण जिन मरीजों के जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह मामला केवल जांच का नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही का है, और राजस्थान की जनता शासन से जवाब मांग रही है। जिस स्वास्थ्य मंत्री से पूरा राजस्थान अपेक्षा रखता है,उनके खुद के गृह जिले नागौर की स्वास्थ्य सेवाएँ भी अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं,चिकित्सकों की कमी, खराब एवं बंद मशीनें तथा व्यापक अव्यवस्थाएँ यह दर्शाती हैं कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत कमजोर है। सरकारी अस्पतालों के हालत देखते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि राजस्थान को ऐसे नाकारा और गैर जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की कोई जरूरत नहीं है जिन्हें अपने महकमे में धरातल से जुड़ी कोई जानकारी तक नहीं है | प्रधानमंत्री जी को इस स्थिति पर त्वरित संज्ञान लेकर एक कड़ा संदेश गैर - जिम्मेदार मंत्रियों को देना चाहिए ताकि राजस्थान में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण महकमे का जिम्मा संभाल रहे व्यक्ति को कड़ा सबक मिले और जनता को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकें | सरकार द्वारा लैब से जुड़ा कार्य निजी कंपनी को देने से वर्षों से अल्प वेतन पर कार्य कर रहे संविदा कार्मिकों / प्लेसमेंट कार्मिकों की आजीविका पर भी संकट आ गया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को पुनः कहना चाहता हूं कि आपको विगत दस दिनो में राज्य के विभिन्न जिलों में प्राइवेट लैब को जांचों का कार्य देने से क्या स्थिति बनी ? उसकी उच्च स्तरीय समीक्षा करनी चाहिए क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अपनी जवाबदेही के प्रति लापरवाह है और उन्हें इस महकमे से जुड़ी धरातल की कोई जानकारी भी नहीं है |
@PMOIndia@RajCMO
राजस्थान के स्वास्थ्य संस्थानों में लैब की जांच से जुड़े कार्यों को हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को देने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण व जनविरोधी है | यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगा बल्कि मरीजों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए गंभीर संकट खड़ा करेगा | निजी कम्पनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए ऐसे निर्णय से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, इंटर्न, नर्सिंग स्टूडेंट्स और पैरामेडिकल स्टाफ की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर सीधा असर पड़ेगा,मरीजों को जांच और इलाज के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा वहीं इमरजेंसी सेवाओं में देरी जानलेवा साबित हो सकती है साथ ही बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने की मजबूरी से आम जनता की तकलीफ बढ़ेगी। उदाहरण के तौर पर बताऊं तो थैलेसीमिया जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को समय पर जांच और उपचार नहीं मिल पाएगा वहीं वर्षों से अल्प वेतन पर संविदा पर जो लोग कार्य कर रहे थे उन्हें उम्मीद थी कि कभी न कभी सरकार उनके साथ न्याय करेगी और वर्षों की मेहनत का उन्हें सकारात्मक फल मिलेगा मगर सरकार के ऐसे तुगलकी फरमान ने पहले से संविदा पर लगे कार्मिकों के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को कहना चाहता हूं कि ऐसे निर्णय की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा करके हब एंड मॉडल के तहत निजी कम्पनियों को दिए गए कार्य पर रोक लगाए | चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे महत्वपूर्ण कार्य में निजीकरण को बढ़ावा देना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शुभ संकेत नहीं है |
@RajCMO
@hanumanbeniwal@RajCMO@RajGovOfficial
जनता को खून की मिल रही फर्जी जांच, ही सबसे बड़ा जांच का विषय है
खांसी की जांच में=प्रेग्नेंसी रिपोर्ट
बिना सैंपल के ही जांच रिपोर्ट
योग्य को घर भेजकर, अयोग्य को मौका
यही है हब एंड स्पोक मॉडल
📍लैब टेक्नीशियन संवर्ग के हितों पर कुठाराघात
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan@DainikBhaskar
कृष्णा लैब, कारनामे जारी....
TB और प्रेग्नेंसी दोनों जांच अलग हैं
डॉ, ने प्रेगनेंसी टेस्ट ही नहीं लिखा
बिल के लिए फर्जी जांच कर दी
एक अविवाहित को पॉजिटिव दे दिया
उस परिवार की ओर उस लड़की की हालत क्या रही होगी?
@1stIndiaNews@DainikBhaskar@svoruganti1466@akhilarora93@RajCMO
अब तक सुनते थे की संविदा को परमानेंट करेंगे
पहली बार चिकित्सा विभाग का आदेश है कि परमानेंट को हटाकर संविदा पर लगाएंगे
पहले जांचों का निजीकरण
जांचों की गुणवत्ता?
अब परमानेंट पद खत्म
संविदा को ही परमानेंट?
@BhajanlalBjp@RajCMO@GajendraKhimsar
MD NHM के आदेश में लिखा कि विषय विशेषज्ञ जांच लिखें ..
क्या PHC पर जो जांचे लिखी जा रही है उनके विषय विशेषज्ञ है?
दूसरी तरफ ऊपर से दबाव बनाया जाता है कि आप इन जांचों को शुरू कराए
सरकारी सेक्टर को सरकार,अधिकारी कमजोर करें
फिर निजीकरण ?
@BhajanlalBjp@KumariDiya@RajCMO@GajendraKhimsar
दशकों पुरानी GP 4200 की मांग पूरी हो
पदनाम का कैबिनेट अप्रूवल
स्टाफिंग पैटर्न
राज. एक सुखा प्रदेश है
जांचों का निजीकरण युवाओं के सपनों से, खिलवाड़ है- बंद हो
गुणवत्ता प्रभावित होगी
मेरिट + बोनस आधारित सीधी भर्ती हो
@BhajanlalBjp@GajendraKhimsar@cmo
युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
युवाओं के हित में - जनहित में - राज्य हित में जांचों के निजीकरण को वापस लो
LT की ग्रेड पे4200
पदनाम का कैबिनेट अप्रूवल
पैरामेडिकल की सीधी भर्ती (मेरिट प्लस बोनस)
स्टॉपिंग पैटर्न जैसी मांगे पूरी हो
@BhajanlalBjp@cmo@GajendraKhimsar@KumariDiya
जांचों का निजीकरण न तो जनता के हित में है
न सरकार के हित में
न लैब टेक्नीशियन संवर्ग के हित में
न ही बेरोजगार युवाओं के हित में
अन्य राज्यों में यह मॉडल असफल रहा है
पदनाम दो साल से कैबिनेट अनुमोदन के इंतजार में
ग्रेड पे पीछे