🚨 यह बैंक का सर्कुलर नहीं है बल्कि बैंकर्स को उनकी औकात बताये जाने का नमुना भी है!
उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक (#UPGB) क्षेत्रीय कार्यालय गोंडा का यह आदेश एक खतरनाक मिसाल है और “Privilege System” के नाम पर साफ संदेश दिया गया है:
👉 अब छुट्टी भी प्रदर्शन (Performance) पर निर्भर होगी
👉 मानव गरिमा को टारगेट से जोड़ा जाएगा
👉 जो टारगेट पूरा नहीं करेगा, उस पर निगरानी, दबाव और नियंत्रण बढ़ेगा
ज़रा सोचिए… छुट्टी कब से “इनाम” बन गई?
और प्रशासनिक अधिकार कब से “दबाव बनाने का हथियार” बन गए?
इस सर्कुलर ने बैंकर्स को दो वर्गों में बाँट कर उनके अंदर डर भरके उनकी औकात दिखाने की कोशिश की है:
“Performing” → जिन पर थोड़ा रहम किया जायेगा जिन्हे साँस लेने का मौका दिया जायेगा!
“Non-Performing” → जिनको बेइज्जत किया जायेगा जिनकी छुट्टियों और जीने पर भी पाबंदी रहेगी!
क्या यह बैंकिंग है या कार्यस्थल पर भेदभाव का नया मॉडल? सबसे बड़ा सवाल:
→ किस नियम के तहत Regional Manager यह तय करेगा कि कर्मचारी छुट्टी ले सकता है या नहीं?
→कौन सा श्रम कानून यह कहता है कि टारगेट पूरा न करने पर बुनियादी अधिकार छीन लिए जाएं?
क्या मोटिवेशन है?
क्या यह परफॉर्मेंस मैनेजमेंट है?
क्या यह साफ-साफ शोषण की नीति नही है जिसे “सिस्टम” का नाम दिया गया है?
आज: छुट्टी कंट्रोल होगी…
कल: सैलरी कंट्रोल होगी…
फिर: ट्रांसफर हथियार बनेंगे…
और पूरा करियर डर के आधार पर चलाया जाएगा…
और अब सबसे बड़ा सवाल - यूनियन कहाँ हैं?
वही यूनियन जो कभी शाखाओं पर ताले लगाकर कर्मचारियों के अधिकारों के लिए खड़ी होती थीं, आज पूरी तरह खामोश क्यों हैं?
क्या अब वे सिर्फ दर्शक बनकर रह गई हैं?
क्या प्रबंधन के दबाव के सामने खड़े होने का साहस खत्म हो चुका है?
अगर आज भी यूनियन इसका विरोध करके इस सर्कुलर को वापस नहीं करा पाती तो UPGB वालो समझ लेना चाहिए कि अब यूनियन प्रबन्धन की गोद मे जाकर बैठ चुकी है और उनके नेता दलाल और हि-जड़े बन चुके है।
यदि आज इसके खिलाफ पूरी मजबूती से आवाज़ नहीं उठी तो यह सिर्फ एक सर्कुलर नहीं रहेगा बल्कि
यह पूरे सिस्टम में कर्मचारियों के अधिकारों को खत्म करने की शुरुआत बन जाएगा।
बैंक कर्मचारी मशीन नहीं हैं। वे सिर्फ टारगेट नहीं हैं।
वे अधिकारों और सम्मान के साथ काम करने वाले इंसान हैं।
इस सर्कुलर को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए सबसे ऊपर तक।
#Bankersvoice