ऊर्जावान बनने से पूर्व विचारवान होना पड़ता है।यही दर्शन को यथार्थ से जोड़कर व्यक्ति को मौलिक बनाता है .श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी इसी के ज्वलंत प्रतीक थे । सार्वजनिक जीवन में विशेषकर दलीय व्यवस्था में उनका व्यक्तित्व सनातन शिक्षक ��ी तरह है ।उनका नमन.LongLive -Vajpayee