चले अकेले मंजिल मिलती,भीड़ बाद जुट जानी है ।
मिले हौसिला अच्छा सच्चा,फिर पहचान सुहानी है ।।
निडर रहे बिन आलस बढते,नहीं थकावट आनी है ।
कर्म कुशलता जीवन परहित,बनती नयी कहानी है ।।
महापुरुष जितने भी दुनिया सबका काम अकेला था ।
सच्चाई जब दिखी सभी को साथ मिले फिर मेला था ।।
अमर हुए दुनिया में वो ही जिसने परहित काम किया ।
भुला दिये सब उसको जिसने कपट ढोंग ईनाम दिया ।।