यह जम्मू कश्मीर के डोडा मेडिकल कॉलेज का दृश्य है
जहां इन्हें हिजाब उतरा कर कॉलेज में प्रवेश करने के लिए कहा गया था तो यह मोहतरमा विक्टिम कार्ड खेलने लगी
पहले हिंदुओं में भी घूंघट की प्रथा थी लेकिन शिक्षा और रोजगार के लिए उन्होंने भी परिवर्तन किया
कल को पुलिस में भी भर्ती होने के बाद कहेंगी कि हम ड्रेस की जगह नकाब पहन के जाएंगी ड्यूटी
नाम — कैप्टन स्मित मच्छर
वर्ग — सवर्ण
जाति — खत्री
कार्य — बहादुरी से देश को गौरवान्वित किया
गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान व पंजाब प्रदेशों में खत्री/अरोड़ा समुदाय मच्छर/मच्छार सरनेम लिखते हैं व स्वयं को क्षत्रिय बताते हैं,
विशेषज्ञ डॉ विद्युत जोशी भी मच्छार को ब्रम्हक्षत्रिय बताते हैं |
गरीब होना अभिशाप है, गरीब उन्मूलन के नाम पर जो हकदार हैं वो बेचारे कुछ नहीं पा रहे हैं जिनके यहां सब भरा है उन्हें और मिलता जा रहा है।
मुझे ठाकुरों के ऊपर गर्व है, जहां सब संसाधन से लैस सरकार अपाहिज साबित हो जाती है वहां भी हर समाज के लिए क्षत्रिय आपको सीना तानकर खड़ा मिलेगा।
“म्हारे डाडे श्रीकृष्ण री जन्मभूमि ही जेल है, तो आप लोगां खातर जेल जावणो पड़ियो, तो चिंता री बात नी है…”
सरलीकरण की यह मुहिम किसी एक व्यक्ति की नहीं, हम सबकी सांझी मुहिम है। यह हर उस हकदार की आवाज है, जो छोटी-छोटी विसंगतियों के कारण अपने अधिकार से वंचित हो रहा है। अब समय है कि हम सब एकजुट होकर इस आवाज को मजबूत करें और हकदारों तक उनका हक पहुंचाने के लिए पूरी मजबूती से आगे बढ़ें।
#सरलीकरण
1-SC/ST/OBC की तरह EWS के खाली पदों को सुरक्षित कर आगे विशेष भर्ती में बैकलॉग में Carry Forward के रूप आगे ले जाया जाए !
2-EWS वर्ग का प्रमाण पत्र अन्य आरक्षित वर्गों की तरह स्वयं के आय और घोषणा पत्र के आधार पर दिया जाए!
#ews#reservation#carry#forward#justice
जिन्होंने अलग देश मांगा , अलग देश के पक्ष में जिन्होंने बोटिंग की आखिर बंटवारे के बाद वो यहां क्या कर रहे है..?
सुनिये राजा भैय्या से वो सत्य जो नई पीढ़ी नहीं जानती👇
मैं जाटव हूँ, मेरी बेटी एक मुल्ला ले गया।
हमारी बेटी को एक मुल्ला ले गया है।
मेरी बेटी की उम्र 17 साल है। हमने थाना गाँधीनगर में FIR दर्ज कराई है।
हम कमजोर बिरादरी जाटव समाज से हैं। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
हमारी 17 साल की बेटी को वापस लाने में हमारी सहायता कीजिए।
2.65 लाख डॉक्टरों में से आधे न्यूनतम अंक (36%) नहीं ला सके। GC/EWS का कटऑफ 262 रहा। 256 को शून्य, अंतिम रैंक में इम्प्रूवमेंट रही। अब अंतिम रैंक पाने वाला -40 की जगह -19 पर आ चुका है। @narendramodi को नमन कीजिए क्योंकि उन्हीं की कृपा से यह सब संभव हो पा रहा है। दलीत-पीड़ीत डॉक्टर बन रहा है।
अकल्पनीय... रात्रि 02 बजे... जोधपुर...
यह जो जनसैलाब उमड़ा हैं तो इतनी देर रात तक... यह अपने आप में बहुत कुछ बयां कर रहा हैं...
यह वही जगह हैं जहां भाटी ने निर्दलीय छात्रसंघ अध्यक्ष हेतु यह कहकर ताल ठोकी थी...
"राजपूत हां... म्है कोई इयै पद या पार्टी रा गुलाम कोनी..."
'छपरी' टिकटॉकर फ़ैज़ू खान अब तान्या से शादी कर रहा है।
ये सब हिंदू महिलाओं से ही शादी क्यों करते हैं?
बस 2 दिन पहले ही असम की लड़की निमिषा ठाकुरिया की जान चली गई।
अब तो यह एक पैटर्न जैसा लगता है।
हाई-प्रोफाइल इस्लामी लोग हिंदू लड़कियों को फंसाकर 'लव जिहाद' (LJ) को बहुत आम बना रहे हैं।
हिंदू लड़कियां कब जागेंगी?
प्रताप सिंह जी चुण्डावत वन विभाग के बहादुर अधिकारी थे
वन भूमि तो बचाने के इन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी।
हम इस बहादुरी सलाम करते है रेंजर साहब।
हम जानते है कि वन विभाग के पास संसाधन ही नहीं हैं ना पर्याप्त कर्मचारी हैं और ना संसाधन
फिर भी आप जैसे जाँबाज़ अफसर हमारे वन्यजीवों ओर जंगलों की रक्षा करते है।
हमारे मित्र भैराराम जी ने हमारी ओर से भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए।आप हमेशा याद किए जाएँगे एक शहीद के रूप में
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश में महज 19 साल के एक युवक की आत्महत्या की खबर दिल दहला देने वाली है। परिवार का आरोप है कि SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह भारी मानसिक तनाव में था।
एक 19 साल का नौजवान, जिसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी, आज इस दुनिया में नहीं है। परिवार उजड़ गया, सपने बिखर गए। अब परिवार मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है।
आखिर कब तक काले कानून के नाम पर किसी निर्दोष को मानसिक प्रताड़ना और असहनीय दबाव झेलना पड़ेगा?
कानून का उद्देश्य न्याय देना है, किसी की जिंदगी छीनने की नौबत पैदा करना नहीं। यदि किसी कानून या उसके कथित दुरुपयोग के कारण निर्दोष लोगों पर ऐसा दबाव बन रहा है, तो उसकी समीक्षा और जवाबदेही अनिवार्य है।
कानून सबके लिए समान होना चाहिए। एक तरफा नहीं l आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और किसी निर्दोष की जिंदगी कानून की प्रक्रिया में बर्बाद न हो। पक्षपाती न्याय के नाम पर किसी परिवार का चिराग बुझ जाना, व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल है।