मुस्लिम युवक का खुलासा, अखिलेश यादव की सरकार में 2013 मुजफ्फरनगर दंगे हुए। CM रहते दंगे नहीं रुके। अखिलेश सैफई में नंगा नाच देख रहे थे और मुजफ्फरनगर में मुसलमान मारे जा रहे थे। मुस्लिम समाज अब जाग चुका है। अखिलेश यादव का वोट बैंक बंधुआ मजदूर नहीं है। ऐसे लोगों को वोट देना खतरे से खाली नहीं।👇
@AnilYadavmedia1@yadavakhilesh अनिल यादव जैसे पेड पत्रकारों के लिए अयोध्या का भव्य विकास सिर्फ पेट दर्द का कारण है। जिन्हें दशकों तक रामलला को टेंट में रखकर खुशी मिलती थी आज उन्हें अयोध्या की चमक और रामभक्तों का उत्साह बर्दाश्त नहीं हो रहा।
समाजवादी पार्टी की गोद में बैठकर पत्रकारिता करने वालों की औकात ही क्या है जो वे राष्ट्र के स्वाभिमान पर सवाल उठाएं । तुम्हारी ये लतखोरी और कुंठा हमें और मजबूत करती है क्योंकि हम जानते हैं कि जिस चीज से तुम्हें तकलीफ हो रही है वही देश के लिए सबसे बेहतर है। अपनी ये नफरत की राजनीति कहीं और ले जाओ क्योंकि अब अयोध्या और भारत, तुम जैसे एजेंडाजीवियों के प्रोपेगेंडा से नहीं रुकने वाला। जय श्री राम🚩
@nishikant_dubey बिल्कुल सही इतिहास को झुठलाया जा सकता है मिटाया नहीं। 1990 में जो हुआ वह देश की जनता की आंखों के सामने है। निशिकांत दुबे जी ने वही सच याद दिलाया है जिसे दबाने की कोशिश दशकों से की जा रही थी।
हद है राजनीति की अपराध किसी भी पार्टी का हो, वह निंदनीय है लेकिन अखिलेश जी आप केवल भाजपा को कोसने के लिए ऐसे मामलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जब आपकी सरकार थी तब महिलाओं की सुरक्षा का क्या हाल था यह कोई भूला नहीं है। आज भाजपा शासन में अपराधी जेल में हैं अपनी गिरेबान में झांकिए फिर दूसरे पर उंगली उठाइये।
अखिलेश जी 10 मिनट का अल्टीमेटम क्या आपको लगता है कि आप अभी भी मुख्यमंत्री हैं? यह सोशल मीडिया है यहाँ सच का सामना करने का साहस होना चाहिए न कि नामजद रिपोर्ट की धमकियां देने का। जिसे आप फर्जी' कह रहे हैं वह सच जनता के सामने है। अगर डर इतना है तो मैदान में आकर बहस कीजिए कानून का डर दिखाकर आवाज़ दबाने की कोशिश मत कीजिये।
अखिलेश जी साइकिल का चुनाव चिन्ह तो आपका है तो क्या आप खुद को ही भाजपा का सहयोगी मानकर डर रहे हैं? जिसे आप कठपुतली कह रहे हैं, वो भाजपा का वो नेतृत्व है जो ज़मीन से जुड़कर जनता की सेवा करता है। रही बात खंजर की तो इतिहास गवाह है कि अपनों को धोखा देकर चाचाओं और बड़ों का अपमान करके राजनीति किसने की है? आईना देखिये अपनी साख खुद ही बचाइए।
शिक्षादान और प्रतिभा का सम्मान? अखिलेश जी आपकी परिभाषा में प्रतिभा का अर्थ सिर्फ परिवार के वफादार और जाति विशेष के करीबी ही होते थे। आपकी सरकार में प्रतिभा को प्रोत्साहन नहीं बल्कि भर्ती में पर्ची और पदों की नीलामी मिलती थी। भाजपा ने पारदर्शी भर्तियाँ कराकर उन गरीब परिवारों की प्रतिभा का सम्मान किया है जिन्हें आप जैसे लोग सिर्फ वोट बैंक समझते रहे।
अखिलेश जी मेट्रो की गति पर सवाल उठाने से पहले अपनी सरकार की स्पीड याद कर लीजिए। आपने मेट्रो तो शुरू की लेकिन उसे विरासत के नाम पर अधर में लटका दिया। भाजपा ने तो न केवल उस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया बल्कि लखनऊ के चप्पे-चप्पे को कनेक्टिविटी से जोड़ दिया। आपकी मेट्रो तो सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित थी भाजपा की मेट्रो अब जनता की रफ्तार बन चुकी है।
अखिलेश जी उद्घाटन करना और काम पूरा करना, इन दोनों में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है।आपकी सरकार में तो फीता कटने से पहले ही प्रोजेक्ट दीमक खा जाते थे। भाजपा सरकार ने तो सिर्फ उद्घाटन नहीं किया बल्कि आपकी अधूरी और भ्रष्टाचार वाली फाइलों को संवारा है। आप जिसे अपना काम कहते हैं उसे जनता कमीशन का स्मारक कहती है उद्घाटन तो बस उन खंडहरों को सुधारने का होता है।
वाह अमूल और पराग के प्लांट के नाम पर खुद की पीठ थपथपाना और जेपीएनआईसी पर रोना क्या यही आपकी राजनीति बची है? सच तो ये है कि आपने जो कुछ भी शुरू किया उसमें भ्रष्टाचार का दीमक लगा हुआ था। भाजपा सरकार ने तो उन अधूरी योजनाओं को भी पूरा किया जो आपकी फाइलों में दफन हो चुकी थीं। आप सिर्फ फीता काटने में व्यस्त रहे हमने उस प्रोजेक्ट्स को जनता की सेवा में समर्पित किया है।
अखिलेश जी भाजपा का रास्ता क्या था यह तो जनता ने तय कर दिया है लेकिन आप तो खुद का रास्ता ही भूल गए हैं।कभी कांग्रेस की गोद में बैठते हैं कभी किसी और के साथ और अब भाजपा को समाजवाद का पाठ पढ़ा रहे हैं? सच तो ये है कि आपका समाजवाद सिर्फ परिवारवाद तक सीमित है और भाजपा का राष्ट्रवाद देश की प्रगति का आधार है। अपनी पार्टी का सेक्युलर चरित्र संभालने में ध्यान लगाइए भाजपा तो देश को आगे ले जाने के लिए ही बनी थी।
अखिलेश जी जनेश्वर मिश्र पार्क इतना बड़ा था कि उसमें आपकी पूरी सरकार की विफलताएं छिप गई थीं। पार्क की भव्यता से ज्यादा मायने ये रखता है कि उसे बनाने में इस्तेमाल हुआ कमीशन कहाँ गया? पार्क तो आपने बना दिया पर उस पर जनता के टैक्स का जो भारी-भरकम बोझ डाला उसका हिसाब आज तक कोई नहीं दे पाया। दिखावे के पार्क से पेट नहीं भरता जनता को विकास चाहिए जो आज धरातल पर दिख रहा है।