@MechanicalJaba1@drmjabalpur@rpfwcrjbp महोदय जी यात्रियो के द्वारा वीडियो मे बताया जा रहा साथ ही टीसी के द्वारा भी बताया जा रहा साक्ष्य दिए जा रहे कार्यवाही की जगह जीआरपी आरपीएफ के द्वारा शिकायत को देर रात अटेंड करने पर जो पीड़ित हे पीसीएम एवं वेंडर उनको धमकाया जा रहा हे।
महोदय जी निम्न शिकायत को गंभीरता से देखते हुए तुरंत कार्यवाही के निर्देश दिए जाए
उक्त बेडरॉल कर्मचारी के द्वारा शिकायत करने के तुरंत बाद ही फिर से कैटरिंग वेंडर के साथ मारपीट की गई हे। महोदय जी को सूचित करना चाहता हु बेडरॉल कंपनी में नियुक्त लोकल स्टॉफ के द्वारा रेलवे की संपत्ति को आय दिन नुकसान ही नही अपने लोकल स्टेशन आने पर चुराया तक जा रहा हे।
Thank you #BiggBoss and #SalmanKhan sir! 🙏
The show has completely cleared the air regarding Niti's issue. Those who question what one can learn from BB got their answer today. My previous tweet comparing Neha, Nishu, and Niti stands proven true. Humiliating someone to this extent and supporting it is absolutely wrong. Niti showed real guts by apologizing to the entire nation—you are a rockstar! 🌟
The biggest takeaway—wrong is simply wrong, and it cannot be justified by linking it to 'Civil Liberty'! Now politicians, parents, and Gen-Z need to think about this.
#BiggBossSeason #CivilLiberties #MoralValues #Parenting #GenZ
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नीति मुझे पसंद नही हे लेकिन उसका रीजन ये नहीं हे कि इसने कल ओर आज गलत बोला डिस बैटल में गलत स्टार्ट किया लेकिन उसको भी तुरंत बापिस मिला आज काजी ने फर्स्ट में उसके पिता के लिए कैमरे पर बोला जो कि उनका राइट नही हे आप बीबी से बोले अगर में अपना आपा खोकर आपको चाटा मार दूं बदले में आप भी मुझे मार दे तो आप मेरे पिता से शिकायत करने जायेगे क्या ? अगर आप जाने की कोशिश करेंगे तो कुछ तो रिस्पांस मिलेगा आपको भी आपकी फाइट कंटेस्टेंट से हे उसके फादर को क्यों ला रहे हो। उसको रियलिटी चेक नही मिला हे कि वो सिंगर नही हे ये भोजपुरी इंडस्ट्री नही हे ये नेशनल टीवी हे आप नेशनल टीवी पर सिंगिंग में विनर से कंपेयर ही गलत कर रहे हो खुदको बस ये गलती हे मेरे लिए
@digital_newshub यह रियलिटी शो हे इसलिए जस्ट चिल घोलू बेटा उसको बिग बॉस खेलना नही आता हे वो चीज अलग हे लेकिन आपका लॉजिक भी उतना ही गलत हे। यदि आप कैमरे पर कह सकते हो मनोज तिवारी जी आपकी बेटी ऐसी हे तो वो भी कह सकती हे जानता नही मेरा बाप कौन हे गेम खेलो जनता जज करेगी एक दम आसान।
@CJP_for_India प्रधानमंत्री जी ने तो इस्तीफा दिलवा दिया अब देखना हे राष्ट्रपति जी इस्तीफा दिलवाती हे पिछवाड़ा लाल दोस्तो चीटिंग नही चलेगी अगर ये जाते हे तो पिछली बार चीटिंग बहुत की थी तीनों ने बराबर झारखंड वाला माहौल फील करवाना हे अगर ये भागे तो पकड़ के वही पटक लेना सयाना हे बहुत
@CJP_for_India भगवान से प्राथना कर रहा हु जल्द ही कॉकरोज जंतर मंतर पर पहुंचे देखना हे सरकार कैसे हैंडल करती हे परमिशन के साथ या बिना परमिशन के साथ हवा तो इस बार एक की निकलनी हे।
Neha, Nishu, and Niti share almost the exact same standard of language, yet one faces heavy criticism while the other two receive nothing but love. Are you seeing this, Vinod? The level of hypocrisy in this country is unreal.
#Hypocrisy #DoubleStandards #Vinod #SocialMediaTrends #LanguageDebate
**सेवा में,**
माननीय अध्यक्षा महोदया,
**राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली**
**विषय: राखी सिकरवार के प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई तथा महिलाओं के विरुद्ध अशोभनीय एवं यौन भाषा के प्रयोग पर समान कानूनी कार्रवाई के संबंध में।**
**महोदया,**
सविनय निवेदन है कि मैं **शिवम् सिंह राजावत, निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश**, आपका ध्यान दिनांक **10 सितंबर 2026** को हुई घटना की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
दिनांक 10 सितंबर 2026 को करणी सेना द्वारा पैदल यात्रा एवं सभा का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद राखी सिकरवार, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, ने भावावेश में कुछ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए वीडियो प्रसारित किया। उनके द्वारा कही गई बातों की समाज के लोगों ने आलोचना की और इसकी निंदा भी की गई।
लेकिन मेरा मुख्य प्रश्न यह है कि **कानून सभी के लिए समान क्यों नहीं होना चाहिए?**
राखी सिकरवार के विरुद्ध करणी सेना के जिला प्रमुख **विष्णु तोमर** द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। दूसरी ओर, **शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य लोगों** द्वारा राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं और बहन-बेटियों के विरुद्ध कथित रूप से अत्यंत अशोभनीय, अपमानजनक एवं यौन प्रकृति की गालियों का प्रयोग किए जाने के वीडियो प्रचारित किए गए। यदि इन आरोपों से संबंधित वीडियो, पोस्ट या अन्य डिजिटल सामग्री सोशल मीडिया पर उपलब्ध है तो पुलिस एवं साइबर पुलिस द्वारा उसकी जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी प्रकार एक राजनैतिक नेता दामोदर यादव के द्वारा भी खुले मंचों से एक वर्ग की महिलाओं के लिए अशोभनीय टिप्पणी की जाति हे।
माननीय महोदया, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का प्रश्न किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है। **यदि किसी महिला द्वारा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है, तो किसी महिला के विरुद्ध अश्लील, यौन अथवा अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वालों के मामले में भी समान तत्परता दिखाई जानी चाहिए।**
न्यायालयों द्वारा भी महिलाओं के विरुद्ध गंभीर एवं आपत्तिजनक सामग्री के मामलों में पुलिस को कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के महत्व पर निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि एक मामले में तत्काल कार्रवाई और दूसरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो आम नागरिकों में प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
लगातार ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होने से महिलाओं के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों का मनोबल बढ़ सकता है। इससे ऐसा वातावरण बनता है जिसमें महिलाओं को सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन में स्वयं को असुरक्षित महसूस करना पड़ सकता है। **सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या जातीय प्रभाव के कारण महिलाओं के विरुद्ध होने वाले ऐसे कृत्यों को संरक्षण या बढ़ावा न मिले।**
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस मामले का **स्वतः संज्ञान** लेते हुए:
1. राखी सिकरवार के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी एवं की गई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा कराए।
2. राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं के विरुद्ध की गई कथित अशोभनीय एवं यौन प्रकृति की टिप्पणियों की साइबर जांच कराए।
3. शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की उपलब्ध सोशल मीडिया सामग्री की निष्पक्ष जांच कराए।
4. श्री दामोदर यादव से संबंधित उपलब्ध वीडियो एवं सार्वजनिक बयानों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
5. जिन मामलों में कानून का उल्लंघन पाया जाए, उनमें व्यक्ति की राजनीतिक, सामाजिक या जातीय पहचान से प्रभावित हुए बिना समान कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
6. महिलाओं की साइबर सुरक्षा एवं सोशल मीडिया पर उनके सम्मान की रक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार एवं पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश देने हेतु उचित सलाह दी जाए।
मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति या समाज के विरुद्ध द्वेष उत्पन्न करना नहीं है। मेरा केवल यह निवेदन है कि **महिला चाहे किसी भी जाति, वर्ग या विचारधारा से संबंधित हो, उसके सम्मान और सुरक्षा के मामले में कानून समान रूप से लागू होना चाहिए।**
अतः आपसे अनुरोध है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर **निष्पक्ष जांच एवं कानून के अनुसार उचित कार्रवाई** सुनिश्चित कराने की कृपा करें।
**भवदीय,**
**शिवम् सिंह राजावत**
ग्वालियर, मध्य प्रदेश
@NCWIndia@CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51@PMOIndia@RahulGandhi@INCIndia@cjpindia@MPPoliceDeptt
**सेवा में,**
माननीय अध्यक्षा महोदया,
**राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली**
**विषय: राखी सिकरवार के प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई तथा महिलाओं के विरुद्ध अशोभनीय एवं यौन भाषा के प्रयोग पर समान कानूनी कार्रवाई के संबंध में।**
**महोदया,**
सविनय निवेदन है कि मैं **शिवम् सिंह राजावत, निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश**, आपका ध्यान दिनांक **10 सितंबर 2026** को हुई घटना की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
दिनांक 10 सितंबर 2026 को करणी सेना द्वारा पैदल यात्रा एवं सभा का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद राखी सिकरवार, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, ने भावावेश में कुछ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए वीडियो प्रसारित किया। उनके द्वारा कही गई बातों की समाज के लोगों ने आलोचना की और इसकी निंदा भी की गई।
लेकिन मेरा मुख्य प्रश्न यह है कि **कानून सभी के लिए समान क्यों नहीं होना चाहिए?**
राखी सिकरवार के विरुद्ध करणी सेना के जिला प्रमुख **विष्णु तोमर** द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। दूसरी ओर, **शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य लोगों** द्वारा राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं और बहन-बेटियों के विरुद्ध कथित रूप से अत्यंत अशोभनीय, अपमानजनक एवं यौन प्रकृति की गालियों का प्रयोग किए जाने के वीडियो प्रचारित किए गए। यदि इन आरोपों से संबंधित वीडियो, पोस्ट या अन्य डिजिटल सामग्री सोशल मीडिया पर उपलब्ध है तो पुलिस एवं साइबर पुलिस द्वारा उसकी जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी प्रकार एक राजनैतिक नेता दामोदर यादव के द्वारा भी खुले मंचों से एक वर्ग की महिलाओं के लिए अशोभनीय टिप्पणी की जाति हे।
माननीय महोदया, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का प्रश्न किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है। **यदि किसी महिला द्वारा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है, तो किसी महिला के विरुद्ध अश्लील, यौन अथवा अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वालों के मामले में भी समान तत्परता दिखाई जानी चाहिए।**
न्यायालयों द्वारा भी महिलाओं के विरुद्ध गंभीर एवं आपत्तिजनक सामग्री के मामलों में पुलिस को कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के महत्व पर निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि एक मामले में तत्काल कार्रवाई और दूसरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो आम नागरिकों में प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
लगातार ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होने से महिलाओं के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों का मनोबल बढ़ सकता है। इससे ऐसा वातावरण बनता है जिसमें महिलाओं को सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन में स्वयं को असुरक्षित महसूस करना पड़ सकता है। **सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या जातीय प्रभाव के कारण महिलाओं के विरुद्ध होने वाले ऐसे कृत्यों को संरक्षण या बढ़ावा न मिले।**
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस मामले का **स्वतः संज्ञान** लेते हुए:
1. राखी सिकरवार के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी एवं की गई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा कराए।
2. राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं के विरुद्ध की गई कथित अशोभनीय एवं यौन प्रकृति की टिप्पणियों की साइबर जांच कराए।
3. शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की उपलब्ध सोशल मीडिया सामग्री की निष्पक्ष जांच कराए।
4. श्री दामोदर यादव से संबंधित उपलब्ध वीडियो एवं सार्वजनिक बयानों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
5. जिन मामलों में कानून का उल्लंघन पाया जाए, उनमें व्यक्ति की राजनीतिक, सामाजिक या जातीय पहचान से प्रभावित हुए बिना समान कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
6. महिलाओं की साइबर सुरक्षा एवं सोशल मीडिया पर उनके सम्मान की रक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार एवं पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश देने हेतु उचित सलाह दी जाए।
मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति या समाज के विरुद्ध द्वेष उत्पन्न करना नहीं है। मेरा केवल यह निवेदन है कि **महिला चाहे किसी भी जाति, वर्ग या विचारधारा से संबंधित हो, उसके सम्मान और सुरक्षा के मामले में कानून समान रूप से लागू होना चाहिए।**
अतः आपसे अनुरोध है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर **निष्पक्ष जांच एवं कानून के अनुसार उचित कार्रवाई** सुनिश्चित कराने की कृपा करें।
**भवदीय,**
**शिवम् सिंह राजावत**
ग्वालियर, मध्य प्रदेश
@NCWIndia@CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51@PMOIndia@RahulGandhi@INCIndia@cjpindia@MPPoliceDeptt
**सेवा में,**
माननीय अध्यक्षा महोदया,
**राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली**
**विषय: राखी सिकरवार के प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई तथा महिलाओं के विरुद्ध अशोभनीय एवं यौन भाषा के प्रयोग पर समान कानूनी कार्रवाई के संबंध में।**
**महोदया,**
सविनय निवेदन है कि मैं **शिवम् सिंह राजावत, निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश**, आपका ध्यान दिनांक **10 सितंबर 2026** को हुई घटना की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
दिनांक 10 सितंबर 2026 को करणी सेना द्वारा पैदल यात्रा एवं सभा का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद राखी सिकरवार, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, ने भावावेश में कुछ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए वीडियो प्रसारित किया। उनके द्वारा कही गई बातों की समाज के लोगों ने आलोचना की और इसकी निंदा भी की गई।
लेकिन मेरा मुख्य प्रश्न यह है कि **कानून सभी के लिए समान क्यों नहीं होना चाहिए?**
राखी सिकरवार के विरुद्ध करणी सेना के जिला प्रमुख **विष्णु तोमर** द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। दूसरी ओर, **शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य लोगों** द्वारा राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं और बहन-बेटियों के विरुद्ध कथित रूप से अत्यंत अशोभनीय, अपमानजनक एवं यौन प्रकृति की गालियों का प्रयोग किए जाने के वीडियो प्रचारित किए गए। यदि इन आरोपों से संबंधित वीडियो, पोस्ट या अन्य डिजिटल सामग्री सोशल मीडिया पर उपलब्ध है तो पुलिस एवं साइबर पुलिस द्वारा उसकी जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी प्रकार एक राजनैतिक नेता दामोदर यादव के द्वारा भी खुले मंचों से एक वर्ग की महिलाओं के लिए अशोभनीय टिप्पणी की जाति हे।
माननीय महोदया, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का प्रश्न किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है। **यदि किसी महिला द्वारा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है, तो किसी महिला के विरुद्ध अश्लील, यौन अथवा अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वालों के मामले में भी समान तत्परता दिखाई जानी चाहिए।**
न्यायालयों द्वारा भी महिलाओं के विरुद्ध गंभीर एवं आपत्तिजनक सामग्री के मामलों में पुलिस को कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के महत्व पर निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि एक मामले में तत्काल कार्रवाई और दूसरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो आम नागरिकों में प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
लगातार ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होने से महिलाओं के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों का मनोबल बढ़ सकता है। इससे ऐसा वातावरण बनता है जिसमें महिलाओं को सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन में स्वयं को असुरक्षित महसूस करना पड़ सकता है। **सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या जातीय प्रभाव के कारण महिलाओं के विरुद्ध होने वाले ऐसे कृत्यों को संरक्षण या बढ़ावा न मिले।**
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस मामले का **स्वतः संज्ञान** लेते हुए:
1. राखी सिकरवार के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी एवं की गई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा कराए।
2. राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं के विरुद्ध की गई कथित अशोभनीय एवं यौन प्रकृति की टिप्पणियों की साइबर जांच कराए।
3. शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की उपलब्ध सोशल मीडिया सामग्री की निष्पक्ष जांच कराए।
4. श्री दामोदर यादव से संबंधित उपलब्ध वीडियो एवं सार्वजनिक बयानों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
5. जिन मामलों में कानून का उल्लंघन पाया जाए, उनमें व्यक्ति की राजनीतिक, सामाजिक या जातीय पहचान से प्रभावित हुए बिना समान कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
6. महिलाओं की साइबर सुरक्षा एवं सोशल मीडिया पर उनके सम्मान की रक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार एवं पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश देने हेतु उचित सलाह दी जाए।
मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति या समाज के विरुद्ध द्वेष उत्पन्न करना नहीं है। मेरा केवल यह निवेदन है कि **महिला चाहे किसी भी जाति, वर्ग या विचारधारा से संबंधित हो, उसके सम्मान और सुरक्षा के मामले में कानून समान रूप से लागू होना चाहिए।**
अतः आपसे अनुरोध है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर **निष्पक्ष जांच एवं कानून के अनुसार उचित कार्रवाई** सुनिश्चित कराने की कृपा करें।
**भवदीय,**
**शिवम् सिंह राजावत**
ग्वालियर, मध्य प्रदेश
@NCWIndia@CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51@PMOIndia@RahulGandhi@INCIndia@cjpindia@MPPoliceDeptt
**सेवा में,**
माननीय अध्यक्षा महोदया,
**राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली**
**विषय: राखी सिकरवार के प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई तथा महिलाओं के विरुद्ध अशोभनीय एवं यौन भाषा के प्रयोग पर समान कानूनी कार्रवाई के संबंध में।**
**महोदया,**
सविनय निवेदन है कि मैं **शिवम् सिंह राजावत, निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश**, आपका ध्यान दिनांक **10 सितंबर 2026** को हुई घटना की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
दिनांक 10 सितंबर 2026 को करणी सेना द्वारा पैदल यात्रा एवं सभा का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद राखी सिकरवार, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, ने भावावेश में कुछ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए वीडियो प्रसारित किया। उनके द्वारा कही गई बातों की समाज के लोगों ने आलोचना की और इसकी निंदा भी की गई।
लेकिन मेरा मुख्य प्रश्न यह है कि **कानून सभी के लिए समान क्यों नहीं होना चाहिए?**
राखी सिकरवार के विरुद्ध करणी सेना के जिला प्रमुख **विष्णु तोमर** द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। दूसरी ओर, **शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य लोगों** द्वारा राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं और बहन-बेटियों के विरुद्ध कथित रूप से अत्यंत अशोभनीय, अपमानजनक एवं यौन प्रकृति की गालियों का प्रयोग किए जाने के वीडियो प्रचारित किए गए। यदि इन आरोपों से संबंधित वीडियो, पोस्ट या अन्य डिजिटल सामग्री सोशल मीडिया पर उपलब्ध है तो पुलिस एवं साइबर पुलिस द्वारा उसकी जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी प्रकार एक राजनैतिक नेता दामोदर यादव के द्वारा भी खुले मंचों से एक वर्ग की महिलाओं के लिए अशोभनीय टिप्पणी की जाति हे।
माननीय महोदया, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का प्रश्न किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है। **यदि किसी महिला द्वारा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है, तो किसी महिला के विरुद्ध अश्लील, यौन अथवा अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वालों के मामले में भी समान तत्परता दिखाई जानी चाहिए।**
न्यायालयों द्वारा भी महिलाओं के विरुद्ध गंभीर एवं आपत्तिजनक सामग्री के मामलों में पुलिस को कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के महत्व पर निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि एक मामले में तत्काल कार्रवाई और दूसरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो आम नागरिकों में प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
लगातार ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होने से महिलाओं के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों का मनोबल बढ़ सकता है। इससे ऐसा वातावरण बनता है जिसमें महिलाओं को सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन में स्वयं को असुरक्षित महसूस करना पड़ सकता है। **सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या जातीय प्रभाव के कारण महिलाओं के विरुद्ध होने वाले ऐसे कृत्यों को संरक्षण या बढ़ावा न मिले।**
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस मामले का **स्वतः संज्ञान** लेते हुए:
1. राखी सिकरवार के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी एवं की गई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा कराए।
2. राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं के विरुद्ध की गई कथित अशोभनीय एवं यौन प्रकृति की टिप्पणियों की साइबर जांच कराए।
3. शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की उपलब्ध सोशल मीडिया सामग्री की निष्पक्ष जांच कराए।
4. श्री दामोदर यादव से संबंधित उपलब्ध वीडियो एवं सार्वजनिक बयानों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
5. जिन मामलों में कानून का उल्लंघन पाया जाए, उनमें व्यक्ति की राजनीतिक, सामाजिक या जातीय पहचान से प्रभावित हुए बिना समान कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
6. महिलाओं की साइबर सुरक्षा एवं सोशल मीडिया पर उनके सम्मान की रक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार एवं पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश देने हेतु उचित सलाह दी जाए।
मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति या समाज के विरुद्ध द्वेष उत्पन्न करना नहीं है। मेरा केवल यह निवेदन है कि **महिला चाहे किसी भी जाति, वर्ग या विचारधारा से संबंधित हो, उसके सम्मान और सुरक्षा के मामले में कानून समान रूप से लागू होना चाहिए।**
अतः आपसे अनुरोध है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर **निष्पक्ष जांच एवं कानून के अनुसार उचित कार्रवाई** सुनिश्चित कराने की कृपा करें।
**भवदीय,**
**शिवम् सिंह राजावत**
ग्वालियर, मध्य प्रदेश
@NCWIndia@CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51@PMOIndia@RahulGandhi@INCIndia@cjpindia@MPPoliceDeptt
**सेवा में,**
माननीय अध्यक्षा महोदया,
**राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली**
**विषय: राखी सिकरवार के प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई तथा महिलाओं के विरुद्ध अशोभनीय एवं यौन भाषा के प्रयोग पर समान कानूनी कार्रवाई के संबंध में।**
**महोदया,**
सविनय निवेदन है कि मैं **शिवम् सिंह राजावत, निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश**, आपका ध्यान दिनांक **10 सितंबर 2026** को हुई घटना की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
दिनांक 10 सितंबर 2026 को करणी सेना द्वारा पैदल यात्रा एवं सभा का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद राखी सिकरवार, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, ने भावावेश में कुछ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए वीडियो प्रसारित किया। उनके द्वारा कही गई बातों की समाज के लोगों ने आलोचना की और इसकी निंदा भी की गई।
लेकिन मेरा मुख्य प्रश्न यह है कि **कानून सभी के लिए समान क्यों नहीं होना चाहिए?**
राखी सिकरवार के विरुद्ध करणी सेना के जिला प्रमुख **विष्णु तोमर** द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। दूसरी ओर, **शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य लोगों** द्वारा राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं और बहन-बेटियों के विरुद्ध कथित रूप से अत्यंत अशोभनीय, अपमानजनक एवं यौन प्रकृति की गालियों का प्रयोग किए जाने के वीडियो प्रचारित किए गए। यदि इन आरोपों से संबंधित वीडियो, पोस्ट या अन्य डिजिटल सामग्री सोशल मीडिया पर उपलब्ध है तो पुलिस एवं साइबर पुलिस द्वारा उसकी जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी प्रकार एक राजनैतिक नेता दामोदर यादव के द्वारा भी खुले मंचों से एक वर्ग की महिलाओं के लिए अशोभनीय टिप्पणी की जाति हे।
माननीय महोदया, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का प्रश्न किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है। **यदि किसी महिला द्वारा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है, तो किसी महिला के विरुद्ध अश्लील, यौन अथवा अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने वालों के मामले में भी समान तत्परता दिखाई जानी चाहिए।**
न्यायालयों द्वारा भी महिलाओं के विरुद्ध गंभीर एवं आपत्तिजनक सामग्री के मामलों में पुलिस को कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के महत्व पर निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि एक मामले में तत्काल कार्रवाई और दूसरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो आम नागरिकों में प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
लगातार ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होने से महिलाओं के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों का मनोबल बढ़ सकता है। इससे ऐसा वातावरण बनता है जिसमें महिलाओं को सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन में स्वयं को असुरक्षित महसूस करना पड़ सकता है। **सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या जातीय प्रभाव के कारण महिलाओं के विरुद्ध होने वाले ऐसे कृत्यों को संरक्षण या बढ़ावा न मिले।**
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस मामले का **स्वतः संज्ञान** लेते हुए:
1. राखी सिकरवार के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी एवं की गई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा कराए।
2. राखी सिकरवार तथा ठाकुर समाज की महिलाओं के विरुद्ध की गई कथित अशोभनीय एवं यौन प्रकृति की टिप्पणियों की साइबर जांच कराए।
3. शेर दंडोतिया, आकाश शर्मा, सिद्धांशु भारद्वाज तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की उपलब्ध सोशल मीडिया सामग्री की निष्पक्ष जांच कराए।
4. श्री दामोदर यादव से संबंधित उपलब्ध वीडियो एवं सार्वजनिक बयानों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
5. जिन मामलों में कानून का उल्लंघन पाया जाए, उनमें व्यक्ति की राजनीतिक, सामाजिक या जातीय पहचान से प्रभावित हुए बिना समान कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
6. महिलाओं की साइबर सुरक्षा एवं सोशल मीडिया पर उनके सम्मान की रक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार एवं पुलिस को आवश्यक दिशा-निर्देश देने हेतु उचित सलाह दी जाए।
मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति या समाज के विरुद्ध द्वेष उत्पन्न करना नहीं है। मेरा केवल यह निवेदन है कि **महिला चाहे किसी भी जाति, वर्ग या विचारधारा से संबंधित हो, उसके सम्मान और सुरक्षा के मामले में कानून समान रूप से लागू होना चाहिए।**
अतः आपसे अनुरोध है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर **निष्पक्ष जांच एवं कानून के अनुसार उचित कार्रवाई** सुनिश्चित कराने की कृपा करें।
**भवदीय,**
**शिवम् सिंह राजावत**
ग्वालियर, मध्य प्रदेश
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