यह तोह मानना पड़ेगा कि @AMISHDEVGAN@sambitswaraj को @NayakRagini ही जूती पे रखती हैं और इन दोनों को धोबी पछाड़ करती है। रागिनी जी इन दोनों को उन्ही की भाषा मे जबाब देती है।
बात सही कही है जस्टिस भुयान ने। एक पूरा समुदाय नदी में जीवन बिताता है। नाव चलाता है। नाव में खाना बनाता है। मछली बनाता है। वहीं खाता है और सोता है। बचपन से देख रहा हूँ मछली बनाते और खाते हुए। जब मछली बनाते होंगे तो मटन और चिकन भी खाते होंगे। अगर राजनीति की यह सनक नहीं रूकी तो एकदिन मूर्खों की यह फ़ौज सारे मछुआरों और नाविकों को जेल में बंद करा देगी। बनारस में जब कुछ मुस्लिम युवाओं को जेल में डाला गया वहीं से यह शुरू हुआ। क्या किसी को यह नहीं पता होगा कि नाविक नाव में ही खाना बनाते हैं ।
मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
जब पूरे देश में पेपर लीक को लेकर आंदोलन चल रहा है तब भी भाजपाई नहीं रुक रहे, अब उत्तराखंड में पेपर लीक करवा दिया है।
भाजपा देश के बच्चों के खिलाफ खुलकर आ गई है! ये गद्दार लोग है!
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जी ने भारत के भविष्य युवाशक्ति को 'भाड़े का टट्टू' बताया है।
संभवत: मदन जी का ये बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मिलने के बाद या दिल्ली से पर्ची मिलने के बाद पढ़ा गया हो।
मोदी जी... ये भाड़े के टट्टू नहीं, भारत का भविष्य हैं!
इस वीडियो को जरूर सुना जाना चाहिए- दिल्ली हाई कोर्ट में कल वरिष्ठ वकील Gopal Sankaranarayanan ने दिल्ली पुलिस के धागे खोल दिए.
उन्होंने कहा-
पुलिस ने लाठियां चलाईं, लाठियों में कीलें लगी हुई थीं, इसकी वजह से बच्चे घायल हुए।
पुलिस वाले सिविल कपड़ों में थे. वर्दी वालों ने नेमप्लेट हटा दी.
उनके पास करंट मारने वाली इलेक्ट्रिक लाठियां थीं. प्रदर्शन में RAF और पुलिस को इसका इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है.
एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा ने शांत खड़ी एक छात्रा को थप्पड़ मारते हैं. उनका इस कोर्ट में नाम लिया जाना चाहिए और संदीप लांबा को इस कोर्ट में बुलाया जाना चाहिए औऱ उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. ऐसे लोगों को पुलिस का चार्ज दिया हुआ है लोगों की रक्षा करने के लिए।
Credit-The Bar Bulletin
बहुत ख़ूब - class 9 की स्टूडेंट ने क्या क्लास लगाई है!
Class 9
Page No. 11
A Democratic Govt is a better Govt, because it is a more accountable form of Govt
“But there is no accountability. हम जवाब माँग रहे हैं तो हम पर लाठीचार्ज किया जा रहा है. Is this democracy”
मैं अब से सिर्फ उन्हीं सवालों का जवाब दूंगी, जो जरूरी हैं। आप सब (मीडिया) वही सवाल पूछते हैं, जो सरकार आप से पुछवाना चाहती है।
• क्या आपने सरकार के मंत्रियों से सवाल पूछा?
• क्या आपने धर्मेंद्र प्रधान से पूछा कि वो इस्तीफा कब देंगे?
• छात्र आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन PM मोदी सदन में नहीं आए, क्या आपने सवाल पूछा?
• क्या आपने अमित शाह से पूछा कि छात्रों पर लाठियां क्यों चलवाईं, बच्चे हॉस्पिटल में क्यों हैं? किसलिए... क्या ये छात्र आतंकवादी हैं?
जब आप सरकार से ये सवाल करेंगे, तब मैं आपके सवालों का जवाब दूंगी।
: कांग्रेस महासचिव एवं सांसद श्रीमती @priyankagandhi जी
आपने हमारे लोकतंत्र के इतिहास में कभी देखा है कि सरकार के सांसद खुद संसद के बाहर प्रदर्शन करें? ये संसद नहीं चला पा रहे हैं, बेहद कमजोर और कायर हैं।
इस लोकतंत्र में युवाओं के साथ कैसा व्यवहार हो रहा है? जायज मांगों के लिए उनपर अत्याचार कर रहे हैं, लाठी और आंसू गैस चलवा रहे हैं। प्रधानमंत्री जो हर भारतीय की उपलब्धि का श्रेय लेते हैं, जो भारत के मंगल ग्रह पर जाने का भी श्रेय लेते हैं, वे पेपर लीक की जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे? 152 पेपर लीक हुए और किसी को सजा नहीं हुई। मोदी जी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
डरपोक भाजपा के निठल्ले सांसदों ने मकर द्वार पर @RahulGandhi जी को घेर कर नारेबाज़ी करने की कोशिश की तो,
उल्टा @priyankagandhi जी ने उन सांसदों को घेर कर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते हुए कांग्रेस के सांसदों संग जोरदार नारेबाजी की
और पासा पलट दिया 🔥
समय कितना आगे बढ़ गया, लेकिन कुछ भी नहीं बदला!
2015 का मानसून सत्र मध्य प्रदेश के व्यापम परीक्षा एवं भर्ती घोटाले की वजह से लगभग पूरी तरह ठप हो गया था।
2026 का मानसून सत्र NTA पेपर लीक घोटाले की भेंट चढ़ गया है।
व्यापम घोटाले के दौरान जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को बचाया गया और बाद में उन्हें केंद्र सरकार के दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंप दी गई। NTA पेपर लीक के दौरान जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को भी आज प्रधानमंत्री का संरक्षण प्राप्त है।
मंत्री प्रधान के पद पर रहते हुए संसद में होने वाली कोई भी चर्चा निरर्थक होगी। देशभर की भावना और मांग बिल्कुल स्पष्ट है-मंत्री प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
दिल्ली पुलिस में बैठे कुछ गुंडे जिसने बर्बरता की, बच्चियों के साथ शारीरिक हिंसा की उन सभी गुंडों को अदालत में बेनकाब किया जा रहा है!
राजनीतिक आका के इशारे पर जो बर्बरता इन गुंडों ने पुलिस के वेष में की है उसको याद रखा जाएगा।
दिल्ली पुलिस को इन गुंडों से बदनाम होने से बचाना होगा!