नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
राज कपूर साहब से क्षमा सहित और इसे नये रूप में रचने वाले के क्रेडिट को नमन सहित सुनिये ये रियलिस्टिक पैरोडी गीत :
नोटबंदी सिर्फ़ एक बहाना है.
मोदी जी को मित्रों को बचाना है.
किसी ने दिन दहाड़े लूटा है, संभल!
देशप्रेम के नाम पर….
विपक्ष को तोड़ कर चुनौती जनता को दी जा रही है कि आपकी कोई औक़ात नहीं है। ऐसा कर लोकतंत्र का उत्साह ख़त्म किया जा रहा है। अगर कोर्ट केस माफ़ कराने के लिए सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं तो सवाल उठेगा कि क्या कोर्ट ने ED की जगह ले ली है? अदालत की साख को दाँव पर लगाने से नुक़सान भरोसे का होगा। वकील प्रतिस्पर्धा में निखरते हैं।उनके पेशे को AI से ज़्यादा ख़तरा न्याय व्यवस्था को पार्टी व्यवस्था में बदल देने से होगा। इसके बाद क्या बचेगा? हताशा का लंबा दौर और नतीजा? एक शब्द में - दुर्दशा। हताशा से केवल दुर्दशा पैदा होती है। राष्ट्र के लोक जीवन का उत्साह ख़त्म हो जाता है। उसकी आर्थिक प्रगति भी कुंठित हो जाती है। अभी सत्ता के दम पर कुछ भी कर लीजिए लेकिन सबके सामने सांसदों को गुलाम की तरह पेश कर राजनीति के महत्व को भी समाप्त किया जा रहा है। अगर यह जीत है तो बीजेपी जश्न क्यों नहीं मना रही? क्या इस देश में किसी को पार्टी चलाने नहीं आती? फिर जब सारा बहुमत आ ही गया तब चुनाव बंद कर दीजिए।
देश के हर युवा से मेरी एक बात - आज इस देश में मेहनत का फल नहीं, सपने देखने की सज़ा मिलती है।
हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा, हर अधूरी भर्ती - सिर्फ़ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है।
मैं जानता हूँ आप थक चुके हैं। ग़ुस्से में हैं। पर याद रखिए - जब सरकार सुनने को तैयार न हो, तब आवाज़ ऊँची करनी पड़ती है।
इसलिए मैं आप सबको बुला रहा हूँ - 17 जून, कोटा। छात्रों की गूंज।
आइए, मिलकर एक ऐसी हुंकार बनें जिसे अनसुना करना नामुमकिन हो। कोटा से शुरुआत - फिर देश के हर कोने तक।
ये आपके भविष्य की लड़ाई है। और मैं आपके साथ हूँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj
After Vote Chori and Sarkar Chori - the BJP-EC jugalbandi has finished the contest before it has even begun with Seat Chori.
Look at what happened in the recent Rajya Sabha elections.
Congress candidate Meenakshi Natarajan ji submitted every document. No pending cases. The EC cancelled her nomination on a frivolous BJP objection.
Parimal Nathwani ji, the BJP-backed independent, got his own name wrong on the form and skipped multiple mandatory disclosures. The EC gave him an extension to fix everything.
Same Election Commission. Two candidates. One was disqualified without even a hearing. The other was rewarded despite not following the rules.
When the Congress sought a meeting, the EC first tried to evade us. When we finally met, they did not say one word.
Expect to see much more of this - because for the BJP, it is far easier to fix the election than to win it.
मीनाक्षी नटराजन का नॉमिनेशन रद्द करने की ज़िद पर अगर चुनाव आयोग अड़ा रहता है तो पूरे विपक्ष को इसके ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ देना चाहिए।
सिर्फ़ कांग्रेस का नहीं, यह हर सत्ता विरोधी पार्टी और नागरिक का संघर्ष है।
अब वोट चोरी से नेक्स्ट लेवल पे सीट चोरी का सिलसिला शुरू हो गया है। मीनाक्षी जी का राज्य सभा का नामांकन निरस्त नहीं हुआ है। प्रजातंत्र की हत्या हुई है। This is nothing but murder of democracy.@INCIndia
झारखंड और मध्य प्रदेश में संख्या बल ना होते हुए भी एक बार फिर ख़रीद फ़रोख़्त की मंशा से भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं। देश के लोगों को कम तेल खाने और सोना ना खरीदने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री जी अब विधायकों की शॉपिंग करने निकलेंगे।
लेकिन जैसे हरियाणा राज्य सभा चुनाव में करोड़ों रूपये लगाने के बावज़ूद भाजपा ने मुंह की खाई थी, आगामी चुनाव में भी उनका यही हाल होगा। भाजपा के छल-बल का जवाब इंडिया गठबंधन परिवार मजबूती से देगा।
सार्थक 18 साल का है - पर सोच, साहस और सिद्धांत में किसी से कम नहीं।
उसने और उसके साथी निसर्ग ने वो कर दिखाया जो देश के बड़े मीडिया हाउस, खोजी पत्रकार नहीं कर पाए - CBSE और COEMPT की मिलीभगत को देश के सामने रख दिया।
मोदी जी चाहते हैं हमारे युवा reels बनाते रहें, पकौड़े तलते रहें, सवाल न पूछें, आँखें न खोलें। पर इन बच्चों ने सवाल भी पूछे। और जवाब भी ढूँढ निकाले।
देश का 18 साल का बच्चा CBI से तेज़ निकला - नौजवानों की ये जीत सही मायने में सरकार की हार है।
यही है भारत की असली युवा शक्ति - जिज्ञासु, जागरूक, जानकार। और याद रखिए, देश का भविष्य किसी बहकावे में नहीं आएगा।
तपती गर्मी में
बरसात में
पानी के कैनन के सामने
लाठियाँ खाते हुए
लहूलुहान
गिरफ़्तार हुए
NSUI और युवा कांग्रेस के साथियों ने छात्रों की आवाज़ उठाई
NEET पेपर लीक और CBSE में मार्किंग झोल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया
Gen Z की बात की
कितने टीवी चैनल पर दिखाये गए वो?
नीट पेपर लीक, 12वीं की सीबीएसई परीक्षाओं में धांधली के जिम्मेदार, सरकार में बैठे लोगों को दंडित करने की मांग को लेकर आज कुरुक्षेत्र में मेरे साथ हजारों युवाओं ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।
लेकिन, अपराधियों को बचाने वाली खर्चा पर्चा सरकार ने मुझे और मेरे साथियों को टारगेट करके वाटर कैनन का प्रयोग किया। उस वक्त का वीडिओ देखकर ये बात स्पष्ट हो जाती है कि हम एक इंच भी हटे नहीं, डटे रहे।
मैं सरकार को चेतावनी देना चाहता हूँ कि प्रदेश और देश का युवा आर-पार की लड़ाई के मूड में है। 12 जून को सरकार पानीपत में आकर देख ले, इससे भी बड़ा प्रदर्शन होगा।
देश के अलग-अलग राज्यों में NEET पेपर लीक के खिलाफ शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और जाँच की मांग करते Gen Z के आंदोलन हुए।
लेकिन सरकारी और लिबरल, दोनों मीडिया खामोश रहा। चर्चा नहीं हुई।
सिर्फ़ इसलिए कि ये विपक्षी पार्टी कांग्रेस से सम्बद्ध छात्र संगठन NSUI से हैं?
तीन काले कृषि क़ानून पर तो नरेंद्र मोदी को मुँह की खानी पड़ी थी, इसलिए इस बार अडानी को पीछे के दरवाज़े से खेती के क्षेत्र में घुसाने की साज़िश रची गई है. समझिए कैसे👇
• Food Corporation of India अनाज को सुरक्षित रखने के लिए 20,000 करोड़ रुपये का Hub & Spoke प्रोजेक्ट लाया है, जिसमें साइलो बनाए जायेंगे
• शुरू में इस टेंडर में anti monopoly clause था जिससे कि एक ही कंपनी का क़ब्ज़ा ना हो जाये
• लेकिन धीमे से नीति आयोग और वित्त मंत्रालय की सलाह पर यह क्लॉज़ हटा दिया गया
• बस फिर जादू हुआ. 134 साइलो के लिए टेंडर निकाला गया, जिसमें से 110 साइलो के टेंडर Adani Agri Logistics और Leap India को मिल गए
• अडानी ने अकेले लगभग 9,700 करोड़ रुपये के टेंडर जीत लिया
• अडानी इन साइलो में अनाज रखने के लिए और उसके आवा गमन का पैसा लेगा. और यह टेंडर 30 साल तक के लिए होगा
👉यह और कुछ नहीं बल्कि खाद्यान्न और खेती में चुपके से अडानी की पिछले दरवाजे से एंट्री है - और इसके लिए anti monopoly clause भी हटाया गया.
CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र।
CBSE सचिव - ट्रांसफ़र।
एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित।
और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान - सुरक्षित।
अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया।
यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है।
हमारी माँग आज भी वही है: शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो - ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए।
अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती - धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।
आज NEET पेपर लीक से आहत होकर आत्महत्या करने वाले होनहार छात्र प्रदीप मेघवाल के परिवार से मिला।
उनका दर्द शब्दों में नहीं समा सकता। एक माँ-बाप ने अपना बेटा खोया है और उनका कोई कसूर नहीं था।
देश के लाखों बच्चे पढ़ाई, प्रतियोगिता और भविष्य के दबाव में जी रहे हैं। और जब पेपर लीक होता है, तो सिर्फ़ एक परीक्षा नहीं टूटती - एक बच्चे का सपना, और एक पूरा परिवार टूट जाता है।
प्रदीप की मौत आत्महत्या नहीं - एक टूटी हुई, भ्रष्ट व्यवस्था की देन है।
जिन्होंने परीक्षा प्रणाली को माफ़ियाओं के हवाले कर दिया, और आज भी अपनी कुर्सी से चिपके हैं - मोदी-प्रधान की जोड़ी इस परिवार के सामने जवाबदेह है।
A denial is not an answer.
Why are the Education Minister and CBSE unable to answer the four simple questions I have asked?
The future of 18.5 lakh students have been put in jeopardy. They deserve the truth.