We had already said that several well-meaning persons in the BJP are extremely unhappy with the party and can’t even leave the party due to ED, IT, CBI threat.
Now high-level friends in the establishment are telling us that there is an OPEN REBELLION within the Union Cabinet.
Apparently seven Ministers have REFUSED to resign. They say they have an unblemished record yet being asked to quit to fit TURNCOATS. That is why the much-awaited cabinet reshuffle is not happening.
And then they ask us what has the Jantar Mantar protest achieved!
• रोड रेज से बचिए।
• सड़क पर अजनबियों को Civic Sense सिखाने की कोशिश मत कीजिए।
• जहाँ संभव हो, भीड़भाड़ से बचिए।
• सार्वजनिक जगह पर राजनीति की बहस से दूर रहिए।
• गलती हो जाए तो हाथ जोड़कर “सॉरी” बोलिए और आगे बढ़ जाइए।
लोग बेहद बेचैन, चिड़चिड़े और हिंसक होते जा रहे हैं।
रील्स, स्मार्टफोन, व्हाट्सऐप स्टेटस, फेसबुक, OTT हर वक्त मिलने वाला मनोरंजन और सस्ता डोपामिन भारतीयों का मानसिक संतुलन बिगाड़ रहा है।
न ढंग के पब्लिक पार्क,
न साफ़ नदियाँ, न झीलें,
न सुकून की कोई जगह।
नतीजा? पूरा भारत फोन में घुसा हुआ है।
यह दिमाग़ और ज़िंदगी की महामारी है...शायद उससे भी ख़तरनाक।
गर्ग साहब ग़लत (2.6% ग्रोथ) कह रहे हैं, लेकिन यह विश्वसनीयता का सवाल है. सरकार सही कह रही है तब भी लोग मान नहीं रहे हैं @TheLallantop नेता नगरी शो पर मेरी राय
सार्वजनिक कार्यक्रम में एक ही पार्टी के लोग बैठेंगे ? अगर कोई अनचाहा सवाल पूछ लिया तो उसे वहां मारके भगाएंगे।
अभी सरकार नहीं है तो यह गुंडई और एटीट्यूड है, बनना इनको मुख्यमंत्री है और हरकतें सड़क छाप।
GDP का सच क्या है?
आँकड़ों के बारे में अंग्रेज़ी में कहावत है कि आप नंबरों को टॉर्चर कर किसी भी नतीजे पर पहुंच सकते हैं ,GDP के आँकड़ों के साथ भी यही हो रहा है. विपक्ष कह रहा है कि भट्ठा बैठ गया है जबकि सत्ता पक्ष कह रहा है कि सब चंगा सी.सच दोनों के बीच में कहीं है?
बवाल शुरू हुआ अप्रैल से जून की तिमाही के GDP आँकड़े आने के बाद. सरकार ने दावा किया कि 7.8% ग्रोथ हुई है. पहली नज़र में यह आँकड़े शानदार है क्योंकि इस अवधि में ईरान अमेरिका का युद्ध चरम पर था. पेट्रोल और डीज़ल महंगा हुआ. सोने को टैक्स लगाकर महंगा किया गया. खुद रिजर्व बैंक ने आकलन किया था कि ग्रोथ कम हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है. महंगाई तो बढ़ी लेकिन ग्रोथ कम नहीं हुई. यह राहत की बात है.
इन आँकड़ों में छेद करने के लिए तर्क दिया जा रहे हैं कि सरकार ने बेस बदल दिया.
GDP अगर पिज़्ज़ा है तो पिछले साल मान लो कि 10 इंच का बना था और इस बार 12 इंच का लेकिन अब सरकार ने कह दिया कि पिछले साल 10 इंच नहीं, 8 इंच का था तो आपको इस साल की बढ़ोतरी यानी ग्रोथ ज़्यादा लगेगी. यह उदाहरण समझाने के लिए दिया गया है, असल में बदलाव इसके मुक़ाबले कम हुआ है.
पिछले साल इसी अवधि में ₹86 लाख करोड़ GDP दिखाई थी. सरकार ने पिछले साल के आँकड़े को घटाकर ₹80 लाख करोड़ कर दिया. अब ₹88 लाख करोड़ का आँकड़ा आया है. विरोधियों का तर्क है कि इस बदलाव के कारण 7.8% ग्रोथ दिख रही है. नहीं तो ग्रोथ दरअसल 2.6% हुई है . हालाँकि सरकार का तर्क है कि यह बदलाव बेस बदलने के कारण हुआ है.
एक मिनट के लिए मान लीजिए कि 7.8% का आँकड़ा बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है तो क्या ग्रोथ दो ढाई परसेंट हुई है. GDP आख़िर हमारी ज़िंदगी के रोज़मर्रा के खर्च से कहीं ना कहीं जुड़ी हुई है. दूसरे पैमानों से देखिए तो ग्रोथ ठीक ठाक हो रही है.
कार और बाइक की बिक्री +21%
पेट्रोल की बिक्री +6%
बिजली की खपत +9%
सीमेंट उत्पादन +9%
स्टील की बिक्री +8%
E-way bills. +12%
लोग ज़्यादा गाड़ियाँ ख़रीद रहे हैं, पेट्रोल की खपत भी बढ़ी है, बिजली ज़्यादा खर्च हो रही है. सीमेंट और स्टील की बिक्री बढ़ने का मतलब है कि मकान बन रहे हैं. E way ज़्यादा जनरेट होने का मतलब है कि सामान की आवाजाही बढ़ी है. इकोनॉमी का पहिया घूम रहा है.
अब दूसरे पक्ष को देखिए, क्या इस ग्रोथ रेट से विकसित भारत 2047 तक बन जाएगा? Bloomberg ने अनुमान लगाया है कि विकसित देश बनने के लिए भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 6 गुना बढ़नी होगी. अभी करीब 3 हज़ार डॉलर है उसे 18 हज़ार डॉलर प्रति व्यक्ति होना होगा. यह हासिल करने के लिए 9- 10% ग्रोथ चाहिए और अभी हम 25 साल से 6-7% के फेर में पड़े हुए हैं. यह लक्ष्य 20 साल में पूरा करना मुश्किल लगता है.
GDP की बहस में मैं हमेशा कहता हूँ, हम फलाने नंबर की इकोनॉमी है, हम सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं, इस सबकी कोई वैल्यू नहीं है. जब तक लोगों के पास पैसे नहीं पहुंचते हैं सब बेकार है. प्रति व्यक्ति आय में हम दुनिया में 140 वें नंबर पर हैं.
आँकड़ों को टॉर्चर मत कीजिए. जो है उसे मानिए और जो नहीं है उसे भी मानिए.
On 29th August, Shreya Ghoshal was invited to an event where she was presented with the 21st Asha Bhosle Award.
After receiving the award, Shreya Ghoshal was asked to sing a few lines.
Like the other singers, Shreya sang one line and was about to wrap up the song, but the saxophone 🎷 player kept playing, and Shreya was so impressed by his performance that she continued singing out of respect for him. ❤️
The audience also greatly appreciated the saxophone player and gave him a huge round of applause. 👏
Rahul Gandhi reposted in support of Kriti Sanon, saying, “What a woman wears, what she does, and where she goes is her choice.” I totally agree with him, but “when she wears it” is the actual issue.
Nobody was questioning her choice to wear a bikini in movies, but when it comes to a particular festival of a religion, the context matters. People have the right to question your choice and call it out if they believe it was inappropriate or in poor choice.
@ashu_nauty Kon se Bharat ki baat kar rahe ho bhai, jahan log aaram se 5 lakh mahina kama rahe imandari se? Kripaya gyanvardhan, carrrirvardhan karein.
“Kohli better than Sachin in SENA” 🤡
Batting average in Tests
Australia
Sachin Tendulkar: 53.20
Virat Kohli: 46.72
England
Sachin Tendulkar: 54.31
Virat Kohli: 33.21
New Zealand
Sachin Tendulkar: 49.52
Virat Kohli: 36
South Africa
Virat Kohli: 49.50
Sachin Tendulkar: 46.44