ख़ाक मुझ में क़माल रखा है
ऐ खुदा तूने संभाल रखा है
मेरे ऐबों पर डाल कर पर्दा
मुझे अच्छों में डाल रखा है
अपने दामन से करके वाबसता
हर मुसीबत को टाल रखा है
में तो कब का मिट गया होता
तेरी रहमतों ने पाल रखा है.
हो गया जो भी था मंज़ूर-ए- ख़सारा होना
अब तो मुमकिन ही नहीं इश्क़ दोबारा होना
टूट के बिखरूँ यही हक़ में मेरे बहेतर है
रास आया ही नहीं मुझको सितारा होना
हम जो मासूम हैं मोहतॉत रहें तो अच्छा
है बड़ा जुर्म यहाँ इतना भी प्यारा होना
एक फ़क़त तेरे सिवा दुनिया मयस्सर है मुझे
इसको कहेते हैं मियाँ इश्क़ में हारा होना
एक तरफा की मोहब्बत में अज़ियत है बहोत
साथ इस दर्द के मुश्किल है गुज़ारा होना
ऐैन मुमकिन है उसे हमसे मोहब्बत ही नहीं
यानी मुमकिन ही नहीं उसका हमारा होना...!!!!!