कर्म ऐसे करो कि आने वाली पीढ़ियां
*गर्व*
से तुम्हारा नाम ले..
*शर्म*
से नहीं......
शुभ सवेरा ♦️🙏
जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥
ॐ गं गणपतये नमः 🙏....
इस वीडियो में ललित मोदी बता रहे हैं कि, बैंगलोर में एक मैच के ठीक बाद एक बैठक हुई थी, जिसमें सुनंदा पुष्कर को छोड़कर बाकी सभी शेयरधारक मौजूद थे। ललित मोदी जब समझौते को देख रहे थे, तब उन्हें नहीं पता था कि सुनंदा पुष्कर कौन हैं। उन्होंने जब कंसोर्टियम के सदस्यों से पूछा कि वे सुनंदा पुष्कर को 25% शेयर और राजस्व का 15% क्यों दे रहे हैं, तो एक व्यक्ति ने उन्हें ऑटोमोबाइल डीलर बताया। ललित मोदी ने कहा कि वह खुद भारत में मार्केटिंग का काम करते हैं लेकिन उन्हें (सुनंदा पुष्कर) को नहीं जानता और जब तक उसे पता नहीं चलेगा कि सुनंदा पुष्कर कौन हैं, वह समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।
इसके तुरंत बाद ललित मोदी के पास तत्कालीन विदेश मंत्री शशि थरूर का फोन आया। उन्होंने स्पीकरफोन पर ललित मोदी से कहा कि वह सुनंदा पुष्कर के बारे में न पूछें क्योंकि वह उनकी अच्छी दोस्त हैं। ललित मोदी ने इस पर आपत्ति जताई, नाराजगी व्यक्त की और फोन काटते हुए हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इसके बाद रात के दो बजे बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष शशांक मनोहर का फोन आया, जो आमतौर पर आईपीएल के कामों में दखल नहीं देते थे। उन्होंने वक्ता से तुरंत उसी समय समझौते पर हस्ताक्षर करने को कहा। ललित मोदी ने सुबह नागपुर आकर बात करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन शशांक मनोहर के अड़े रहने पर वक्ता ने उनके अधिकार का सम्मान करते हुए हस्ताक्षर करने की बात मान ली। लेकिन ललित मोदी ने समझौते पर यह लिखवाकर हस्ताक्षर किए कि अध्यक्ष उन्हें इसके लिए मजबूर कर रहे हैं।
ललित मोदी को तब इस दबाव का कारण समझ नहीं आया था, लेकिन सुबह उठकर जब उन्होंने अखबारों के पहले पन्ने पढ़े, तब उसे पूरी स्थिति और दबाव की वजह समझ में आई। ललित मोदी का मानना है कि हस्ताक्षर करने का वह फैसला उसकी एक गलती थी, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है।
ये जो कह रहा है उसका देश की सच्चाई से तो कुछ लेनादेना है नहीं। अतः क्या ये किसी भारत विरोधी भयंकर साज़िश का जिक्र कर उसके लिए माहौल बना रहा है, बिल्कुल उसी तरह जैसे कश्मीर में पाकिस्तान के आतंकवादियों के लिए कश्मीर में कुछ स्थानीय गद्दार, लोकल ओवर ग्राउंडवर्कर बनाते हैं।
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50 करोड़ की गर्लफ्रेंड
ललित मोदी ने कहा है कि...मेरे अनुसार उस समय कई राजनीतिक नेताओं से नियमित बातचीत होती थी। उन्होंने कहा कि उन्हें शशि थरूर, सोनिया गांधी, अहमद पटेल और प्रणब मुखर्जी सहित अनेक लोगों के फोन आते थे। उनका कहना था कि वे सभी से मित्रवत संबंध रखते थे। उन्होंने यह भी कहा कि राजीव शुक्ला अक्सर उनसे मिलकर कुछ विषयों पर चर्चा करते थे। उनके अनुसार यह मामला किसी एक व्यक्ति के पक्ष या विरोध का नहीं था, बल्कि व्यावसायिक और वित्तीय दृष्टि से सही निर्णय लेने का था।
उन्होंने कहा कि वे सुनंदा पुष्कर से जुड़े समूह को टीम देने के पक्ष में नहीं थे। उनका तर्क था कि कोच्चि कंसोर्टियम लगभग 350 मिलियन डॉलर की बोली पर टीम खरीद रहा था, लेकिन कुल निवेश का अधिकांश भार कुछ शेयरधारकों पर था, जबकि कुछ अन्य शेयरधारकों को बिना समान अनुपात में निवेश किए महत्वपूर्ण हिस्सेदारी मिल रही थी। उनके अनुसार यदि कंपनी को हर वर्ष बड़ी राशि का भुगतान करना पड़े और कुछ शेयरधारक अतिरिक्त पूंजी न लगाएँ, तो आर्थिक बोझ बाकी निवेशकों पर पड़ता है।
उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में जो शेयरधारक प्रारंभिक निवेश नहीं कर रहे थे, वे भी भविष्य में होने वाली आय और लाभ में हिस्सा प्राप्त करते रहते, जबकि जोखिम और अतिरिक्त निवेश का बोझ अन्य निवेशकों पर होता। उनके अनुसार इससे कंपनी की वित्तीय संरचना कमजोर हो सकती थी और लंबे समय में परियोजना के असफल होने की आशंका थी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने शुरुआत में ही कहा था कि यह मॉडल टिकाऊ नहीं है और बाद में उनका अनुमान सही साबित हुआ।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने यह निर्णय लेने से पहले अन्य सदस्यों से चर्चा की थी, तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर बैठक होनी थी और शुरुआत में अधिकांश लोग उनके विचारों से सहमत थे। लेकिन बाद में, उनके अनुसार, ऊपर से निर्देश आने के बाद स्थिति बदल गई। उन्होंने कहा कि बाद में शशि थरूर की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी।
उन्होंने आगे कहा कि वे किसी समझौते पर तुरंत सहमत नहीं हुए क्योंकि वे कंसोर्टियम के प्रत्येक सदस्य से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी पृष्ठभूमि, निवेश क्षमता और वित्तीय प्रतिबद्धताओं को समझना चाहते थे। उनका मानना था कि इतने बड़े निवेश और दीर्घकालिक दायित्व वाले प्रोजेक्ट में सभी भागीदारों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना आवश्यक था।
राजनीतिक बर्बरता और लूट की शवयात्रा....
बंगाल का दक्षिण 24 परगना जिले का सोनारपुर वो स्थान है जिसे 15 सालों से पूरे बंगाल में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के ताकतवर गुंडों के गढ़ों में से एक के रूप में पहचाना जाता था।
आज अपने गुंडों के उसी गढ़ में अभिषेक बनर्जी को जनता ने दौड़ा दौड़ा कर मारा। महिलाओं ने उस पर अंडे और टमाटरों की बौछार की।
दरअसल यह बंगाल में बेखौफ राज करती रही राजनीतिक बर्बरता और लूट की शवयात्रा थी जिसे जनता ने बड़ी धूमधाम से निकाला।
अभिषेक बनर्जी किसी TMC नेता के घर शोक प्रकट करने नहीं बल्कि अपने पालतू गुंडे की मौत पर मातम करने गया था। सच बताया हाथों में अंडे लिए खड़ी इन महिलाओं में से एक ने।
ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत पर, वकील रिंकी चटर्जी सिंह कहती हैं, "...
जब वह मुख्यमंत्री थीं, तो उन्होंने रेड रोड पर हिजाब पहनकर ईद की नमाज़ में हिस्सा लिया था, और बाद में हिंदू धर्म को 'गंदा धर्म' बताया था। जब मैं साइबर ब्रांच में FIR दर्ज कराने गई, तो उसे स्वीकार नहीं किया गया। मुझे शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, और मेरी शिकायत को बिना दर्ज किए कई दिनों तक लटकाए रखा गया... बाद में, 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले, धर्मतला में और भी बयान दिए गए, जिनमें हिंदू मतदाताओं को धमकाया गया था। मुझे व्यक्तिगत रूप से खतरा महसूस हुआ, एक हिंदू और एक कार्यकर्ता, दोनों के तौर पर, और मुझे हमलों का डर सताने लगा। मैंने BNS की कई धाराओं के तहत शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें उकसाने, हिंसा भड़काने और धर्म का अपमान करने का ज़िक्र था। शुरू में, पुलिस ने कार्रवाई करने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में मेरी शिकायत स्वीकार कर ली गई और धाराएं लगाई गईं। मेरा मानना है कि बोलने की आज़ादी की भी कुछ सीमाएं होती हैं..."
भारत मे जो भी तेल के रिज़र्व है वो अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी ने ही बनवाये है 2004-2014 के बीच एक भी रिज़र्व नहीं बना
और ये फूटी कोड़ी का राहुल मोदी जी से एनर्जी सिक्योरिटी पर सवाल पूछता है
रिजवान अहमद ने कांगियो की पोल खोल दी
यह गिरफ़्तार DC शांतनु सिन्हा बिस्वास का आलीशान घर है। वह ममता बनर्जी का क़रीबी सहयोगी था, जो असल में पुलिस का भविष्य तय करता था और उसने बेहिसाब दौलत जमा कर ली थी।
यह था ममता बनर्जी का विकास मॉडल।
जूते खाने को मचल रहा मुल्ला... कह रहा है कि...
लेकिन अफसोस इस बात का कि, मचल बांग्लादेश में रहा है। कह रहा है कि...
"अगर भारत सरकार गोहत्या पर रोक लगाती है, तो हम हिंदुओं का कत्ल करेंगे। सभी मुसलमान एकजुट हो जाओ।"
बांग्लादेशी मुसलमानों की इस खुली धमकी से मुझे कोई हैरानी नहीं हुई।
भारत में रहने वाले मुसलमान भी ठीक यही सोचते हैं। वे तो बस बहुमत में आने का इंतज़ार कर रहे हैं।
31मार्च 2004 से 31 मार्च 2014 तक के दस वर्ष के कांग्रेस शासनकाल में भारत ने लगभग 7000 टन स्वर्ण आयात किया था जबकि मोदी सरकार के बारह वर्ष के शासनकाल में इससे 50 प्रतिशत अधिक लगभग 10.5 हजार टन स्वर्ण आयात किया है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने कभी किसी को रोका टोका नहीं। लेकिन आज जब संकट के समय वो एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की सलाह दे रहे हैं तो.....
इस पर अमल करने के बजाए नशेड़ी अधेड़ और उसके टुकड़ों पर पल रहे कूकुर उस प्रधानमंत्री पर भौंक रहे हैं, जिसने उनको अबतक कभी नहीं रोका।
दुनिया की दस बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में केवल भारत अकेला देश है, जहां डीजल पेट्रोल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। ये है सूची...
अमेरिका -51.4%
चीन - 30%
ब्रिटेन - 22%
फ्रांस - 25%
जापान - 35%
जर्मनी - 27%
इजरायल - 30%
साउथ कोरिया - 30%
इटली - 30%
सिंगापुर - 30%
भारत - 0%
इस पर गर्व करने के बजाए नशेड़ी अधेड़ और उसके टुकड़ों पर पल रहे कूकुर उस प्रधानमंत्री पर भौंक रहे हैं, जिसने उनको अबतक इस चोट से बचा कर रखा है।
ना कोई युद्ध हुआ था, ना कोई प्राकृतिक आपदा आई थी। लेकिन दस वर्ष के कांग्रेसी कुशासन का कहर देश पर ऐसा बरसा था कि, कांग्रेस का बेशर्म बेईमान वित्तमंत्री चिदंबरम देश को सोना नहीं खरीदने की सलाह दे रहा था।
नशेड़ी अधेड़ यह भूल गया या भूलने का ढोंग कर रहा है।
ममता बनर्जी के इस्लामी आतंकी लफंगों से कनेक्शन!
मार्च 2021 में, नरेंद्र मोदी बांग्लादेश की आज़ादी की स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने के लिए ढाका गए थे। उनकी यात्रा के विरोध में, हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम ने देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए, और तो और, PM मोदी को "इस्लाम का दुश्मन" बताकर उनके खिलाफ जिहाद छेड़ने का भी आह्वान किया। पश्चिम बंगाल में बैठी ममता बनर्जी ने एक बयान जारी कर हिफ़ाज़त के मोदी-विरोधी प्रदर्शन के साथ एकजुटता ज़ाहिर की और भारतीय प्रधानमंत्री को बांग्लादेश जाने से रोकने की मांग की। उन्होंने तो एक कदम आगे बढ़कर मोदी को मुसलमानों का दुश्मन तक करार दे दिया। ममता के इस बयान के बाद, हिफ़ाज़त के लोग बेकाबू हो गए और देश भर में हिंदू मंदिरों और घरों पर हमले करने लगे। शारीरिक हमलों और बलात्कार की घटनाएं भी सामने आईं। इस तरह की हिंसक वारदातों की साज़िश पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस (ISI) ने रची थी और इसके लिए फंडिंग भी उसी ने की थी।
यह खास घटना साफ तौर पर ममता बनर्जी के इस्लामी कनेक्शन को साबित करती है।
ममता बनर्जी का भारत-द्रोहियों संग कनेक्शन-2
भाजपा ने बंगाल में जीत हासिल कर ली है, लेकिन इसकी हलचल बांग्लादेश में भी महसूस हो रही है। कल जुम्मा की नमाज़ के बाद, जमात-ए-एनसीपी के नेता नासिरुद्दीन पटवारी ने कहा, “भगवा झंडा अब हमारे बेहद करीब आ गया है। भगवा झंडे का मुकाबला करने के लिए हमें एकजुट रहना होगा और मुस्लिम युवाओं को मस्जिदों में लाना होगा।” ज़रा सोचिए, यहाँ अवैध रूप से रह रहे लोगों की क्या हालत होगी!
ममता बनर्जी का भारत-द्रोहियों संग कनेक्शन-1
बांग्लादेशी सांसद और भारत/हिंदू विरोधी एनसी पार्टी के मुखिया नाहिद इस्लाम ने भारत के खिलाफ ज़हर उगला:
"ममता बनर्जी चुनाव हार गई हैं, हमारा समर्थन नहीं। उन्हें दिल्ली छोड़कर नहीं जाना चाहिए, बल्कि दिल्ली से लड़ना चाहिए। 17 करोड़ बांग्लादेशी मुसलमान उनके साथ हैं।"