जिला देवरिया के भरावटा गाँव मे संचालित प्राइवेट स्कूल मे पढ़ने वाली इस नाबालिक लड़की का वीडियो सुन मन व्यथित है ये एक राजनीति और जातिवादी से उपर उठकर हिंदुओं के खिलाफ सुयोजित तरीके से फैलाया गया जाल है
लड़की की मां ने उसे समझाया और जब वो न मानी तो उसे अनिरुद्धाचार्य जी की कथा मे ले गई और वहाँ लड़की ने ये खुलासा किया हैं
लव जिहादी चुस्लिम कट्टरपंथी छात्र हिन्दू धर्म की-छात्राओं के साथ दोस्ती करके अपने जाल में फंसाने का कुकर्म कृत्य करने में लगे हुए हैं जबकि यह स्कूल भी हिन्दू धर्म के यादव परिवार द्वारा संचालित होता है और लड़की भी यादव है लड़की की माने तो पूरी की पूरी स्कूल क्लास की छात्राओं को ही फ़साने की कोशिश की जा रही है हिन्दू का स्कूल होने पर यह हाल है तो मुस्लिम संचालित स्कूलों का क्या हाल होता होगा उसमें और भी बुरे हालात होंगे इससे इंकार नहीं किया जा सकता..... [ यह लोग 18 साल से छोटे बच्चियों को ही टारगेट करते हैं क्योंकि उनमें समझने की क्षमता कम होती है और यह लोग बड़े होते हैं इसलिए लड़कियां इनके बातों में आकर के कुछ भी गलत कार्य कर जाती हैं ]
हिंदुओं को जाति मे बाट कर धर्म विरोधी अपने कार्यों में लगे है..... और वह धीरे-धीरे सफल भी हो रहे हैं सोचना आप सबको है....
The people of Tamil Nadu will definitely hand Annamalai the Chief Minister's post...!!
The Tamil language plays a significant role in Tamil Nadu politics...
Therefore, Annamalai's progress while with the BJP became extremely difficult... His future was bleak.
Annamalai is now forming a new party and preparing for 2031...
If the people of Tamil Nadu are truly educated and visionary, they will definitely make this person the Chief Minister...!!
#AnnamalaiResigned
#Annamalai
कर्मयोगी,एक संन्यासी का संकल्प, एक जननायक का विजन! 🦁
भयमुक्त और प्रगतिशील उत्तर प्रदेश के शिल्पी, ओजस्वी वक्ता माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपकी कर्तव्यनिष्ठा और कड़े फैसले आज उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।प्रभु श्री राम आपको सदैव स्वस्थ, ऊर्जावान और दीर्घायु रखें। 🔱🚩
#योगी_आदित्यनाथ #YogiAdityanath #UttarPradesh #सुशासन_पुरुष
कर्मयोगी,एक संन्यासी का संकल्प, एक जननायक का विजन! 🦁
भयमुक्त और प्रगतिशील उत्तर प्रदेश के शिल्पी, ओजस्वी वक्ता माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपकी कर्तव्यनिष्ठा और कड़े फैसले आज उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।प्रभु श्री राम आपको सदैव स्वस्थ, ऊर्जावान और दीर्घायु रखें। 🔱🚩
#योगी_आदित्यनाथ #YogiAdityanath #UttarPradesh #सुशासन_पुरुष
Environment & Ecology( Protected area's National Park) and Geography plus Current affairs related Question
UPSC CSE PRELIMS 2026 GS1 ( C )
Q.02
Nature and Subject of the Question & Analysis of the correct answer 👇👇
#UPSC_CSE#CDS#SSC#MCQ#PYQ
Statement-wise Analysis
Statement 1 : "इसे वर्ष 2025 में भारत का टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया था।"
Analysis : यह statement Current Affaire पर आधारित है। माधव राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है। ऐतिहासिक रूप से यह बाघों का घर रहा है, लेकिन बीच में यहाँ बाघ विलुप्त हो गए थे। हाल ही के वर्षों में (विशेषकर 2023 से) यहाँ बाघों को फिर से बसाने (Tiger Reintroduction) का एक बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है।
Statement 2 : "साख्य सागर, जिसे रामसर स्थल के रूप में नामित किया गया है, इस राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है।"
Analysis : यह कथन पूर्णतः सत्य है और स्थैतिक (Static) तथा करंट दोनों का बेहतरीन संयोजन है।
fact : Sakhya Sagar एक कृत्रिम झील है जो माधव राष्ट्रीय उद्यान के ठीक अंदर स्थित है। वर्ष 2022 में इसे Ramsar Site यानी अंतर्राष्ट्रीय महत्व की Wetland घोषित किया गया था।
Conclusion : यह एक ऐसा मजबूत तथ्य (Solid Fact) है, जिसके पता होने पर प्रश्न हल करना बेहद आसान हो जाता है।
Statement 3 : "इसका क्षेत्रफल मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच में साझा नही होता है।"
Facts : माधव राष्ट्रीय उद्यान पूरी तरह से मध्य प्रदेश राज्य (शिवपुरी जिले) की सीमा के भीतर स्थित है। यह राजस्थान के साथ अपनी सीमा साझा नहीं करता है।
Takeaway:
This question is a perfect example of how to combine static geography (the location of a park) with recent environmental current affairs (Ramsar site status and tiger relocation). It's beneficial to study in-depth the locations of important national parks and the lakes/rivers within them.
Environment & Ecology( Protected area's National Park) and Geography plus Current affairs related Question
UPSC CSE PRELIMS 2026 GS1 ( C )
Q.02
Nature and Subject of the Question & Analysis of the correct answer 👇👇
#UPSC_CSE#CDS#SSC#MCQ#PYQ
Analysis of the Correct Answer
Geographical location : तुंगुराहुआ (Tungurahua) दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के देश इक्वाडोर (Ecuador) में स्थित एक बहुत ही सक्रिय स्ट्रैटो-ज्वालामुखी (stratovolcano) है।
local importance : यह एंडीज पर्वतमाला (Cordillera Oriental) का हिस्सा है। स्थानीय क्वेशुआ (Quechua) भाषा में 'तुंगुराहुआ' का अर्थ "आग का गला" (Throat of Fire) होता है।
UNESCO recognition : किसी क्षेत्र को 'यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क' घोषित करने का अर्थ है कि उस क्षेत्र की भूवैज्ञानिक विरासत (geological heritage) अंतरराष्ट्रीय महत्व की है और वहाँ संरक्षण, शिक्षा और सतत विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
1. प्रश्न की प्रकृति और विषय (Nature and Subject of the Question)
यह प्रश्न मुख्य रूप से दो विषयों का मिश्रण है:
विश्व भूगोल (World Geography): इसके तहत दुनिया के प्रमुख ज्वालामुखियों और उनकी भौगोलिक स्थिति की जानकारी जांची जा रही है।
समसामयिक घटनाएँ (Current Affairs): प्रश्न में "वर्ष 2025" और "यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क" का उल्लेख है, जो यह दर्शाता है कि यह हाल ही में चर्चा में रहे किसी महत्वपूर्ण भौगोलिक या पर्यावरणीय घटनाक्रम पर आधारित है।
जिला देवरिया के भरावटा गाँव मे संचालित प्राइवेट स्कूल मे पढ़ने वाली इस नाबालिक लड़की का वीडियो सुन मन व्यथित है ये एक राजनीति और जातिवादी से उपर उठकर हिंदुओं के खिलाफ सुयोजित तरीके से फैलाया गया जाल है
लड़की की मां ने उसे समझाया और जब वो न मानी तो उसे अनिरुद्धाचार्य जी की कथा मे ले गई और वहाँ लड़की ने ये खुलासा किया हैं
लव जिहादी चुस्लिम कट्टरपंथी छात्र हिन्दू धर्म की-छात्राओं के साथ दोस्ती करके अपने जाल में फंसाने का कुकर्म कृत्य करने में लगे हुए हैं जबकि यह स्कूल भी हिन्दू धर्म के यादव परिवार द्वारा संचालित होता है और लड़की भी यादव है लड़की की माने तो पूरी की पूरी स्कूल क्लास की छात्राओं को ही फ़साने की कोशिश की जा रही है हिन्दू का स्कूल होने पर यह हाल है तो मुस्लिम संचालित स्कूलों का क्या हाल होता होगा उसमें और भी बुरे हालात होंगे इससे इंकार नहीं किया जा सकता..... [ यह लोग 18 साल से छोटे बच्चियों को ही टारगेट करते हैं क्योंकि उनमें समझने की क्षमता कम होती है और यह लोग बड़े होते हैं इसलिए लड़कियां इनके बातों में आकर के कुछ भी गलत कार्य कर जाती हैं ]
हिंदुओं को जाति मे बाट कर धर्म विरोधी अपने कार्यों में लगे है..... और वह धीरे-धीरे सफल भी हो रहे हैं सोचना आप सबको है....
Title: The TRP Game and the Indian Media's Downfall: When Journalism Becomes a Business
आज के समय में भारतीय टेलीविजन मीडिया और इसके कुछ चर्चित 'सेलिब्रिटी एंकर्स' अपने मूल कर्तव्य से पूरी तरह भटक चुके हैं। पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना, देश के विकास (Development), अर्थव्यवस्था और भविष्य की बात करना था, लेकिन आज यह केवल एक 'प्रायोजित शोर-शराबे' का मंच बनकर रह गया है।
1. नफरत और ध्रुवीकरण का बाज़ार
क्या आपने कभी प्राइम टाइम पर शिक्षा, रोजगार, विज्ञान-तकनीक (Science & Tech) या पर्यावरण (Environment) पर कोई सार्थक बहस देखी है? नहीं। क्योंकि इन वास्तविक मुद्दों से टीआरपी नहीं मिलती। इसकी जगह स्क्रीन को 'हिंदू-मुस्लिम' जातिवाद नफरत को रंग देना और नफरत फैलाने वाले नैरेटिव से भर दिया जाता है। यह एक सोची-समझी रणनीति है ताकि जनता का ध्यान बुनियादी समस्याओं और नीतियों की विफलताओं से भटकाया जा सके।
2. तुलना का खोखलापन: विकसित देशों से क्यों नहीं?
एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में, भारत की तुलना आर्थिक नीतियों, रक्षा समझौतों और तकनीकी प्रगति में विकसित देशों या चीन जैसी शक्तियों से होनी चाहिए। लेकिन हमारे टीवी न्यूज़ चैनल हर दिन हमारी तुलना उस देश (पाकिस्तान, बांग्लादेश) से करते हैं, जो खुद अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। अपने से कमजोर से तुलना करके झूठा गौरव महसूस कराना, देश की वास्तविक महत्वाकांक्षाओं को सीमित करने और आत्मसंतुष्टि में डूबे रहने की साजिश है।
3. विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) की कड़वी सच्चाई
हम चाहे जो दावे करें, लेकिन वैश्विक स्तर पर आंकड़ों की सच्चाई छुपती नहीं है। 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स' में भारत की रैंकिंग लगातार गिरते हुए 150 के पार पहुँच चुकी है (हालिया वर्षों में 157-161 के आसपास)। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से बताता है कि हमारी मीडिया का एक बड़ा हिस्सा अब स्वतंत्र नहीं है। वह जवाबदेही तय करने के बजाय सत्ता के पक्ष में काम कर रहा है।
4. जवाबदेही का अंत और असली मुद्दों से भटकाव : जब सिस्टम की कमियों—जैसे पेपर लीक, लचर शिक्षा व्यवस्था या आर्थिक मंदी—पर सवाल उठते हैं, तो कुछ एंकर्स पत्रकारिता के नाम पर केवल एजेंडा सेट करने का काम करते हैं। वे उन लोगों (जैसे स्वतंत्र शिक्षकों या युवाओं) पर निशाना साधते हैं जो वास्तव में मेहनत कर रहे हैं, ताकि खुद के खोखलेपन और पूर्वाग्रहों को छुपा सकें।
Conclusion:
True nationalism lies in asking the right questions and caring about the country's future. Until we reject this TRP-driven and 'hate-fueled' media model and embrace fact-based alternative media, we will never truly see the country's development.
You're just a casteist hypocrite; the people of Uttar Pradesh have seen your hypocrisy long ago [You're the Samajwadi Party's pet dogs, who are getting biscuits on time these days...]
You oppose #UGC only in Uttar Pradesh, otherwise you remain silent wherever the Chief Minister is of your own caste...
All upper caste people should see that lowly people like you ultimately stick to their Brahmin identity. Any Kshatriya, Vaishya, or other community that associates with them is no bigger fool than them...? Everyone should stay away from these casteist people, it's in the best interest of the upper caste society.
गोपाल शर्मा जी को न्याय दिलाने की बात करना ही अगर जातिवाद हैं
उत्तरप्रदेश सरकार से गोपाल शर्मा को न्याय दिलाने की बात करना जातिवाद हैं गोपाल शर्मा के पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना जातिवाद हैं
अगर इंसाफ की बात करना सत्य बोलना अगर जातिवाद हैं तो में हूँ
ब्राह्मण वादी क्यों की सौभाग्य से मेरा जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ हैं
और स्वर्ण समाज का ठेका केवल ब्राह्मणों ने नहीं लिया एक साथ सभी
को चलना होगा चाहे वो ब्राह्मण हो क्षत्रिय हो वैश्य हो कायस्थ हो
सभी को एक साथ चलना होगा किसी को न्याय दिलाने के लिए
आवाज उठाना कोई जातिवाद नहीं होता…..
ओम नमो नारायण
#हिमालय #हिमालय_हमारा_देवालय_है #कालीसेना
#जागो_सनातनी_जागो #स्वामीआनंदस्वरूप #स्वामीआनंदस्वरूप
@grok The creature that causes the most harm to this earth is human being... Human beings have committed the most carnage in the entire world and have killed animals and destroyed nature.
Title: The TRP Game and the Indian Media's Downfall: When Journalism Becomes a Business
आज के समय में भारतीय टेलीविजन मीडिया और इसके कुछ चर्चित 'सेलिब्रिटी एंकर्स' अपने मूल कर्तव्य से पूरी तरह भटक चुके हैं। पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना, देश के विकास (Development), अर्थव्यवस्था और भविष्य की बात करना था, लेकिन आज यह केवल एक 'प्रायोजित शोर-शराबे' का मंच बनकर रह गया है।
1. नफरत और ध्रुवीकरण का बाज़ार
क्या आपने कभी प्राइम टाइम पर शिक्षा, रोजगार, विज्ञान-तकनीक (Science & Tech) या पर्यावरण (Environment) पर कोई सार्थक बहस देखी है? नहीं। क्योंकि इन वास्तविक मुद्दों से टीआरपी नहीं मिलती। इसकी जगह स्क्रीन को 'हिंदू-मुस्लिम' जातिवाद नफरत को रंग देना और नफरत फैलाने वाले नैरेटिव से भर दिया जाता है। यह एक सोची-समझी रणनीति है ताकि जनता का ध्यान बुनियादी समस्याओं और नीतियों की विफलताओं से भटकाया जा सके।
2. तुलना का खोखलापन: विकसित देशों से क्यों नहीं?
एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में, भारत की तुलना आर्थिक नीतियों, रक्षा समझौतों और तकनीकी प्रगति में विकसित देशों या चीन जैसी शक्तियों से होनी चाहिए। लेकिन हमारे टीवी न्यूज़ चैनल हर दिन हमारी तुलना उस देश (पाकिस्तान, बांग्लादेश) से करते हैं, जो खुद अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। अपने से कमजोर से तुलना करके झूठा गौरव महसूस कराना, देश की वास्तविक महत्वाकांक्षाओं को सीमित करने और आत्मसंतुष्टि में डूबे रहने की साजिश है।
3. विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) की कड़वी सच्चाई
हम चाहे जो दावे करें, लेकिन वैश्विक स्तर पर आंकड़ों की सच्चाई छुपती नहीं है। 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स' में भारत की रैंकिंग लगातार गिरते हुए 150 के पार पहुँच चुकी है (हालिया वर्षों में 157-161 के आसपास)। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से बताता है कि हमारी मीडिया का एक बड़ा हिस्सा अब स्वतंत्र नहीं है। वह जवाबदेही तय करने के बजाय सत्ता के पक्ष में काम कर रहा है।
4. जवाबदेही का अंत और असली मुद्दों से भटकाव : जब सिस्टम की कमियों—जैसे पेपर लीक, लचर शिक्षा व्यवस्था या आर्थिक मंदी—पर सवाल उठते हैं, तो कुछ एंकर्स पत्रकारिता के नाम पर केवल एजेंडा सेट करने का काम करते हैं। वे उन लोगों (जैसे स्वतंत्र शिक्षकों या युवाओं) पर निशाना साधते हैं जो वास्तव में मेहनत कर रहे हैं, ताकि खुद के खोखलेपन और पूर्वाग्रहों को छुपा सकें।
Conclusion:
True nationalism lies in asking the right questions and caring about the country's future. Until we reject this TRP-driven and 'hate-fueled' media model and embrace fact-based alternative media, we will never truly see the country's development.
हम कोचिंग सिस्टम को शुरुआत से सही नहीं मानता लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि हमें कोचिंग सिस्टम की जरूरत ही क्यों पड़ती है?
क्या हम अपने बच्चों को वह व्यवस्था दे रहे हैं जिससे उन्हें कोचिंग की जरूरत ना पड़े क्या अंजना ने कभी इस पर बात की है या पूरे मीडिया ने...
सच तो यह है कि हमारा एजुकेशन सिस्टम इतना खराब गटर में गिरा हुआ सिस्टम है कि हम ना चाहते हुए भी कोचिंग व्यवस्था की तरफ देखना पड़ता है लेकिन पैसे लेकर के शो करने वाले लोग कभी इस पर बात नहीं करेंगे...!
क्या भारत का एजुकेशन सिस्टम पूरे भारत के बच्चों को same playing field level Provide कराता है जबकि कंपटीशन एग्जाम सभी के लिए समान किया जाता है...
कॉन्वेंट स्कूल, बोर्ड बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाले लड़के और सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले लड़के क्या एक समान एग्जाम को दे सकते हैं क्या वहां पर समानता दिखती है अगर कोचिंग वाले ना हो तो हम उस असमानता को खत्म कर सकते हैं? अगर कर सकते हैं तो इस पर बात क्यों नहीं करते पत्रकार भारत की मेंस्ट्रीम मीडिया...अंजना की औलादें कहां पर पड़ रही हैं क्या उसने सरकारी स्कूल में पढ़ाया है अपने बच्चों को ?