• क्या दिल्ली पुलिस के पास महिला पुलिसकर्मी नहीं हैं?
• क्या महिला सांसद को पुरुष पुलिसकर्मी द्वारा जबरन बस में ठूंसा जाना ठीक है?
अमित शाह की पुलिस ने आज न सिर्फ लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि महिला सम्मान की सारी मर्यादाएं लांघ दीं।
देश की महिला सांसद के साथ ऐसा दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शर्म आनी चाहिए!!
गिरफ़्तार करो, जेल में डालो, फर्क नहीं पड़ता - मोदी सरकार की सत्ता की ताकत से ज़्यादा बड़ी हमारे सत्याग्रह की शक्ति है।
हमारे बच्चों के साथ हुए अत्याचार का हिसाब तो देना ही होगा।
तानाशाह सरकार डर कर काँप रही है।
पहले शिक्षा व्यवस्था को बरबाद किया,
करोड़ों बच्चों का भविष्य बिगाड़ा,
150 से ज़्यादा पेपर लीक करवाए,
25 बच्चों की जान चली गई ,
जब छात्र न्याय माँगने सड़कों पर उतरे,
तो उनपर लाठीचार्ज किया, डंडे बरसाए !
संसद के गेट बंद करवाकर, सांसदों को क़ैद किया,
Debate के लिए साझा विपक्ष की बात नहीं मानी,
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त नहीं किया,
मोदी जी छात्रों पर अत्याचार पर मौन रहे,
गृह मंत्री जिनका दिल्ली पुलिस पर नियंत्रण है,
हमारी माँग करने के बावजूद उनका कोई बयान नहीं आया !!
अब जब कांग्रेस और विपक्ष के सांसद प्रधानमंत्री निवास के आगे धरना दे रहे हैं तो हमारे सांसदों को घसीट-घसीट कर ले गए है।
नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi को बलपूर्वक ले जाया गया है।
ये कौन सा लोकतंत्र है?
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
In an age where noise has become the loudest weapon, Sonam Wangchuk turned silence into the strongest voice.
Don't let this gem become just another forgotten legend.
'हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए'
@Raunak_194 | Sonam Wangchuk | CJP
"I don't want the real Fungsuk Wangdu to die"
Chatur from 3 Idiots calls for support for Sonam Wangchuk & appeals to listen to his cause!!
Finally people are speaking up !!
UPPCS 2026 मुख्य परीक्षा में "मुख्यमंत्री फेलोशिप" शोधकर्ताओं को अतिरिक्त अंक देने का निर्णय भेदभावपूर्ण है।
यह सामान्य और मेधावी छात्रों के "समान अवसर'' के संवैधानिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
चयन में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे तुरंत वापस लिया जाए।
#RemoveCMFellowQuota
"UPPCS 2026 मुख्य परीक्षा में 'मुख्यमंत्री फेलोशिप' शोधकर्ताओं को अतिरिक्त अंक देने का निर्णय भेदभावपूर्ण है। यह सामान्य और मेधावी छात्रों के 'समान अवसर' के संवैधानिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है। चयन में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे तुरंत वापस लिया जाए।"
#RemoveCMFellowQuota@myogiadityanath@DyCMGoUP@spgoyal@yadavakhilesh@RahulGandhi
The Government of Uttar Pradesh and the Uttar Pradesh Public Service Commission should immediately withdraw this arbitrary order. #RemoveCMFellowQuota
This quota will:
• Adversely affect the merit-based selection process.
• Encourage corruption and favoritism. @UPGovt
UPPCS 2026 मुख्य परीक्षा में "मुख्यमंत्री फेलोशिप" के शोधकर्ताओं को अतिरिक्त अंक देने का निर्णय अनेक अभ्यर्थियों के अनुसार समान अवसर एवं निष्पक्ष चयन के सिद्धांत के विपरीत है।
📅 डिजिटल आंदोलन
🗓️ 30 जून | ⏰ सुबह 11:00 बजे
📍 X (Twitter)
#RemoveCMFellowQuota
UPPSC जैसी संवैधानिक भर्ती परीक्षा में किसी भी प्रकार का विशेष कोटा या विशेष लाभ स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। मेरिट ही चयन का एकमात्र आधार होना चाहिए।
CM Fellowship से जुड़े प्रावधान के कारण लाखों मेहनती प्रतियोगियों के बीच असंतोष और समान अवसर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हमारी मांग है कि इस व्यवस्था को तत्काल वापस लिया जाए और सभी अभ्यर्थियों के लिए एक समान नियम लागू किए जाएं।
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी एवं माननीय मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश से आग्रह है कि अभ्यर्थियों के हित में शीघ्र हस्तक्षेप करें और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण निष्पक्षता सुनिश्चित करें।
@myogioffice@ChiefSecyUP
#RemoveCMFellowQuota #SaveUPPSC #OneRuleForAll #FairUPPSC
आज लखनऊ के ईको गार्डन में छात्रों और युवाओं ने अपनी जायज़ मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
युवाओं की मांग है कि सभी प्रतियोगी परीक्षाएँ समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएँ। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जाए, ताकि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
युवाओं का स्पष्ट संदेश है - रोज़गार और भर्ती व्यवस्था में ईमानदारी चाहिए, पेपर लीक और भ्रष्टाचार नहीं।
‘गुरूरमंद हुक्मरानों’ तक पहुँचे ये आवाज़
सुनो दरवाज़े पर खटखटा रहा है ‘बदलाव’
दरारें पड़ गईं क़िलों में, दरक रही बुनियाद
अब नौजवानों ने भी कर दिया है इंक़लाब!
ज़हरीली साज़िशों से तब तक न निजात मिल पाएगी जब तक केवल शाख पर उँगली उठाई जाएगी और सिर्फ़ वो शाख हटाई जाएगी, असली आज़ादी, तरक़्क़ी और इंसाफ़ तब मिलेगा जब इस गुनाह का असली तना और ज़मीन के अंदर गहरी छुपी दीमकी जड़ उखाड़ी जाएगी।
एक देश-एक आवाज़ मतलब इंक़लाब!
#BJP_बनाम_CJP
प्रयागराज: BJP देश के युवाओं को अनपढ़ और बेरोज़गार रखना चाहती है।
अगर युवा बेरोज़गार रहेगा तभी तो BJP का झंडा उठायेगा।
आज पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष श्री अनुग्रह नारायण सिंह, श्री के.के.राय के साथ प्रेसवार्ता कर छात्र नेता आशुतोष पांडेय और पंकज पांडेय को रिहा करने की माँग की।
अब पूरे यू पी में होगा “पेपर लीक पर चर्चा” का कार्यक्रम।