संविधान कभी क्लब नहीं हो सकता :
राजस्थान की आत्मा के बरक्स अभिजात्य की अश्लील इमारतें
अभी मेरे एक पुराने साम्यवादी मित्र ने मुझे कंस्टीट्यूशन क्लब में बुलाया। जाने का मन नहीं हुआ। आज युवा पत्रकारों की कल RIC में होने वाली वर्कशॉप का निमंत्रण मिला। कोई विनम्र बहाना सोचता, उससे पहले ही भीतर से जवाब निकल गया—मैं तो RIC नहीं जाता।
एक बार वहाँ साहित्यिक कार्यक्रम में गया था। साहित्यिक लोगों की उपेक्षा देखकर मन जैसे भीतर से ठंडा पड़ गया। वह परिसर मुझे कला का नहीं, अभिजात्य आकांक्षाओं का चमकता हुआ दरबार लगा। सरकारें निर्धन, साधनहीन और जीवित सांस्कृतिक संस्थाओं का उपहास उड़ाती हैं और यह उपहास उड़वाने में उन्हें अजीब सुख मिलता है। साहित्य अकादमी के लिए धन नहीं होगा, लोकभाषाओं और लेखकों के लिए संसाधन नहीं होंगे, मगर आलीशान भवनों, काँच की दीवारों और कुलीनता की अश्लील इच्छाओं पर पूरा बजट लुटा दिया जाएगा।
किसी शहर की इमारतें केवल पत्थर, काँच, संगमरमर और रोशनी की संरचनाएँ नहीं होतीं। वे उस शहर की देह पर उभरे हुए विचार होते हैं। कभी धड़कते हुए, कभी सूखे हुए, कभी किसी जीवित त्वचा की तरह नम और स्पर्शशील और कभी मृत अभिजात्य की तरह ठंडे, चिकने और निर्विकार।
जयपुर में जवाहर कला केंद्र को देखिए, गांधी वाटिका को देखिए और फिर राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर को देखिए। तीनों को एक साथ देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि भवन भी मनुष्य की तरह आत्मा रखते हैं या आत्मा से रिक्त हो जाते हैं।
जवाहर कला केंद्र में प्रवेश करते हुए लगता है जैसे राजस्थान की मिट्टी ने अपने भीतर की अग्नि, रंग, लय और लोक-स्मृति को किसी स्थापत्य में रूपांतरित कर दिया हो। वहाँ कला किसी कुलीन ड्रॉइंगरूम की सजावटी वस्तु नहीं है; वह लोक की सांस है, थार की हवा है, मांड की खिंचती हुई तान है, फड़ चित्रकला का खुला हुआ पट है, बंधेज के रंगों में धड़कती हुई स्त्रियों की उंगलियाँ हैं। वह परिसर अपने भीतर एक सांस्कृतिक देह रखता है—जीवित, गरम, स्पंदित, आमंत्रित करती हुई देह। वहाँ आधुनिकता किसी विदेशी इत्र की तरह ऊपर से छिड़की नहीं गई; वह लोक की देह से ही निकली हुई गंध है।
गांधी वाटिका को देखिए। वहाँ स्मृति है, भारत का गर्वीला इतिहास है, संयम है, नैतिकता की वह धीमी लौ है जो मनुष्य को सत्ता के प्रलोभन से बचाती है। वह जगह हमें चमकाती नहीं, भीतर से तपाती है। गांधी वाटिका में प्रवेश करना किसी स्मारक में जाना नहीं, अपनी ही आत्मा के सामने खड़े होना है। वहाँ सत्ता का वैभव नहीं, मनुष्य की लज्जा, करुणा, सत्य और नैतिक संघर्ष का ताप है। वह हमें बताती है कि सभ्यता चमकदार फर्शों पर नहीं, मनुष्य की अंत:करण-भूमि पर बनती है।
और इसी के बरक्स राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर एक अजीब ठंडे सौंदर्य का प्रतिनिधि प्रतीत होता है—ऐसा सौंदर्य जिसमें चमक तो है, पर स्पर्श नहीं; विस्तार तो है, पर आत्मीयता नहीं; भाषा तो है, पर अपनी मातृभाषा की धड़कन नहीं। वह भवन जैसे राजस्थान को उसके ही लोक से काटकर किसी अभिजात्य दर्पण में देखने की कोशिश करता है। उसमें वह देहगत उष्णता नहीं है जो राजस्थान के लोक-संगीत, लोक-नृत्य, लोक-कथाओं और लोक-भाषाओं में बहती है। वहाँ एक अंगरेज़ीदां चमक है, अंगरेज़ी मानसिकता की दासता है; पर वह चमक मिट्टी की नहीं, काँच की है; और काँच में चेहरा दिखता है, आत्मा नहीं।(1.) 👇
Eighty-seven doctors and medical staff have been allotted to a hospital that doesn't even exist.
To be fair, it's not the BJP government's fault. They've been rubbing Aladdin's chirag for six years for the hospital to appear magically.
But Aladdin is a Muslim. So, his chirag refuses to cooperate.
We propose booking Aladdin and his chirag under UAPA for this anti-national conspiracy.
MP government is innocent.
Eighty-seven doctors and medical staff have been allotted to a hospital that doesn't even exist.
To be fair, it's not the BJP government's fault. They've been rubbing Aladdin's chirag for six years for the hospital to appear magically.
But Aladdin is a Muslim. So, his chirag refuses to cooperate.
We propose booking Aladdin and his chirag under UAPA for this anti-national conspiracy.
MP government is innocent.
आज एक कार इंस्योरेंस वाले से बात हो रही थी। बातों बातों में वो फट पड़ा। कहा “मैं बीजेपी का कट्टर सपोर्टर था लेकिन इसने हमें बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इथेनॉल से गाड़ियों की समस्या बढ़ी है और आफ़त हम इस्योरेंस वालों पर भी आ रही है। राम मंदिर में घोटाला ये करें, मध्य प्रदेश में बिना अस्पताल बने कर्मचारियों को तनख़्वाह देकर घोटाला ये करें (ये मेरे लिए ख़बर थी क्योंकि मैंने ऐसा कहीं पढ़ा नहीं) और भुगतें हम लोग! मन फट चुका है देखना सर इन सब बातों का असर चुनाव में दिखेगा।”
मैंने ढाढ़स बँधाया। कुछ नहीं होगा। जनता सब भुला कर फिर बीजेपी को ही वोट करेगी। इस पर उसने बस इतना बोला, “मैं तो नहीं करूँगा”
इसके बाद मेरी गाड़ी के इंस्योरेंस का मोटा प्रीमियम कोटेशन बना कर भेज दिया। अब उससे बारगेन भी नहीं कर पा रहा 😭
@ravish_journo महिंद्रा, टाटा जैसो की पहले ही नकेल कस रखी है। एक लफ़्ज़ तक तो इनसे नहीं बोला जाता।
सब एलीट ने मान लिया है और लाखों बार साबित भी कर दिया है, कि आम भारतीय नकारा और लाचार नागरिक है जो सत्ता और पूंजी से पूरी तरह हार चुका है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक और खुलासा हुआ है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक- महाकुंभ के दौरान राम मंदिर में संगठित रूप से चढ़ावा चोरी को अंजाम दिया गया।
👉जब महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या 10 से 12 गुना तक बढ़ गई तो चढ़ावे की गिनती के लिए ट्रस्ट की सिफारिश पर एक्स्ट्रा स्टाफ जोड़ा गया
👉इस एक्स्ट्रा स्टाफ में कौन से लोग शामिल होंगे, ये ट्रस्ट ने ही तय किया था
👉एजेंसी का कहना है कि एक्स्ट्रा स्टाफ में शामिल लोगों ने कभी बैंकिंग, कैश काउंटिंग का काम नहीं किया था। ये पहले हाउसकीपिंग का काम करते थे
एजेंसी के मुताबिक- वे अपनी मर्जी से लोगों को नहीं चुन सकते थे। उन्हें आदेश था कि बेसिक वेरिफिकेशन कर लोगों को चढ़ावा गिनने के काम पर लगा दिया जाए।
साफ है: BJP-RSS ने पूरी प्लानिंग के साथ इस लूट को अंजाम दिया और ऐसा कर करोड़ों रामभक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है।
सवाल है:
• नरेंद्र मोदी इस चढ़ावा चोरी पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेंगे?
• 'डकैती' के बाद भी ट्रस्ट को भंग क्यों नहीं किया जा रहा है?
• चंपत राय समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
• क्या मोदी सरकार इस लूट के गुनहगारों को बचाने में लगी है?
राम मंदिर की महालूट मामूली घटना नहीं है। इसने हिंदुत्व ब्रिगेड को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है, मगर सबसे ज़्यादा पोल खुली है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की। संघ ख़ुद को हिंदू धर्म का ठेकेदार और राष्ट्र के चरित्र निर्माण की पाठशाला बताता रहा है मगर मंदिर की लूट ने साबित कर दिया है कि उसकी फैक्ट्री में निर्मित स्वयंसेवक धर्म का कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं।
वास्तव में ये संघ के इतिहास की एक निर्णायक घटना है। ये महात्मा गाँधी की हत्या और बाबरी मस्जिद को गिराए जाने जितना बड़ी कलंकित करने वाली घटना है। ये दिखाती है कि वह अपने स्वार्थों के लिए हिंदुओं को भी धोखा दे सकता है।
इससे भी ख़तरनाक़ बात ये हुई है कि संघ इस महालूट के महाअपराध को छिपाने की कोशिश कर रहा है, मामूली घटना बताकर खारिज़ करने की कोशिश कर रहा है। समझदार हिँदू देख रहे हैं कि कैसे मोदी और योगी की सरकारें फ़र्ज़ी एसआईटी बनाकर लीपा पोती कर रहे हैं। ये तक सामने नहीं आने दे रहे हैं कि लूट किस पैमाने पर हुई और उनके और आरएसएस द्वारा नियुक्त अधिकारियों की इसमें क्या हिस्सेदारी थी।
सवाल उठता है कि इस भंडाफोड़ से उसकी तथाकथित सौ साल की साधना का सत्यानाश नहीं हो गया है....क्या समर्थकों के सामने उसका चरित्र बेनकाब नहीं हो गया है? क्या वे ठगे हुए महसूस नहीं कर रहे होंगे? या फिर उनकी अँधभक्ति संघ को क्लीन चिट दे देगी और वह ख़ुद को साफ़-सुथरा साबित करने में कामयाब हो जाएगा?
I went for a job interview at Tech Mahindra with hope—but was humiliated for my religion. An employee mocked me after hearing my name, denied my identity despite Aadhaar, and said “Muslims are frauds.” attaching my pics
इंडियन एक्सप्रेस के इंटरव्यू में उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और यूएन स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग (UNHRC) के चेयरमैन जस्टिस एस. मुरलीधर ने कहा:
“मैं वास्तव में चाहता हूँ कि भारत सरकार अपनी विदेश नीति पर फिर से विचार करे और खुद से पूछे कि क्या हम मानवता के बुनियादी सिद्धांतों को नजरअंदाज होने देंगे? यदि हमारे सामने गंभीर सबूत मौजूद हैं और फिर भी हम कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में हम खुद को नैतिक रूप से सही नहीं ठहरा पाएंगे।”
उन्होंने अपील करते हुए कहा, “हम उन देशों से भी अपील कर रहे हैं जो इजरायल को हथियार सप्लाई करते हैं और भारत भी उनमें शामिल है कि वे ऐसा करना बंद करें।”
जस्टिस मुरलीधर ने आगे कहा, “अगर हम इतने स्पष्ट सबूतों पर कार्रवाई करने में नाकाम रहते हैं, तो हम भविष्य में खुद को कभी नहीं बचा पाएंगे।”
कुलभूषण जाधव मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जब कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने गिरफ्तार किया था और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली थी, तब भारत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) गया था। लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून की बात आती है, तो उसे ‘विदेशी’ कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।”
#JusticeMuralidhar #ForeignPolicy #IndiaIsrael #TCNLive
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आईफ़ोन 18 प्रो की गोपनीय सूचनाओं की हैकिंग👇
हैकरों ने भारत में एप्पल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से 630 गीगाबाइट से अधिक का गोपनीय डेटा चुरा लिया है. यह डेटा अब सार्वजनिक हो गया है. आईफ़ोन 18 प्रो सितंबर में लॉन्च होना है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एप्पल और टेस्ला जैसी कंपनियों के लिए एक प्रमुख वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनी है.
यह घटना टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की साख के लिए बड़ा झटका हो सकती है. फ़ोन पर भी असर पड़ेगा. पहले से ही अपने फ़ोन में कुछ नया नहीं दे पाने के लिए एप्पल की आलोचना हो रही है. उसके रिसर्च का इज़रायल में होना भी उसकी छवि के लिए नुक़सानदेह हो रहा है.