यह दिमाग हिला देने वाला है 🤯
सभी टॉप 12 मेनस्ट्रीम चैनल राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर LIVE कवरेज कर रहे हैं
इसे टीवी पर लगभग 70M और सोशल मीडिया पर 28M लोगों ने देखा है
MASSIVE 🔥
राहुल गांधी चुनाव आयुक्त को लेकर 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे
◆ उन्होंने कहा, "संविधान के दुश्मनों का पर्दाफ़ाश हो गया है, न्याय ज़रूर होगा"
@RahulGandhi | #RahulGandhi | Rahul Gandhi | 4 PM
अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे में इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP पूरे देश में प्रदर्शन करेगी।
अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए चुनाव आयोग के CEC ज्ञानेश कुमार पर खूब सवाल उठाए।
अभिजीत दीपके ने तो 48 घंटे का Ultimatum दिया है कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा और हम तबतक नहीं हटेंगे जबतक वो इस्तीफा नहीं देंगे।
अब ज्ञानेश कुमार का मुद्दा पूरे देश में आग की तरह फैल गया है लेकिन इसमें CJP फिर से एक अहम रोल निभाने जा रही है।
वोट चोरी को लेकर अब देश की सबसे चर्चित लड़की AISA अध्यक्ष नेहा बोरा का भी स्टेटमेंट आ गया , नेहा बोरा ने कुछ दिन पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को लेकर भी बयानबाजी की थी ,
नेहा बोरा ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर ऐसा स्टेटमेंट दे दिया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी , दिल्ली के जंतर मंतर पर 23 दिन भूख हड़ताल पर बैठने वाली नेहा बोरा आज GENZ के लिये सबसे बड़ी हीरो है , नेहा बोरा के दिए हुए बयान छात्रों में एक अलग ही जोश पैदा करते है ,
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि " जब चुनाव आयोग ही डेमोक्रेटिक नहीं है तो इसका क्या प्रमाण है क़ि चुनाव आयोग डेमोक्रेटिक तरीके से चुनाव करवा सकता है " ,
नेहा बोरा के इस स्टेटमेंट के बाद ये साफ जाहिर हो रहा है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पूरा विपक्ष सहित देशी की जनता भी नाराज़ है क्योंकि जब जनता का वोट ही सुरक्षित नहीं है तो फिर जनता के वोट की कीमत क्या होगी ,
"मोदी सरकार को मालूम था कि एक दिन चुनाव आयोग के भीतर का खेल बाहर आएगा और जनता चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार करने की मांग करेगी। इसीलिए दिसंबर 2023 में मोदी सरकार ने कानून बनाया कि चुनाव आयुक्तों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। यह कानून तब बना जब दोनों सदनों के 141 सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। सदन में कोई विपक्ष ही नहीं था। अब समझ में आ रहा है कि वह कानून किसलिए बनाया गया था।"
“मोदी सरकार को मालूम था कि एक दिन चुनाव आयोग के भीतर का खेल बाहर आएगा और जनता चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार करने की मांग करेगी। इसीलिए दिसंबर 2023 में मोदी सरकार ने कानून बनाया कि चुनाव आयुक्तों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। यह कानून तब बना जब दोनों सदनों के 141 सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। सदन में कोई विपक्ष ही नहीं था। अब समझ में आ रहा है कि वह कानून किसलिए बनाया गया था।"
नरेंद्र मोदी के लाडले ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं।
इस बात की तस्दीक इंडियन एक्सप्रेस की ताजा रिपोर्ट करती है, जिसमें बताया गया है कि👇
• गोवा में जिन 97 वोटर्स का नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए- उन्हें लिस्ट में शामिल नहीं किया गया
• CEO गोवा ने इन वैलिड वोटर्स को लिस्ट में दोबारा से जोड़ने के लिए 7 दिन में 8 बार दिल्ली में चुनाव आयोग को मेल किया, लेकिन उन मेल का कोई जवाब नहीं आया
• CEO गोवा ने मेल में बताया था कि ये 97 मामले ऐसे हैं, जिनमें रोलबैक जरूरी है और पहले लिए गए फैसले को पलटते हुए इन्हें वोटर लिस्ट में जोड़ा जाना चाहिए
• चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र में कहा गया कि गोवा के EROs, ECINET के जरिए फैसले नहीं बदल पा रहे, क्योंकि उनके एक्सेस को दिल्ली से कंट्रोल किया जा रहा था
• हफ्ते में 8 बार मेल करने के बावजूद चुनाव आयोग से जवाब नहीं आया और आखिर में फाइनल लिस्ट छप गई, जिनमें ये 97 वोटर शामिल नहीं थे
- इस पूरे मामले से यह साफ है कि EROs/AEROs को चुनाव आयोग के पोर्टल का पूरा एक्सेस नहीं था, जिसके बारे में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने अगस्त में लिखा था
यानी- जो ज्ञानेश कुमार वोट के अधिकार पर बड़ी-बड़ी डींगे हांकते हैं, वही वोटरों का हक छीन रहे हैं।
नरेंद्र मोदी के इशारे पर ज्ञानेश कुमार ने पूरे सिस्टम को हाईजैक कर लिया है और 'वोट चोरी' जैसे देशविरोधी काम को अंजाम दे रहे हैं।
जब चुनाव आयोग पर इतने सारे सवाल उठ ही रहे हैं तो अब EVM पर भी सवाल करना शुरू करना चाहिए।
शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आज इस मुद्दे को उठाया भी है कि अब EVM से नहीं बल्कि बैलेट पेपर से चुनाव होना चाहिए।
साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने की भी मांग की है।
विपक्ष को भी अब एकजुट होकर इसी गर्म माहौल में इसकी मांग करनी चाहिए ताकि आने वाला चुनाव बैलेट पेपर पर हो सके जिससे विपक्ष की शंका भी दूर हो जाए।
भयावह। जागो जनता जागो। लुट गया लोकतंत्र का कारवां । मत करो ऐसा। मत होने दो ऐसा। इस देश को आज़ादी लाखों के संघर्ष और त्याग से मिली है। इसलिए नहीं कि वोट का अधिकार उनसे बीच राह में छीन लिया जाएगा। वोट का अधिकार आज़ादी का अधिकार है।
लोकतंत्र है, जनता तय करेगी किसे वोट देना है- कौन जीता, कौन हारा-जनादेश है… ये सब उपदेश जीतने के बाद सत्ता पक्ष देता है।
लोकतंत्र ये नहीं कि चुनाव वाले दिन मशीनों ने अच्छा काम किया। और चुनाव आयोग का काम इतना नहीं कि चुनाव के बाद आकर बताए कि कहाँ Highest % Voting हुई।
उससे पहले अगर आपने जनता को वोट देने का मौका ही निष्पक्ष और भरोसेमंद तरीके से नहीं दिया, तो काहे का लोकतंत्र?
चुनाव आयोग सरकार, विपक्ष या किसी पार्टी की संपत्ति नहीं है। ये 140 करोड़ लोगों की लोकतांत्रिक पूंजी है।
इसीलिए आयोग के भीतर से उठी हर गंभीर Procedural आपत्ति का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए। नहीं तो अब बहुत हुआ, ज्ञानेश जी- आपकी इस्तीफे की मांग होनी चाहिए
आज से ठीक 1 साल पहले जब राहुल गांधी जी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाया था और कहा था कि
मुझे एक बार चुनाव आयोग का डेटा अगर मिल जाता है तो मैं साबित कर दूंगा कि वोट चोरी हुई है और लोग चोरी से ही सरकार बनाए हैं।
आज राहुल गांधी जी सही साबित हुए और ताज्जुब होता है कि इतने दूरदर्शी नेता को लोग पप्पू कहते रहते हैं। ऐसे लोगों को एकबार फिर से अपना नजरिया बदलना चाहिए।
राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति बहुत ही बेहतर है वो अलग बात है कि सत्ता में नहीं आ पाए हैं लेकिन PM पद के दमदार दावेदार हैं।