कांग्रेस की रुचिरा चतुर्वेदी ने कहा कि बच्चों को ढंग का खाना तक नहीं दे पा रहे हैं लेकिन महाराज के लिए हर रोज़ 2.3 करोड़ रुपये का प्रचार ज़रूरी है.
#BJP#UP
Deeply saddened by the loss of lives and widespread devastation caused by landslides and flash floods across Nagaland and Arunachal Pradesh.
My heartfelt condolences to the bereaved families, and wishes for a swift recovery to the injured
I urge Congress workers to support the relief and restoration efforts in every possible way. I stand in solidarity with every affected family in this difficult hour.
This is belt treatment 🔥
Aman Chopra –– Is there any theft case against you?
Pappu Yadav 😂 –– I was born with 6000 acres land, did your grandfather even see this much land?
Aman Chopra –– Don't get personal
Pappu Yadav 😂 –– I distribute money more than your salary everyday, so mind what you are asking
This B&D needs this kind of counter attack
योगी सरकार ने 8 साल तक हर दिन 2.3 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए: रिपोर्ट
न्यूजलॉन्ड्री की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद वित्त वर्ष 2017-18 से 2024-25 के बीच विज्ञापन और प्रचार पर कुल 6,811.94 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
यानी औसतन हर दिन करीब 2.32 करोड़ रुपये। यह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लगभग 1.5 करोड़ रुपये प्रतिदिन के औसत विज्ञापन खर्च से ज्यादा है। यह आंकड़ा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के बजट दस्तावेजों पर आधारित है।
2017-18 में खर्च 294.86 करोड़ रुपये था, जो 2018-19 में 330 करोड़ और 2019-20 में 481.67 करोड़ हो गया। कोविड वर्ष 2020-21 में यह घटकर 392.88 करोड़ रहा, लेकिन उसके बाद तेज बढ़ोतरी हुई। 2021-22 में 1,134.31 करोड़, 2022-23 में रिकॉर्ड 1,420.03 करोड़, 2023-24 में 1,366.34 करोड़ और 2024-25 में 1,391.18 करोड़ रुपये खर्च हुए।
2025-26 के लिए 918.83 करोड़ का बजट रखा गया है। अगर पूरी रकम खर्च हुई तो नौ साल में कुल खर्च करीब 7,730 करोड़ रुपये पहुंच सकता है।
कुल खर्च का 83 प्रतिशत से ज्यादा यानी 5,658.16 करोड़ रुपये अखबार, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन में गया। पुस्तिकाओं और पर्चों पर करीब 896.64 करोड़ रुपये खर्च हुए।
न्यूज़लॉन्ड्री ने RTI के जरिए यह जानने की कोशिश की कि किस मीडिया संस्थान को कितना सरकारी विज्ञापन मिला, लेकिन सूचना विभाग ने पूरी जानकारी नहीं दी
#YogiAdityanath #UPGovernment #UPNews #UttarPradesh #TCNLive
‘प्रचारजीवी’!
जैसे अयोध्या जाने का रिकॉर्ड बनाकर भी अंततः मुख्यमंत्री जी को बदनामी के सिवा कुछ नहीं मिला वैसे ही ‘आत्म-प्रशंसा के झूठे विज्ञापनों पर 2.3 करोड़ प्रतिदिन ख़र्च करके भी मुख्यमंत्री जी को अपयश के सिवा कुछ नहीं मिला।’
लखनऊ के अग्निकांड में अपने बच्चे को खोनेवाली ‘दुखी माँ’ से किये गये मुख्यमंत्री जी के दुर्व्यवहार का वीडियो जब पूरी दुनिया में देखा गया तो लोगों को वो पुराने वीडियो भी याद आ गये जिसमें मुख्यमंत्री जी ने कोविड के दौरान एक कर्तव्यनिष्ठ ज़िलाधिकारी से अशोभनीय वार्तालाप किया था या फिर एक सत्यनिष्ठ प्रोफ़ेसर साहब व पत्रकार से दुर्वचन कहे थे।
मुख्यमंत्री जी का कार्यकाल सदैव इस रूप में ही इतिहास में दर्ज़ होगा कि इन्हीं के समय में अयोध्या के प्रभुराम जी के मंदिर में ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी हुई थी और आरोपियों को बचाने के लिए मुख्यमंत्री जी ने जो दोषपूर्ण SIT बनाई थी, उस पर किसी को विश्वास नहीं था और उसके बाद दिल्ली ने अपनी SIT बनाई थी।
इसके अतिरिक्त विपक्ष पर झूठे मुक़दमे लगाने, बुलडोज़र के दुरुपयोग व झूठे एनकाउंटर से प्रतिशोधात्मक राजनीति करने; पीडीए पर अत्याचार, ‘हाता नहीं भाता’ के घृणास्पद सत्य; लोगों के घर, दुकान व विश्वविद्यालय तक गिराने; भ्रष्टाचार के स्वर्ण-ठोसीकरण, हिरासत में मौतों के रिकार्ड व पुलिस व अन्य प्रशासन के अपराधीकरण के लिए भी मुख्यमंत्री जी का दुशासन काल नकारात्मक रूप से दर्ज़ होगा… और हाँ डबल इंजन की टकराहट की वजह से बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी ज़रूरतों की बदहाली के दौर के रूप में भी।
बिना विचार के प्रचार से कुछ हासिल नहीं होता है।
मुख्यमंत्री जी अकेले में बैठकर सचेत होकर सोचें तो उन्हें ये पता चलेगा कि : ‘उनका प्रचार तंत्र ही कर रहा है उनका अंत’