🔸रामचरितमानस के सुंदरकांड में प्रभु “ श्री राम ” ओर समुद्र का बहुत ज्ञानवर्धक संवाद🔸
रामजी, सुग्रीव और बिभीषणजी से पूछते हैं कि अब इस गहरे समुद्र को किस प्रकार पार किया जाए?
विभीषणजी कहते हैं- हे रघुनाथजी! सुनिए यद्यपि आपका एक बाण ही करोड़ों समुद्रों को सोख सकता है। तथापि नीति ऐसी कही गयी है कि पहले समुद्र से प्रार्थना की जाए।
समुद्र आपके कुल में बड़े हैं, वे विचार कर उपाय बतला देंगे। और इस प्रकार सेना बिना परिश्रम के समुद्र के पार उतर जाएगी। रामजी को यह बात अच्छी लगी और कहा यही ठीक है।
परन्तु यह सलाह लक्ष्मणजी को अच्छी नहीं लगी लक्ष्मणजी कहते हैं हे नाथ! दैव का क्या भरोसा! मन में क्रोध कीजिए और समुद्र को सुखा डालिए। यह दैव तो कायर के मन का एक आधार है। आलसी लोग ही दैव दैव पुकारा करते हैं।
महाभारत में अभिमन्यु ने चक्रव्यूह तोड़ने की कला अपने मां के पेट में सीखी थी।
इस बात पर शायद आपको विश्वास नही होता है ना!
तो यह वीडियो देखिए 8 महीने के बच्चे का।
अद्भुत अलौकिक सनातन संस्कृति🚩
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