राजा दशरथ और श्री राम शिकार करते थे। सीता जी के घर पूजा में मछली चढ़ाई जाती थी। मां दुर्गा को बकरा चढ़ाया जाता है। ये हमारे नायक हैं। हम इनकी पूजा करते हैं तथा इनके बताये रास्ते पर चलने का प्रयास करते हैं। हम बीजेपी को सपोर्ट करते हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि हम शाकाहारी हैं।
आजादी के बाद कांग्रेस की सरकार में लगातार मुसलमान ही शिक्षा मंत्री इसलिए बनायें गये थे कि हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाया जाए और मुसलमानों को आगे किया जाय। समझ में आया कांग्रेस का हिन्दू विरोध और मुस्लिम प्रेम और इसीलिए नेहरू को पंडित भी बनाया गया था।
कश्मीरी पंडितों के पास सब कुछ था लेकिन सत्ता का सपोर्ट नहीं था। कांग्रेस ने कश्मीरी हिन्दुओं के साथ गद्दारी किया जिससे उन्हें कश्मीर से भागना पड़ा। हिन्दू यदि कांग्रेस का सफाया नहीं करेंगे और अगर यह फिर सत्ता में आई तो फिर कश्मीर जैसी वारदात दोहराई जायेगी।
हम श्रीराम के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं।येऔरंगजेबी अपने भाई की गर्दन काटकर सत्ता पर बैठने वाले लोग हैं। ये हमको चढ़ावा चोरी पर उपदेश दे रहे हैं। हमारा कहना है कि तेरे से चढ़ावा चोरी से क्या मतलबॽ
हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम हैॽ
तुम्हारा नाम तो वैसे ही जगत में बदनाम है।।
भारत में आजादी की लड़ाई तो केवल नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और स्वतंत्रता सेनानी लड़े थे। कांग्रेस तो अंग्रेजो की दलाल पार्टी थी। बाहर दिखावे के लिए अनशन और अंदर अंदर रसगुल्ले का स्वाद। इसलिए अब कांग्रेस को लोग पसंद नहीं करते क्योंकि यह छिपी हकीकत अब सामने आ गई है।
भारत में मुसलमानों के वोट के लिए बीजेपी छोड़ सभी पार्टियों का रवैया हिन्दुओं को बांटने और प्रताड़ित करने का रहा है। इसलिए हिन्दू बीजेपी को ही वोट करते हैं।
जनतंत्र की सबसे ज्यादा दुर्दशा अमेरिका में हैं जो जनतंत्र का झूठा चैम्पियन बनता है। पाक पीएम को दरकिनार कर यह सेना प्रमुख जनरल को सर्वोच्च मानता है और पाक के सर्वोच्च नेता के रूप में स्वागत करता है।
कांग्रेस का इतिहास रहा है कि यह हिन्दुओं को बांटने के लिए कानून बनाती थी और हिन्दू जातियों में विद्वेष फैलाती थी। फूट डालो शासन करो। यह कांग्रेस ने अंग्रेजों से सीखा था। एससी एसटी एक्ट इसी इरादे से बनाया गया था। जिसमें बाद में संशोधन करना पड़ा।
ठाकुर, बाभन, लाला तीनों देश से निकाला। कांग्रेस का यही नारा था। कांग्रेस ने सवर्णों पर बहुत अत्याचार किया है। सन् 1989 में एससी-एसटी एक्ट के तहत बिना जांच सवर्णों को जेल में डाला जाता था तथा उन पर अत्याचार किया जाता था। बाद में जांच पड़ताल में तमाम मामले झूठे पाये गये।