जैसे जरूरी नहीं है कि हम जिसे प्रेम करते हो उसी से शादी हो उसी तरह जरूरी नहीं कि जिससे शादी हो उनसे प्रेम भी हो,प्रेम उस स्तर का व्यक्तिगत और संवदेनशील विषय है कि एक उम्र के बाद हम अपने आप से इसके जिक्र से बचते है बाकी और कुछ जो शेष है लड़कपन है...!
वो एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं,
हमारी कमियाँ निकालने में लगे हुए हैं।
वो ज��नकी अपनी लंगोटियाँ तक फटी हुई हैं
हमारी पगड़ी उछालने में लगे हुए हैं
- महशर आफ़रीदी
लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार तुम्हारा है
तुम झूठ को सच लिख दो अख़बार तुम्हारा है
इस दौर के फ़रियादी जायें तो कहां जायें
कानून तुम्हारा है, दरबार तुम्हारा है
सूरज की तपन तुमस�� बर्दाश्त नहीं होती
एक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है
वैसे तो हर एक शै में साया है तुम्हारा ही
दुश्वार बहुत लेकिन दीदार तुम्हारा है
कोई भी इसे अपना कहता हो भले लेकिन
इस "चाँद" पे तो केवल अधिकार तुम्हारा है
—— अर्जुन सिंह चाँद🌷
नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है
कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर अच्छा लगता है
मिलने-जुलने वालों में तो सब ही अपने जैसे हैं
जिस से अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है
- ��िदा फ़ाज़ली
शिद्दत से मुझ से हाथ छुड़ाने के बावजूद
थोड़ा सा रह गया है वो जाने के बावजूद
अपने सफ़र के वक़्त में तन्हा ही रह गया
इक 'उम्र दोस्तों पे लुटाने के बावजूद
कोई सवाल ज़िंदगी का हल नहीं हुआ
पढ़ने में सारी 'उम्र गँवाने के बावजूद
❤️🫶🏻
अंकित मौर्य