"32 डिग्रियाँ – झूठ
संविधान निर्माता – झूठ
‘विश्व रत्न’ उपाधि – झूठ
‘सिंबल ऑफ नॉलेज’ – झूठ
गरीब परिवार से थे – झूठ
पढ़ाई में अव्वल थे – झूठ
देश की आज़ादी में योगदान दिया – झूठ"
झूठ के सहारे किसी साधारण मनुष्य को भगवान बनाने की कोशिश लंबे समय तक नहीं टिक सकती।
सत्य को दबाया जा सकता है, पर मिटाया नहीं जा सकता बुलबुला आखिर फूटना ही था।