भारतीय संस्कृति बिना रक्तपात, बिना बल-प्रयोग के देश की सीमा के बाहर प्रायः बौद्ध धम्म के साथ गई, जिसका सभ्य जगत के अधिकांश भाग पर सम्मान और स्वागत हुआ. बधाई बुद्ध पूर्णिमा.
बधाई सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जयंती 💐
🇮🇳🦚🇮🇳 अखण्ड भारत के निर्माता,मौर्य साम्राज्य के संस्थापक,भारत के प्रथम शक्तिशाली ऐतिहासिक सम्राट, कुशल सेनानायक, महान विजेता, योग्य शासक।
बधाई सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जयंती 💐
🇮🇳🦚🇮🇳 अखण्ड भारत के निर्माता,मौर्य साम्राज्य के संस्थापक,भारत के प्रथम शक्तिशाली ऐतिहासिक सम्राट, कुशल सेनानायक, महान विजेता, योग्य शासक।
परतंत्र #भारत में सामाजिक कुरितियों को हटाने और उच्च शिक्षा स्थापित करने की पहल करने वाले सुप्रसिद्ध समाज #उद्धारक एवं #क्रांतिकारी महात्मा ज्योतिबा फूले जी की जयंती पर सादर नमन ।
#JyotibaPhule
तो रत्नागिरी (ओडिशा ) की खुदाई चल रही है. नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं. तथागत बुद्ध के टूटे सिर मिल रहे हैं. एकाश्मक हाथी मिला है. सिंह पीठिका मिली है. बहुत सारे वोटिव स्तूप मिले हैं. रत्नागिरी में महाविहार था. लिखित सबूत मिला है.
यह धम्मध्वज है, जिसे उंची काठी पर लगाकर बौद्ध लोग त्रिरत्नों की पुजा करते थे| धम्मध्वज का चिन्ह त्रिरत्न होता था| आज भी होली के दिन बड़ी उंची काठी जमीन पर खडी़ कर उसकी पुजा करते हैं और बाद में खीर पकाने का प्रतीक के रूप में होलका अर्थात होलीका की पवित्र अग्नि जलाते हैं|
आप कहते हैं कि शब्दों में क्या रखा है...?
रखा है....!
शब्दों के खेल से ही एक मानव - समूह पिशाच हो गया, दूसरा राक्षस हो गया, तीसरा भूत हो गया....
शब्दो��� के खेल से ही एक राजा - समूह सांप हो गया, दूसरा भैंसा हो गया, तीसरा असुर हो गया.....
और अनेक जातियाँ शूद्र हो गईं....
आज भरहुत में वो स्तूप नहीं है, जिसे सम्राट असोक ने ईंटों से बनवाया था। कनिंघम ने लिखा है कि भरहुत गांव में 200 से अधिक घर भरहुत स्तूप से उखाड़ कर लाई गई ईंटों से बने हैं। अनुमान किया जा सकता है कि भरहुत का स्तूप कितना विशाल और भव्य रहा होगा!
ओटो स्टीन की पुस्तक " मेगस्थनीज अंड कौटिल्य " 1921 में प्रकाशित हुई है।
ओटो स्टीन का निष्कर्ष है कि अर्थशास्त्र का लेखन मौर्य काल में नहीं हुआ है।
चंद्रगुप्त मौर्य का प्रधानमंत्री कौटिल्य नहीं हो सकता है।
ऋषिपतन के ऋषि लोग और साक्यमुनि के मुनि लोग यही ऋषि-मुनि थे.
यही लोग जंगल और गुफाओं में ध्यान-तप करते थे.
भारत को इसीलिए ऋषि-मुनियों का देश कहा जाता है.
महाराष्ट्र में तो हर पहाड़ी पर ही इन ऋषि- मुनियों का वास रहा है.
जहाँगीर और बुकानन से लेकर अनेक पर्शियन और यूरोपीय दस्तावेजों में हमें बौद्ध भिक्खुओं के लिए मग शब्द मिलता हैं। ये मग लोग तथागत बुद्ध की पूजा " निरंजन " के रूप में करते थे। मगहर का अर्थ हुआ बौद्ध भिक्खुओं का घर। हर का अर्थ घर, जो ममहर और ननहर में है। बुद्ध, मगहर, ���िरंजन और कबीर।