एक पल तो लगा होगा...
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जगमगाहटें हैं,
मगर मन उदास है।
दिल को मिले सुकून,
कुछ ऐसी तलाश है।
दीपक की लौ जलाते,
कांपे तो होंगे हाथ।
एक पल तो लगा होगा,
कोई आसपास है।
—याज्ञवल्क्य
18 अक्टूबर 2024
मो. 9171865089
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बिन सोचे ही....
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नहीं लगाव रहा दुनिया से,
सीख न पाए दुनियादारी।
अच्छा—बुरा मिला जो कुछ भी,
निर्विकार सह लेते हैं।
मन का कोना अब भी चंचल,
बचपन-सा अल्हड़पन बाकी।
कसम तुम्हारी, बिन सोचे ही,
अनायास कुछ कह देते हैं।
—याज्ञवल्क्य
मो. 9171865089
किसी की आंख में आंसू...
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मुझे अच्छे नहीं लगते।
किसी की राह में कांटे
मुझे अच्छे नहीं लगते।
बहुत छोटे हैं अपने हाथ
लेकिन जिद नहीं छोटी,
मेरे अंदाज, ये तेवर
उन्हे अच्छे नहीं लगते।
-याज्ञवल्क्य
मो. 9171865089