मथुरा में कंस के समय की परंपराओं से जुड़े ऐतिहासिक 'हाथी टीला' को वक्फ़ की संपत्ति बताया गया था और मुस्लिम पक्ष ने वहाँ कब्रिस्तान बनाने की कोशिश की थी।
विरोध-प्रदर्शन के बाद, अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाया और बाउंड्री वॉल को गिरा दिया।
दिल्ली की विशेष अदालत ने आईआरसीटीसी होटल अनुबंध के बदले भूमि धन-शोधन मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव व अन्य 6 के विरुद्ध पीएमएलए संबंधी आरोप तय किए हैं।
कांग्रेस का काला अध्याय, चैप्टर - 187
187. 19 सितंबर 1960 आज ही के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु जी ने अमेरिका तथा विश्व बैंक के दबाव में विषैले साँप पाकिस्तान को सिंधु नदी,झेलम नदी और चेनाब नदी का पानी पिलाने का अमानवीय कृत्य किया ।इस समझौते के कारण भारत के किसानों का पानी बंद,पनबिजली परियोजनाओं पर रोक ।हमने अपना 80 प्रतिशत पानी का हिस्सा दुश्मन पाकिस्तान को सौंप दिया,इतना ही नहीं आज के बाज़ार मूल्य के हिसाब से लगभग 30 हज़ार करोड़ हमने पाकिस्तान को दे दिया ।मोदी जी के ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस समझौते के तोड़ने के बाद भी @INCIndia के युवराज राहुल गांधी जी ने संसद के अंदर या बाहर एक शब्द नहीं बोला है ।इस समझौते के कारण पंजाब का बँटवारा हो गया,पाकिस्तान ने शुरुआत में इसी नदी के सहारे,पंजाब तथा जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया ।1965 और 1971 के युद्ध में नदियों के इस रास्ते अपने सैनिकों को भारत में प्रवेश कराया ।नेहरु गॉंधी परिवार के मंसूबों पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए
#CongressDarkHistory
ईमानदारी और साहस के पहाड़ के सामने अच्छे-अच्छे लोग 360° झुक जाते हैं… ये तो फिर भी 😄
पूर्व DGP अनुराग गुप्ता जी, अब सवाल सिर्फ जाँच पर नहीं, बल्कि जाँच में सामने आए तथ्यों की प्रस्तुति पर भी है।
आपको यह भी बताना होगा कि आखिर आपने किन परिस्थितियों में जाँच से जुड़े तथ्यों को उस रूप में प्रस्तुत किया गया, जिस पर आज गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं?
और सबसे बड़ा सवाल की आखिर आपने किसके दबाव या इशारे पर तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था? 😡
अब आपकी जवाबदेही तय होगी गुप्ता जी चिंता मत करिए 😡
@ExamsFighters@akhileshsi1@PMOIndia@JmmJharkhand@BJP4Jharkhand@BJP4India@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren
झारखंड की अपनी एक बेहद अनूठी और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा है. लोक गीत हमेशा बड़ी और ऐतिहासिक घटनाओं पर बनते हैं. ताकि कई दशकों तक संजोकर (या याद) रखा जा सके. सीएम हेमंत सोरेन के राज में लगे इस कलंक को मिटाना आसान नहीं है. @HemantSorenJMM
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सेना की जमीन की खरीद-बिक्री, IAS अधिकारी राजीव अरुण एक्का द्वारा निजी कार्यालय में सरकारी फाइलों के निपटारे, पूर्व DGP अनुराग गुप्ता पर फर्जी एनकाउंटर के आरोप, DC रामनिवास यादव के आवास से कारतूस की बरामदगी तथा JPSC-JSSC परीक्षाओं में सीटों की खरीद-बिक्री जैसे 25 से अधिक गंभीर मामलों पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को निर्देश भेजे हैं।
@HemantSorenJMM जी, आखिर इन गंभीर मामलों को दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है? जांच को बाधित करने और दोषियों पर कार्रवाई से बचने की जरूरत क्या है? ED की कार्रवाई में राज्य सरकार सहयोग क्यों नहीं कर रही है?
अब जब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, तो क्या आपकी सरकार निष्पक्ष कार्रवाई करेगी? या फिर अन्य मामलों की तरह महंगे वकीलों के सहारे इस मामले में भी रोक लगवाकर जांच को लंबा खींचने की कोशिश की जाएगी?
@narendramodi@PMOIndia@AmitShah@HMOIndia@dir_ed@CBIHeadquarters@IncomeTaxIndia@ANI@PTI_News@ians_india
अनुराग गुप्ता के बयान से स्पष्ट है कि JSSC-CGL मामले की जांच में CID पूर्वाग्रह से ग्रसित थी। उसका मकसद हर हाल में इस परीक्षा में हुई धांधली के आरोपों को नकारना था।
यही वजह है कि इतनी बड़ी साजिश को कभी ठगी का मामला बताया गया, तो कभी इस मामले को उजागर करने वाले छात्रों पर दोष मढ़ा गया।
माननीय न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए...
#Jharkhand #StudentMovement
इसके पीछे भी मनुवाद है?
पश्चिम बंगाल की ये मुस्लिम महिला अपने बीमाऱ बच्चे क़ो डॉक्टर के पास लेकर जा रही थी.. जल्दी में बुर्का नहीं पहन पाई इस पर उसके शौहर ने बका लेकर दौड़ा लिया..
बकौल राहुल गांधी इसके लिए मनुस्मृति ही जिम्मेदार है.
कहा जाता है कि अपराधी नेचर का आदमी जब एक बार अपराध करके “4P” (पद, पावर, पहुँच और पैसे) के दम पर बच निकलता है, तो वह फिर आदतन बार-बार अपराध करता रहता है। कुछ ऐसी ही कहानी है झारखंड DGP पद तक पहुँचने वाले रिटायर्ड IPS अनुराग गुप्ता की।
अमूमन रिटायर हो जाने के बाद किसी अधिकारी के पिछले कामकाज की चर्चा नहीं होती। पर झारखंड में हुए JSSC की परीक्षाओं के घोटाले में पहले की CID जाँच (जो अनुराग गुप्ता ने की थी) में घोटाला नहीं होने की बात सामने आई। फिर जब दिल्ली की तर्ज़ पर झारखंड में भी ZEN-G का अभूतपूर्व ऐतिहासिक आंदोलन हुआ, तो CID की जाँच की दिशा ही बदल गई। यह बात सामने आने लगी कि घोटाला तो हुआ, पर अनुराग गुप्ता ने ग़लत जाँच कर हाईकोर्ट तक को गुमराह कर दिया। छात्रों-बेरोज़गारों के साथ अन्याय किया गया।
अब जब ताबड़तोड़ गिरफ्तारियाँ होने लगीं, यह बात सामने आ गई कि नियुक्ति में बड़े पैमाने पर पैसे का लेन-देन कर नौकरियाँ बेच दी गई थीं, तो गुप्ता जी का इस बारे में दिया गया यह पिछला बयान फिर से वायरल होने लगा और ये आज सबसे बड़े विलेन के रूप में छात्रों, बेरोज़गारों और आम लोगों के निशाने पर आ गए हैं।
अब तो इनकी भी गिरफ्तारी की माँग हो रही है। पर गुप्ता जी के पूरे सेवाकाल में एक के बाद एक कारगुज़ारियाँ जानने वाले अफ़सरों का मानना है कि ये काम करना झारखंड की पुलिस या CID के बूते से बाहर जान पड़ता है।
हालाँकि गुप्ता जी की कारगुज़ारी के ज़माने में गूगल के सर्च पन्नों का बोलबाला नहीं था। फिर भी इनके बारे में काले कारनामों के अनगिनत चर्चे मिल जाएँगे। इन्हें पैंतीस सालों से जानने वाले इनके समकक्ष के एक अधिकारी ने अपने अनुभवों का हवाला देते हुए बताया कि शातिर दिमाग़ के गुप्ता जी का शायद ही ऐसा कोई सगा होगा, जिसके साथ उन्होंने दगा नहीं किया होगा। लेकिन IPS की नौकरी में आने के शुरुआती दिनों में इन्हें अपराध करने और उससे बच निकलने का स्वाद चखने का मज़ा मिल गया, तो ये आदतन बार-बार ग़लत काम करने और जुगाड़ लगाकर बच निकलने के एक्सपर्ट हो गए।
आज हम इनके द्वारा एक अपराधी को साँप से कटवान के आरोप वाले मामले की नीचे चर्चा कर रहे है।
क़िस्से और भी हैं, जिन्हें हम समय-समय पर सामने लाने का काम करते रहेंगे, ताकि लोगों को यह पता चले कि अगर वर्दी पहनने वाला व्यक्ति ही अपराध करने-कराने लगे, तो वह समाज को कितना नुक़सान पहुँचा सकता है?
और यहीं से आने वाली पीढ़ी, खासकर प्रशासनिक और पुलिस सेवा में जाने वाले नौजवानों के लिए सबसे बड़ा सबक शुरू होता है।
कुर्सी कितनी भी बड़ी हो, एक दिन छूटती जरूर है। वर्दी उतरती है, पद चला जाता है, पावर खत्म होती है, पहुँच कमजोर पड़ती है और पैसे की ताकत भी हर जगह काम नहीं आती। उसके बाद आदमी के साथ केवल उसके कर्मों का इतिहास चलता है।
इसलिए “4P” के नशे में कभी यह भ्रम मत पालिए कि आज बच गए तो हमेशा बचते रहेंगे। व्यवस्था की कमजोरी का फायदा उठाकर बच निकलना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं होता और न ही ताकत के दम पर दबा दिया गया सवाल हमेशा के लिए मर जाता है।
नई पीढ़ी याद रखे कि वर्दी ताकत दिखाने का लाइसेंस नहीं, जनता द्वारा सौंपा गया विश्वास है। कुर्सी किसी की जागीर नहीं, कुछ समय के लिए मिली जिम्मेदारी है।
गलत काम करके बच निकलने की पहली सफलता पर खुश होने के बजाय डरना चाहिए, क्योंकि वही सफलता आदमी के भीतर अगले गलत काम का दुस्साहस पैदा करती है। धीरे-धीरे उसे लगने लगता है कि कानून दूसरों के लिए है और वह स्वयं कानून से ऊपर है। यहीं से पतन शुरू होता है।
पद पर रहते हुए आदमी दूसरों का हिसाब लिख सकता है, लेकिन समय ऐसा मुंशी है जो एक दिन उसका अपना हिसाब भी खोल देता है।
इसलिए आने वाली पीढ़ियाँ ऐसे तमाम प्रकरणों को केवल किसी अधिकारी की कहानी समझकर न पढ़ें, बल्कि इसे चेतावनी समझेंः-
पद चला जाएगा।
पावर चली जाएगी।
पहुँच खत्म हो जाएगी।
पैसा भी साथ नहीं जाएगा।
लेकिन कर्मों की कहानी पीछे रह जाएगी।
और अंततः आदमी की पहचान इस बात से नहीं होती कि वह कितनी बड़ी कुर्सी तक पहुँचा था, बल्कि इससे होती है कि कुर्सी से उतरने के बाद लोग उसे सम्मान से याद करते हैं या उसके कारनामों के उदाहरण देकर उसके नाम पर थूकते हैं और अगली पीढ़ी को नसीहत देते हैं।
समय की अदालत में “4P” की पैरवी नहीं चलती है, वहाँ आखिर में फैसला कर्म ही सुनाते हैं।
अगली कड़ी का इंतज़ार करिये…….
#Jharkhand #JPSC #JSSC #studentsdemandjustice #StudentProstestsJharkhand
@BJP4India@narendramodi@AmitShah@NitinNabin@blsanthosh@BJP4Jharkhand@yourBabulal@dasraghubar@HemantSorenJMM@JharkhandPolice@NIA_India@CBIHeadquarters@dir_ed@JPSCreformanch@kunalpratap86@prakashpoddarjh
.@RahulGandhi जी, भाजपा शासित राज्यों पर आपका दर्द छलक रहा है, लेकिन ये वीडियो देखिए — यही हकीकत झारखंड में आपकी गठबंधन वाली हेमंत सरकार में है।
यहां जमीन में गड्ढा खोदकर, रेत में मुंह लगाकर गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। बच्चे, महिलाएं मीलों चलकर गंदा पानी ढो रही हैं। हजारीबाग में बच्चे 6 महीने से गड्ढे का पानी पी रहे हैं।
मध्य प्रदेश में बीमारी से बच्चों की मौत पर आप मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगते हैं, लेकिन झारखंड में पानी, पोषण और इलाज के अभाव में मरते आदिवासी बच्चों पर आप चुप क्यों हैं?
मध्य प्रदेश पर राजनीति चमकाना आसान है, लेकिन अपने ही INDIA गठबंधन की हेमंत सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत कब दिखाएंगे?
पहले झारखंड के आदिवासी बच्चों को पानी, पोषण और इलाज दिलवाइए, फिर दूसरों को नसीहत दीजिए।
JSSC-CGL मामले की जांच को प्रभावित करने, उसे गलत दिशा में ले जाने और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कराने के आरोपों से घिरे पुलिस अधिकारी अनुराग गुप्ता पर कार्रवाई करने से मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM आखिर क्यों हिचक रहे हैं?
आखिर ऐसी क्या वजह थी कि अनुराग गुप्ता छात्रों द्वारा लगाए गए पेपर लीक के आरोपों को गलत साबित करने पर आमादा थे? क्यों वे खुलेआम मीडिया के सामने आकर इन आरोपों को खारिज करने की कोशिश कर रहे थे? झारखंड के छात्र और बेरोजगार आज यही सवाल पूछ रहे हैं।
जिस अधिकारी की भूमिका पर ही जांच को प्रभावित करने के गंभीर सवाल खड़े हों, उस पर कार्रवाई किए बिना CID की जांच और उसकी निष्पक्षता पर आखिर भरोसा कैसे किया जा सकता है?
- श्री @yourBabulal जी, नेता प्रतिपक्ष