यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25 के अनुसार, तत्वदर्शी संत वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है वह वेद के जानने वाला कहा जाता है। #SatKabirVachan#GodMorningMonday
#WhoIsKaal_InBhagavadGita
गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘ जरा सोचें कि श्री कृष्ण जी तो पहले से ही श्री अर्जुन जी के साथ थे।
#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
क्या तीर्थ यात्रा से पाप मिटते हैं...?
सूक्ष्मवेद में कहा: "गोते-गोते पड़ि है भारं।"
तीर्थ पर जीव मरते हैं, पुण्य नहीं पाप लगता है।
परमेश्वर ने गीता में कहीं भी यह साधना नहीं बताई।
सही भक्ति से ही मुक्ति संभव है।
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ऋग्वेद मण्डल नम्बर 1 सूक्त 31 मंत्र 17, ऋग्वेद मण्डल नम्बर 9 सूक्त 82 मंत्र 1-2, ऋग्वेद मण्डल नम्बर 9 सूक्त 86 मंत्र 26-27 से स्पष्ट है कि परमात्मा मानव सदृश्य साकार है देखें Factful Debates YouTube Channel.
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अनिरुद्धाचार्य जी का मानना है कि भगवान साकार भी है और निराकार भी है।
संत रामपाल जी महाराज कहते हैं कि हमारे पवित्र सद्ग्रंथ यजुर्वेद अध्याय 1 मंत्र 15, अध्याय 5 मंत्र 1, ऋग्वेद मण्डल नम्बर 1 सूक्त 31 मंत्र 17, ऋग्वेद मण्डल नम्बर 9 सूक्त 82 मंत्र 1-2,
#आओ_जैनधर्म_को_जानें
ऋषभदेव (आदिनाथ) को जैन धर्म का संस्थापक माना जाता है, जोकि साधना काल में एक वर्ष तक निराहार रहे और एक हजार वर्ष तक तपस्या की। उसके बाद उनका मोक्ष हुआ या नहीं?
Sant Rampal Ji Maharaj
#महापापी_जो_करे_जीव_हिंसा
महापापी जो करे जीव हिंसा
माता कभी बकरे, मुर्गे नहीं मांगती है। वो मां है, देवी है, वो तो दयालु है। यदि पूर्ण गुरु से दीक्षा लेकर माता के मूल मंत्र का जाप किया जाए तो साधक को मनचाहा लाभ देती है।
Sant Rampal Ji Maharaj
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अनिरुद्धाचार्य जी कहते हैं कि भक्ति से पाप नहीं कट सकता, उसे भोगना ही पड़ेगा।
संत रामपाल जी महाराज बताते हैं पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में लिखा है कि परमात्मा अपने सतभक्ति करने वाले भक्त के घोर पापों का भी नाश
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