मैं राजनीतिक और मनुस्मृति, दोनों की बात बताता हूं। राहुल गांधी सरासर झूठ बोलते हैं। हकीकत ये है। ये ‘Dismantling Global Hindutva’ के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
मैं पूछना चाहता हूं राहुल गांधी से ये पितृसत्तात्मक संस्कृति जैसा संस्कृतनिष्ठ शब्द कहाँ से आया ?
पर कभी मर्दुम अजीम रवायत सुनी है?
चार बीवी क्या है ?
तलाक का अधिकार सिर्फ पुरुष को। चुप।
हलाला से महिला पवित्र हो जाती है। चुप।
मेहरम पता है क्या होता है? हमारी सरकार आने से पहले मेहरम वो होता था कि इस्लामी मान्यता के अनुसार घर से बाहर अगर महिला निकले तो किसी पुरुष की छत्रछाया में होना चाहिए। मेहरम हमने खत्म किया। मेहरम चुप।
इस व्यक्ति की हकीकत देखो। जो कहता है हिजाब होना बहुत अच्छा है, मगर हिंदू धर्म में महिलाओं को समानता नहीं है। मैं चैलेंज करके कहता हूं, दुनिया में जितने भी धर्म और मजहब हैं, उनमें भगवान सबको कुछ न कुछ इंट्यूशन देते हैं, भगवान की कृपा होती है। ये पुरुष पर ही क्यों होती है, महिला पर क्यों नहीं?
सिर्फ भारतीय संस्कृति ऐसी है, जहां वेदों में 22 ऋषिकाएं हैं अपाला, लोपामुद्रा, मैत्रेयी, संध्या।
फैक्ट:
मनु स्मृति पर महात्मा गांधी, नेहरू, डा। अंबेडकर ने क्या कहा और इंदिरा गांधी जी के जमाने में क्या छपा।
ये आदमी अपने पिता को, दादी को, नेहरू को, गांधी जी को गलत साबित करने में लगा है।
ये लोग समाज के अंदर भारत के विरुध्द वैश्विक षड्यंत्र ‘Dismantling Global Hindutva’, जो 2021 में अमेरिकन यूनिवर्सिटी में बना था, इसके बाद जब इन्होंने कास्ट पर लड़ाने का विषय शुरू किया, हेनरी लूसी फाउंडेशन, मार्च 2021, फिर उसके बाद 2022!से तमिलनाडु में कॉन्फ्रेंस शुरू हुई ‘Eradication of Sanatan Dharma’।
अब महिलाओं की बात आई है। अगर 4 करोड़ आवास मिले हैं प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में तो 3 करोड़ गरीब महिलाएं उसमें खुद मालिक बनकर बैठी हैं। 55 करोड़ जनधन अकाउंट में 60% महिलाएं हैं। ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, कैबिनेट मंत्रिमंडल में महिलाएं और एयरफोर्स व डिफेंस सर्विसेज में परमानेंट कमीशन मिला है तो हमारे जमाने में मिला है।
आज तक जवाब दे दें। मैं चैलेंज करके कहता हूं राहुल गांधी कहो गांधी गलत थे, नेहरू गलत थे, डा अंबेडकर गलत थे, मेरी दादी गलत थी, सब गलत बोल रहे थे। मेरा आविर्भाव हुआ है अपने पूर्वजों व परिवार की बेइज़्ज़ती करे व भारत में अराजकता उत्पन्न करने के लिए।
कितने हिंदू घरों में मनुस्मृति रखी है? कितने हिंदू परिवार मनुस्मृति को पढ़ते हैं या उसका पालन करते हैं? कितनों को पता है कि उसमें लिखा क्या है? कितने हिंदू बच्चों,युवाओं को मनुस्मृति के बारे में पता भी होगा? फिर ये बेवजह की टिप्पणियाँ क्यों? एक ही धर्म को backward,patriarchal साबित करने की वजह क्या है? आप ही बताइए! इसका असली मकसद क्या हो सकता है? #justasking
इस मामले में झूठी शिकायत करने वाली महिला ने तब खुद कहा था कि 30 लाख की उगाही करेगी तो 10 उसको मिलेंगे और 20 भीम सेना को जाएंगे..ये सच जानते हुए भी समाज,सरकार,न्यायपालिका चुप क्यों हैं? सब जानते हैं कि SC/ST एक्ट के दुरुपयोग से कितनी ज़िंदगियां बर्बाद की जा रही हैं..और इसी बर्बादी पर इनकी दुकान चल रही है!
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
—
मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
FIR slapped against @ajeetbharti after he responded to derogatory remarks made against his sister. Draconian clauses of SC/ST Act 3(1) and BNS sections 196(1)(c) and 351(3), carrying jail time of up to 5 years, have deliberately been used.
Stay safe, Ajeet. We stand with you.
Irrespective of whether you agree or disagree with @ajeetbharti ; it is our duty to stand by him.
We have figured out the govt is 'match fixing' with certain groups who were "allowed to protest;" they did not face FIRs when they beat up Delhi Police, two Union Ministers went on thier knees and made this group a star & then the same group members were "conveniently attacked" in Rajasthan on the very day GC students & youngsters were protesting at Jantar Mantar Delhi to divert attention from the RHA andolan.
Those who did violence againt our cops faced no charges, but Ajeet Bharati has an FIR!
Are we Fools! It is our duty to stand up to this bullying !
It's time for judicial review of the amendments made in 2018 to SC/ST Atrocities Act which removed the safeguards laid down by the Supreme Court to check its rampant misuse.The Amendments have made it worse. Every affected party must prefer a constitutional challenge to the Act.
The SC/ST Act used against Ajeet Bharti is draconian
RT if you support him and if you want amendments in the SC/ST Law
This case should be made an example of how the SC/ST Act is misused
One can agree or disagree with need for reforms wrt Reservations but the way the government and police are treating those who are peacefully protesting and filing cases is a matter of absolute shame.
What a fall ... these are our people !
योगी जी का अजय राय द्वारा मंदिर में भक्ति का नाटक बाहर मछली पार्टी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर हमला
जिस माफिया मुफ़्तार ने भाई की हत्या की, उसी के सामने नाक रगड़ते थे
सावन में अयोध्या आया हनुमानगढ़ी का दर्शन किया और फिर अयोध्या में ही मछली भोज का आयोजन किया मछली खाया
कांग्रेसियों ने यह भी नहीं सोचा कि अयोध्या भगवान राम की नगरी है
Rajiv Gandhi had 426 LS MPs & 159 Rajya Sabha MPs. A brute majority to carry out any constitutional changes.
Yet, he ended up reversing the Shah Bano Judgement to deny her ₹180 monthly alimony, to appease the mullahs.
This is how Congress smashed patriarchy !!!
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
70% of the freedom fighters executed by the British were Brahmins.
They sacrificed their lives for the country. But what exactly did their sacrifice achieve?
Today their children and grandchildren are discriminated against by the Government. They are labelled as "oppressors" and systematically barred from education and jobs.
Is this how a country should honor those who gave up their lives for her?
Source: The plight of Brahmins by renowned historian Meenakshi Jain @IndicMeenakshi
(PS: I have not independently verified the numbers)
मनुस्मृति। जब मुद्दाविहीन हो जाओ तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब स्वयं को आधुनिक व बुद्धिजीवी दिखाना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब वोक दिखना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो।
मनुस्मृति कहती है कि कन्या का अविवाहित रह जाना बेहतर है, लेकिन उसका विवाह किसी गुणहीन पुरुष से नहीं किया जाना चाहिए। नारी-सशक्तिकरण के लिए इससे बेहतर समझ रखते हैं आप? मनुस्मृति कहती है कि शारीरिक परिपक्वता के बाद निर्धारित अवधि तक प्रतीक्षा करने के बाद ही लड़की का विवाह हो, उस समय के हिसाब से 17 वर्ष तक। बाल-विवाह के विरुद्ध इससे बेहतर कोई प्रमाण है आपके पास?
मनुस्मृति कहती है - विन्देत सदृशं पतिम्। कन्या अपने योग्य पति का स्वयं वरण करे। यदि अभिभावक विवाह नहीं कराते और कन्या स्वयं पति चुन ले, तो न कन्या किसी पाप या अपराध की भागी होती है, और न वह पुरुष जिसे वह चुनती है। स्वेच्छा और कंसेंट को इससे बेहतर परिभाषित कर सकते हैं आप?
पुत्रेण दुहिता समा। पुत्री पुत्र के समान है। स्त्री-पुरुष समानता के लिए मनुस्मृति से बेहतर कुछ ला सकते हैं आप? क़ुरान या बाइबिल लेकर आइए, देख लीजिए। स्वयं डॉ आंबेडकर ने बुढ़ापे में मनुस्मृति का लोहा माना है, उत्तराधिकार वाले विषय को लेकर। मनुस्मृति माता की निजी संपत्ति को अलग से मान्यता देती है और उसे अविवाहित पुत्री का भाग बताती है। परिवार में महिलाओं को सशक्त रखने के लिए इससे बेहतर कोई व्यवस्था अबतक लेकर आए आप?
बल, दबाव या जबरन नियंत्रण से स्त्रियों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। विश्वसनीय पुरुष भी उन्हें क़ैद नहीं रख सकते। आत्मानमात्मना यास्तु रक्षेयुस्ताः सुरक्षिताः। मतलब, जो स्त्री अपने विवेक से अपनी रक्षा करती हैं, वही सुरक्षित है। बाहरी निगरानी से ऊपर विवेक को रखा गया है। स्त्रियों को विवेकी माना गया है। इससे अधिक सम्मान देते हैं आप? आपने तो अपनी बहन तक को चुनावी राजनीति में खुद के 2 दशक बाद उतारा।
धन के देखभाल एवं प्रबंधन के लिए मनुस्मृति ने स्त्रियों पर विश्वास जताया है। राजा को मनुस्मृति आदेश देती है कि ऐसी स्त्रियों की रक्षा करे जिनके पति बाहर हैं, जिनका परिवार प्रभावशाली नहीं है, जो बीमार हैं या जिनके पति या पुत्र नहीं हैं। अगर कोई संबंधी भी किसी स्त्री की संपत्ति हड़पता है तो उसे चोर मानकर दंड देने को कहा है। इससे अधिक परवाह है आपको स्त्रियों की?
पति को आदेश है कि बाहर जाने से पहले पत्नी की आजीविका की व्यवस्था करके जाए। अब ये मत कहिएगा कि पत्नी ख़ुद नहीं कर सकती क्या। जीवेच्छिल्पैरगर्हितैः। आगे ये भी लिखा है कि पति न करे तो स्त्री ख़ुद सम्मानजनक कार्यों के जरिए कमाए। आत्मनिर्भरता के लिए इससे बेहतर नियम बना लेंगे आप?
तस्मात्साधारणो धर्मः श्रुतौ पत्न्या सहोदितः। धार्मिक कार्य पति-पत्नी साथ मिलकर करें। पत्नी के बिना कोई अनुष्ठान पूरा नहीं होता है। हमारे यहाँ पत्नी को बेगम नहीं, अर्धांगिनी कहा गया है। यहीं से निकला है 'आधी आबादी'। पूरे पचास प्रतिशत - उतना ही, जितना पुरुष का हिस्सा। पचास-पचास। इससे अधिक सटीक तरीके से बराबरी का सन्देश दे सकते हैं आप? अन्योन्यस्य। एक-दूसरे के प्रति। वैवाहिक जीवन में भी दोनों की ज़िम्मेदारियाँ हैं। मनुस्मृति कहती है कि न स्त्री और न ही पुरुष वैवाहिक मर्यादा का उल्लंघन करे। इसमें क्या जोड़ देंगे आप क्रांतिकारी कहलाने के लिए? कुछ बाक़ी है क्या? मनुस्मृति कहती है कि नियम दोनों पर हैं।
मनुस्मृति ने स्त्री को महाभागाः (सौभाग्यशालिनी और सौभाग्य लाने वाली) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को पूजार्हाः (सम्मान की अधिकारी) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को गृहदीप्तयः (घर को प्रकाशित और प्रसन्न रखने वाली) कहा। परिवार के सुख का आधार कहा। गृहस्थ-जीवन का प्रत्यक्ष आधार कहा।
अब जिसने परिवार नामक संस्था को ख़त्म करने का लक्ष्य ले रखा हो, उसे ये सब बुरा लगेगा ही। वो पूछेगा कि स्त्री परिवार के सुख के लिए तिनका भी क्यों हिलाए। वो ये नहीं पूछेगा कि मनुस्मृति ने पुरुष को भी स्त्री के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी उठाने को क्यों कहा है।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते… रटा-रटाया है, इसीलिए इसे नहीं गिनाया। सबको पता है। इसी प्रसङ्ग में ये भी लिखा है कि जिस घर में स्त्री दुःखी रहती है वह परिवार शीघ्र नष्ट होता है। यानी, परिवार की स्थिति का पैमाना यह तय कर दिया गया है कि उसमें महिलाओं को प्रसन्न रखा जा रहा है या नहीं।
लेकिन नहीं, गाली तो केवल मनुस्मृति को ही पड़ेगी। क़ुरान और बाइबिल का नाम नहीं लिया जाएगा। राहुल गाँधी आज 'स्त्रीवादी' बने हैं, काश मनुस्मृति पढ़ लिया होता कम से कम। पढ़ा तो हमने भी नहीं है, इसीलिए जो कहा जाता है मान लेते हैं। सफाई देने लगते हैं कि ये उस समय की व्यवस्था थी।
मनुस्मृति से अधिक फेमिनिज्म और कहीं नहीं है। फ़िलहाल इस इकोसिस्टम के लिए तो फेमिनिज्म सिर्फ़ अश्लीलता और अंग-प्रदर्शन ही है।
99% of Hindu households don't have the Manusmriti.
99% of Hindus have never read it.
Yet Rahul Gandhi and his gang continuously talk about the Manusmriti.
You know why?
That book is just an excuse to target Hinduism and abuse Brahmins...
राहुल गांधी के सामने हिंदू लड़कियों को स्वच्छंद आअवारा और जंतर मंतर टाइप वाली बनाने के लिए एक लड़की को स्क्रिप्ट देकर भेजा गया
और वह लड़की बोल रही है कि उसे बाहर जाने के लिए कहा जाता है कि स्कार्प दुपट्टा पहन कर जाओ घर पर बताकर जाओ
और जब यह लड़की राहुल गांधी से बोल रही थी उसी वक्त राहुल गांधी के मंच पर हिजाब बुर्का और सर से पैरों तक तंबू कनात ड्रम बनी एक मुस्लिम लड़की मौजूद थी
अगर राहुल गांधी स्कॉर्प दुपट्टा को गलत मानते हैं तो राहुल गांधी को उस मुस्लिम लड़की से कहना चाहिए था कि तुम यह सब बंधन क्यों पहनी हो उतार दो
लेकिन राहुल गांधी को सिर्फ हिंदुओं को हिंदू धर्म को बदनाम करना है और हिंदू लड़कियों को एक स्वच्छंद जंतर मंतर टाइप की बनाना है