रिजीम चेंज का सबसे बेहतर और ठोस तरीका यही है कि विपक्ष की तमाम पार्टियों के सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी निधि और योजनाओं का पूरी पारदर्शिता से भरपूर इस्तेमाल करें। विकास का ऐसा मॉडल पेश करें कि जनता को बदलाव दिखे। फिर उस काम का प्रचार भी करें और जनता का भरोसा जीतें।
तब विपक्ष के नेता जनता के सामने आकर कह सकेंगे“देखिए, हमारे सांसदों और विधायकों ने अपने क्षेत्रों में काम करके दिखाया है। अब पूरे देश की जिम्मेदारी हमें दीजिए। हम देश को 2047 नहीं, 2040 तक विकसित बनाने के लक्ष्य के साथ काम करेंगे। उसका रोडमैप भी देंगे और अपने काम का हिसाब भी।”
साथ-साथ SIR में होने वाली गड़बड़ियों, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ लड़ाई भी जारी रखें। सरकार से सवाल पूछें और जनता की समस्याओं का हल निकलवाने के लिए भी पूरी ताकत लगाएं। ये भी विपक्ष की जिम्मेदारी है।
अपने क्षेत्र में काम करके जनता के हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे और देश चलाने का भरोसा पैदा होगा। फिर देखिए, 2029 में रिजीम चेंज कैसे नहीं होता।
मोदी जी है तो मुमकिन है
रेल कर्मचारी की मेहनत और परिश्रम का हो सम्मान,,, बोनस की गणना 6cpc से नहीं,
7 th CPC के न्यूनतम BASIC PAY ₹18000, से हो,,,,या प्रेजेंट बेसिक pay se ho,,,,, तो 78 दिन का न्यूनतम बोन्स₹ 46,159दिया जाय,
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