Now the entire "Reservation dependant ecosystem" is rattled.
They never expected this level of uproar and unity against reservation.
Enjoy the meltdown!!
😂😂😂
अभी तो हमने सिर्फ़ अपने ऊपर हो रहे अत्याचार, अन्याय, राजनीतिक नफरत के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया है…….
जिस दिन बराबरी और समान अवसर की माँग करेंगे उस दिन क्या होगा?
IIT Kanpur BTech fee structure..
> A general or OBC category student pays 10,18,480 in total if his annual family income is above 5 lakh.
> While a SC/ST student will pay only 2,18,480 even if his family income is in crores..
A general or OBC student pays 5 times more for the same course and after all this, they have audacity to say Reservation is not a poverty alleviation scheme!!
मैं अभिनय सर से अपील करता हूँ जैसे उन्होंने जंतर-मंतर आंदोलन में अहम भूमिका निभायी,
वैसे ही झारखंड झारखंड के बच्चों को वहाँ पहुँच कर न्याय दिलाये, क्यूंकि कोई भी नेता और मीडिया इसपर आवाज नहीं उठाएगा
रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन में जो भी लोग बढ़-चढ़कर पोस्ट कर रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं, उन युवाओं और Genz को इस बात का विशेषतः ध्यान रखना चाहिए:-
- जो लोग पिछले 76 सालों से समाज को लड़ाकर वैमनस्यता फैलाकर गरीब, शोषित, पीड़ित का हक खाते रहे हैं वो अब आपके ख़िलाफ़ फिर से नफरत फैलाएँगे
- ये नैरेटिव सेट किया जाएगा कि सामान्य वर्ग के लोग ग़रीब दलितों को शोषितों को मिलने वाले आरक्षण का विरोध कर रहे हैं
- जबकि मुझे लगता है कि ये क्लियर मैसेज जाना चाहिए कि बात आरक्षण के समीक्षा की होनी चाहिए। इस पर चर्चा होनी चाहिए
- ये क्लियर होना चाहिए कि जो असली गरीब, दलित, शोषित, वंचित हैं उनका कभी विरोध नहीं रहा।
- पूरा मामला ये है कि जो शोषक हैं वही शोषित बनकर हर वर्ग के गरीबों के हक पर कुंडली मारकर बैठे हैं
- बात सीधी सी है कि जो जमींदार लोग, जिनकी रियासते रही हैं, जमींदारी रही हैं, जो आज पूर्णतः सामाजिक/राजनीतिक/आर्थिक रूप से संपन्न हैं वो गरीब दलित/OBC के आरक्षण में क्या कर रहे हैं?
- साथ ही बात ये भी कि हर वर्ग के गरीब के लिए फ़ीस समान हो, प्रतियोगी परीक्षा में उम्र और फीस समान हो
- यहाँ किसी समाज का विरोध नहीं बल्कि आपसी सहमति से एक विकसित भारत के रोडमैप की बात हो रही है।
कुछ महाज्ञानी लोग बता रहे हैं कि आरक्षण तब तक रहेगा जब तक जातिगत भेदभाव है!!
मैं जानना चाहता हूं कि जातिगत भेदभाव अगर है भी तो आरक्षण उसका इलाज कैसे है? जातिगत भेदभाव करने वालों के लिए निष्पक्ष कानून बना है, पुलिस है, सिस्टम है, भला आरक्षण से जातिगत भेदभाव कैसे दूर या खत्म होगा? उल्टा आरक्षण तो इस भेदभाव को बढ़ाता है।
किसी एक सीट के लिए कोई बच्चा 200 रैंक लेकर आए तो कोई 2000 और कोई दो लाख!! इस तरह तो वह बच्चा अपने आप को ऊपर मानेगा ही क्योंकि उसने वह सीट अपनी मेहनत से पाई है और उसे पता है कि बाकी लोग बिना मेहनत के आए हैं!!
और अगर आप कहते हैं कि आरक्षण इसलिए है क्योंकि उनके पास संसाधनों की कमी है तो आरक्षण संसाधनों के आधार पर दिया जाए या इससे बेहतर होगा कि आरक्षण की जगह उसे संसाधन दिया जाए। जैसे किसी के पास किताब खरीदने के पैसे नहीं हैं तो उसे किताब दी जाए, उसे लाइब्रेरी दी जाए, उसे फ्री कोचिंग दी जाए और वहां की मेहनत के आधार पर उसे सीट मिले न कि सिर्फ इसलिए कि वह एक विशेष जाति का है।।
जातिगत आरक्षण पूरी तरह बंद होना चाहिए!
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
Ask for reservation based on caste, ask scholership based on caste, ask jobs based on caste, chose your ideals based on caste, abuse Brahmins, Thakurs and Baniyas and you will be called progressive.
And ask for merit, ask for equality, ask for equal rights and treatment and suddenly you will be labelled as casteist and will be abused..
Make it make sense!!
कोकरोच को उठाने में राठी गैंग का बड़ा हाथ था।
इस गैंग के 10 - 12 हैंडल ने मिलकर कोकरोच का खूब प्रचार किया।
लेकिन आरक्षण का मुद्दा अपने आप में तेज़ी से फेल रहा है।
इसके लिये किसी “राठी गैंग” की ज़रूरत नहीं है।
वामपंथी टोला में डर का माहौल है। 🔥👍
देश में एक नई डिजिटल क्रांति आ गई है. आरक्षण के ख़िलाफ़ अभूतपूर्व ढंग से Movement बढ़ रहा है, मानो सोशल मीडिया Algorithm के तोते उड़ गए हो.
गूगल सर्च इंजन पर पिछले 24 घंटे में Reservation करोड़ो बार सर्च हो चुका है, दूसरी तरफ इंस्टाग्राम पर Reservation Hatao Movement हैंडल के फॉलोअर्स मात्र 32 घंटे में ही 2.5M क्रॉस कर गए,
अब कयास लगाए जा रहे है कि
देश का Gen Z आरक्षण के खिलाफ मजबूती से खड़ा होगी, ये पहली बार हो रहा है कि Instagram, Facebook से लेकर X समेत सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ और सिर्फ Reservation की चर्चा हो रही है,
वैसे भी जो आरक्षण 10 वर्षों के लिए लागू हुआ था वो आजादी के 76वें वर्ष में भी चलता आ रहा है, सियासी ताकते वोटबैंक की राजनीति के लिए जनता में आरक्षण की भूख बढ़ा रही है,
इसके खिलाफ मजबूती से खड़ा होना पड़ेगा, राष्ट्र निर्माण और समता के अधिकारी को सुरक्षित रखने के लिए आरक्षण को हर हाल में खत्म करना होगा,